बिजली निगम के 109 करोड़ के बैंक फ्रॉड में खुलासा: 57 करोड़ की FD तोड़ 40.50 करोड़ फर्जी खाते में भेजे, तीन अफसरों पर कार्रवाई

विज्ञापन

प्रतीकात्मक फोटो

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

109 करोड़ के बैंक फ्रॉड का खुलासा! बिजली निगम के 3 अधिकारी निलंबित. 57 करोड़ की FD तोड़ फर्जी खातों में भेजे गए पैसे. विभागीय जांच रिपोर्ट सीएमडी को सौंपी गई.

विज्ञापन

रांची. विभागीय जांच रिपोर्ट में झारखंड ऊर्जा विकास निगम और ऊर्जा उत्पादन निगम के 109 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड की 57.16 करोड़ रुपये की तीन सावधि जमा (एफडी) को समय से पहले तोड़ दिया गया. इनमें से 40.50 करोड़ रुपये फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए.

विज्ञापन

जांच रिपोर्ट में फर्जी बैंक खाता, फर्जी एफडी प्रमाणपत्र, बैंक खाते व प्रमाणपत्रों के सत्यापन में लापरवाही, निर्धारित प्रक्रिया के बजाय चुनिंदा बैंकों से दर मंगाने और सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के वगैर निर्णय लेने जैसे तथ्य सामने आये हैं.

तीन वित्त अधिकारियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप

इस पूरे मामले में विभाग के तीन वित्त अधिकारियों- उप महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) रंजीत कुमार सिंह, वरीय प्रबंधक (वित्त एवं लेखा) श्रीकांत और महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) जयंत प्रसाद पर गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं. इन तीनों अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी है.

विभाग के 109 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड की सीआइडी जांच जारी है. इस बीच ऊर्जा विकास निगम ने वित्त निदेशक मधुप कुमार की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर आंतरिक जांच करायी. तीनों आरोपी पदाधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही के लिए उपस्थापन पदाधिकारी वरीय प्रबंधक संतोप कुमार बनाये गये. उन्होंने तीनों आरोपी वित्त अधिकारियों से अलग-अलग पूछताछ की. पूरी जांच रिपोर्ट सीएमडी को भेज दी गयी है.

57.16 करोड़ की तीन एफडी समय से पहले तोड़ी गयीं

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि निगम की तीन एफडी, जिसमें दो की मेच्योरिटी में पांच माह और एक की मेच्योरिटी में सात माह बाकी थे, को तोड़ कर 57 करोड़ 16 लाख 96 हजार 999 रुपये निकाले गये. समय से पहले एफडी तोड़ने की वजह से निगम को चार करोड़ 50 लाख नौ हजार 713 रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ.

इसमें से 40 करोड़ 50 लाख 500 रुपये एफडी कराने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बिरसा चौक शाखा, हिनू के खाता संख्या 5600134210 में हस्तांतरित किये गये. बाद की जांच में इस खाते को फर्जी बताया गया.

इस तरह की गयी गड़बड़ी

बिना पत्र के ही पांच एफडी प्रमाण पत्र जारी किये

रिपोर्ट में बताया गया कि एफडी के लिए हस्तांतरित की गयी करीब 40.50 करोड़ की राशि के विरुद्ध प्राप्त एफडी प्रमाणपत्रों की जांच नहीं करायी गयी. प्राप्त फर्जी एफडी प्रमाणपत्रों में एक ही खाता संख्या अंकित थी, जबकि अलग-अलग एफडी प्रमाणपत्रों की खाता संख्या अलग-अलग होनी चाहिए थी.

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 25 करोड़ रुपये के लिए बैंक को पत्र भेजा गया था, लेकिन 15.50 करोड़ रुपये के लिए अलग से पत्र नहीं भेजा गया. इसके बावजूद बैंक ऑफ इंडिया ने पांच अलग-अलग एफडी प्रमाणपत्र जारी कर दिए. यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि ये प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी हुए.

इस मामले में बैंक ऑफ इंडिया के दो चेक संख्या 400742 और 400743 भी जांच के दायरे में आये. इनमें क्रमशः 25 करोड़ 500 रुपये और 15 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि का उल्लेख है.

जांच में यह सवाल उठा कि इतनी बड़ी राशि जिस खाते में भेजी गयी, उसका सत्यापन क्यों नहीं हुआ और एफडी प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी बैंक से उनका सत्यापन क्यों नहीं कराया गया.

जांच में आये तथ्य और आरोपी अधिकारी का पक्ष

रंजीत कुमार सिंह, उप महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा)

जांच दल ने पाया कि निगम के 40.50 करोड़ रुपये जिस बैंक खाते में एफडी के लिए भेजे गये, उसका सत्यापन नहीं किया गया. इसमें रंजीत कुमार सिंह की भूमिका संदिग्ध है.

आरोपी अधिकारी का पक्ष: रंजीत ने कहा कि बैंक द्वारा गलत लाभार्थी नाम और खाता संख्या देने से धोखाधड़ी हुई. इसमें उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी. सीआइडी की जांच जारी है और राशि की रिकवरी की प्रक्रिया चल रही है.

श्रीकांत, वरीय प्रबंधक (वित्त एवं लेखा)

श्रीकांत के खिलाफ भी 40.50 करोड़ रुपये की एफडी और उससे जुड़ी प्रक्रिया में संलिप्तता की बात सामने आयी है.

आरोपी अधिकारी का पक्ष: श्रीकांत ने कहा कि बैंक स्तर पर गलत विवरण देकर धोखाधड़ी की गयी है. इसमें उनका कोई प्रत्यक्ष और व्यक्तिगत निर्णय नहीं था.

ये भी पढ़ें: पलामू: तमिलनाडु मजदूरी करने गया युवक 10 दिनों से लापता, साथी को ग्रमीणों ने पुलिस को सौंपा

जयंत प्रसाद, महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा)

इन पर भी 40.50 करोड़ रुपये सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाता संख्या 5600134210 में हस्तांतरित करने, फर्जी एफडी प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं कराने और वित्तीय नियमों का पालन नहीं करने का आरोप है.

कहा गया कि यदि ये मामले में सजगता बरतते और पूरी जानकारी अपने से वरीय अथवा सक्षम प्राधिकार के समक्ष प्रस्तुत करते, तो इस बैंक के फर्जीवाड़े और निगम की बड़ी राशि की हानि को रोका जा सकता था.

आरोपी अधिकारी का पक्ष: जयंत प्रसाद ने तर्क दिया कि निगम में इन्वेस्टमेंट की प्रक्रिया पहले से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार थी, और उनके स्तर से कोई अनियमितता नहीं हुई. उन्होंने यह भी कहा कि बैंक स्तर पर गलत विवरण दिये जाने की वजह से धोखाधड़ी हुई. समय से पहले एफडी तोड़ने के मामले में उन्होंने तर्क दिया कि वैधानिक दायित्वों को पूरा करने के लिए राशि की आवश्यकता थी और पुनर्निवेश से बेहतर इंटरेस्ट रेट मिलने की संभावना थी, जिसके कारण एफडी तोड़ी गयी.

ये भी पढ़ें: रामगढ़ जा रहे 14 चक्का ट्रक में लगी आग, 12 चक्के और सीमेंट जलकर राख

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola