स्थानांतरण आदेश पर झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन-स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने उठाए सवाल, सरकार से पुनर्विचार की मांग

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रांची के नामकुम स्थित स्वास्थ्य निदेशालय में ज्ञापन देने जाते झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन-स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारीगण.

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झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन-स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग के हालिया स्थानांतरण आदेशों पर गहरी आपत्ति जताई है. संघ ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आदेशों पर पुनर्विचार की मांग की है.

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Jharkhand Transfer Policy: झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन-स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल के दिनों में जारी स्थानांतरण आदेशों पर गंभीर आपत्ति जताई है. संघ के प्रदेश महासचिव शैलेन्द्र कुमार तिवारी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव तथा निदेशक प्रमुख को ज्ञापन सौंपकर स्थानांतरण आदेशों पर पुनर्विचार करने और कथित अनियमितताओं को दूर करने की मांग की. संघ ने ज्ञापन में कहा है कि जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न आदेशों के माध्यम से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों का स्थानांतरण किया. हालांकि, इन स्थानांतरणों में विभागीय नियमों, नीतियों और सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है.

संघ ने गिनाईं प्रमुख आपत्तियां

ज्ञापन में छह प्रमुख बिंदुओं के आधार पर आपत्ति दर्ज कराई गई है.

  • कई कर्मचारियों का स्थानांतरण ऐसे जिलों में किया गया है, जहां वे पहले से कार्यरत थे. इससे यह प्रतीत होता है कि स्थानांतरण नीति का समान रूप से पालन नहीं किया गया.
  • कई मामलों में प्रशासनिक दृष्टिकोण का हवाला देकर स्थानांतरण किया गया, लेकिन उसके स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किए गए. संघ का कहना है कि प्रशासनिक आधार पर किए गए स्थानांतरण का उचित औचित्य सार्वजनिक होना चाहिए.
  • कुछ कर्मचारियों का स्थानांतरण वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के विपरीत किया गया है. जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति निकट है, उन्हें भी स्थानांतरित किया गया, जबकि ऐसे मामलों में विशेष प्रावधान हैं.
  • राज्य स्तरीय संवर्ग के कर्मचारियों के स्थानांतरण में भी नियमों और नीति का समान रूप से पालन नहीं किया गया. कुछ कर्मचारियों को विशेष प्राथमिकता दिए जाने का आरोप लगाया गया है.
  • स्थानांतरण प्रक्रिया में कर्मचारियों की सहमति और विकल्प लेने संबंधी प्रावधानों का भी समुचित पालन नहीं किया गया.
  • कुछ कर्मचारियों का तबादला उनकी वर्तमान पदस्थापना अवधि पूरी होने से पहले ही कर दिया गया, जो स्थानांतरण नीति के अनुरूप नहीं है.

स्थानांतरण आदेश स्थगित करने की मांग

संघ ने अपर मुख्य सचिव से मांग की है कि स्थानांतरण आदेशों की निष्पक्ष समीक्षा कर नियमों के विपरीत जारी आदेशों को स्थगित किया जाए. साथ ही सभी आपत्तियों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए संशोधित स्थानांतरण सूची जारी की जाए, ताकि कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके.

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इन पदाधिकारियों ने सौंपा ज्ञापन

अपर मुख्य सचिव एवं निदेशक प्रमुख को ज्ञापन सौंपने वालों में झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन-स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव शैलेन्द्र कुमार तिवारी, झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रबिन्द्र ठाकुर, झारखंड स्वास्थ्य लिपिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष तुसार कांति बनर्जी, लिपिक संघ के सचिव मनोज कुमार, स्वास्थ्य विभाग जमशेदपुर के जिला मंत्री दीपक गुप्ता, टाटा के जिलाध्यक्ष प्रद्युम्न कुमार तथा नेपाल हाउस के संतोष कुमार शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि भविष्य में स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, नियमसम्मत और निर्धारित नीति के अनुरूप लागू की जाए, ताकि कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति उत्पन्न न हो और विभागीय कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सके.

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