डॉक्टरों की सुविधाएं अब इलाके की कठिनाई और काम के बोझ से तय होंगी, मुश्किल क्षेत्रों में मिलेगा ज्यादा भत्ता
प्रतीकात्मक फोटो
झारखंड में डॉक्टरों की तैनाती अब इलाके की कठिनाई और काम के बोझ पर निर्भर करेगी. मुश्किल क्षेत्रों में अधिक भत्ता और सुविधाएं मिलेंगी. जानें पूरी योजना.
रांची. झारखंड में अब डॉक्टरों की तैनाती सिर्फ पद खाली होने के आधार पर नहीं होगी. जिस इलाके में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना जितना मुश्किल होगा, वहां काम करनेवाले डॉक्टरों को उतना ही अतिरिक्त आर्थिक लाभ देने की व्यवस्था तैयार की जा रही है. इसके लिए राज्य के सभी स्वास्थ्य संस्थानों की सुविधा-वार मैपिंग होगी.
इसमें यह देखा जायेगा कि कौन सा संस्थान कितने दूर और कठिन इलाके में है, वहां मरीजों का कितना दबाव है और डॉक्टरों की जिम्मेदारी कितनी है. सरकार का मानना है कि सुदूर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में डॉक्टरों की तैनाती बड़ी चुनौती है.
हार्ड एरिया चिह्नित कर दिया जायेगा अतिरिक्त भत्ता
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जरूरी होने के बावजूद ऐसे इलाकों में डॉक्टर लंबे समय तक सेवा देने से हिचकते हैं. इन्हीं क्षेत्रों को चिह्नित कर हार्ड एरिया भत्ता देने की व्यवस्था की जायेगी.
मैपिंग सिर्फ अस्पताल या इलाके की नहीं होगी. वहां काम करनेवाले कर्मचारियों का वेतन, योग्यता, अनुभव और जिम्मेदारी भी दर्ज की जायेगी. यानी किस डॉक्टर की क्या योग्यता है, वह कितना अनुभवी है और उसे किस स्तर की जिम्मेदारी दी गयी है, इसका भी आकलन होगा. इसी आधार पर सेवा ढांचे को ज्यादा तर्कसंगत बनाने की कोशिश होगी.
सभी स्वास्थ्य संस्थानों में तैयार होगा कर्मचारियों का टीओआर
सरकार सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों के काम और जिम्मेदारी का विवरण यानी टीओआर भी तैयार करेगी. इसे विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जायेगा. इससे यह स्पष्ट होगा कि किस संस्थान में किस कर्मचारी की क्या भूमिका और जिम्मेदारी है.
डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए नियुक्तियों पर जोर
सरकार ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 67 वर्ष से घटाकर 65 वर्ष करने का फैसला किया है. इसके लिए झारखंड सेवा संहिता के नियम-73 में आवश्यक संशोधन किया गया है.
संकल्प में कहा गया है कि डॉक्टरों की कमी का स्थायी समाधान केवल सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाना नहीं है. नयी नियुक्तियों में तेजी लाने के साथ कठिन क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना भी जरूरी है.
4189 डॉक्टरों की जरूरत, तैनात हैं सिर्फ 2659
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में 4189 डॉक्टरों की जरूरत है. एमबीबीएस मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ डॉक्टरों के नियमित तथा एनएचएम संविदा पद मिलाकर 4486 पद स्वीकृत-अनुमोदित हैं. इसके बावजूद 2659 डॉक्टर ही तैनात हैं और 1311 पद खाली हैं.
इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी सबसे अधिक है. राज्य में 1416 विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत के मुकाबले 1449 पद स्वीकृत-अनुमोदित हैं, लेकिन सिर्फ 553 विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात हैं और 896 पद रिक्त हैं.
एमबीबीएस मेडिकल ऑफिसर के 2773 पदों की जरूरत के मुकाबले 3037 पद स्वीकृत-अनुमोदित हैं, जिनमें 2106 डॉक्टर तैनात और 415 पद खाली हैं.
दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में डॉक्टरों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ देने की तैयारी
- संस्थान की स्थिति, डॉक्टर की योग्यता, अनुभव और जिम्मेदारी की भी होगी मैपिंग.
- विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 67 वर्ष से घटाकर 65 वर्ष करने का फैसला किया है सरकार ने.
- संकल्प में कहा गया- नयी नियुक्तियों में तेजी लाने के साथ कठिन क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी.
सुविधाएं और प्रस्तावित सुविधाएं
- हार्ड एरिया-दुर्गम क्षेत्र इंसेंटिव (प्रस्तावित)
- आवास/आवास राशि, किराया भत्ता (प्रस्तावित), कैशलेस इलाज की सुविधा (इच्छानुसार)
- मातृ स्वास्थ्य केस इंसेंटिव (सभी को मिल रहा)
- विशेष परिस्थितियों में गैर-प्रैक्टिसिंग भत्ता (सभी को नहीं)
- आयुष्मान भारत के तहत केस आधारित प्रोत्साहन (सभी को मिल रहा)
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