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अब पुलिस के लिए अपराधियों का बायोडाटा जानना होगा आसान, इस सॉफ्टवेयर के जरिये बस एक क्लिक पर सामने होगा रिकॉर्ड

Updated at : 28 Aug 2021 12:26 PM (IST)
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अब पुलिस के लिए अपराधियों का बायोडाटा जानना होगा आसान, इस सॉफ्टवेयर के जरिये बस एक क्लिक पर सामने होगा रिकॉर्ड

पुलिस यूज करेगी आइसीजेएस और सीपीएमएस सॉफ्टवेयर, पुलिसकर्मियों को सॉफ्टवेयर इस्तेमाल की दी जा रही ट्रेनिंग.

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Jharkhand Police Latest News रांची : इंट्रोप्रेवल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आइसीजेएम) व कोर्ट प्रोसेस मैनेजिंग सिस्टम (सीपीएमएस) के आ जाने से अब पुलिस के पास अपराधियों का रिकॉर्ड फिंगर टिप्स पर होगा. इस तकनीक से पुलिस अधिकारियों को कोर्ट का चक्कर व विभिन्न राज्यों में दौड़ने से निजात मिलेगा. इसके लिए पुलिस जिला पुलिस मुख्यालय को मेल करेगी, जिसके बाद वहां से उन्हें पासवर्ड मिलेगा.

पासवर्ड से जब सॉफ्टवेयर को खोला जायेगा, तब पुलिस अधिकारी कंप्यूटर पर बैठे कर पूरे देश के अपराधियों का रिकॉर्ड देख पायेंगे. इस सॉफ्टवेयर की जानकारी के लिए पुलिस को ट्रेनिंग दी गयी है़ सॉफ्टवेयर में अपराधी कब जेल गया, कब निकला ऐसे सारे रिकॉर्ड उपलब्ध रहेंगे. इस सॉफ्टवेयर को खोलने का अधिकार सिर्फ पुलिस को मिलेगा.

दोनों सिस्टम से होगी अपराधियों की मॉनिटरिंग :

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों सॉफ्टवेयर से पुलिसिंग को सुलभ, पारदर्शी व अपराधियों की मॉनिटरिंग के उद्देश्य से बनाया गया है. दोनों सिस्टम से बदलते परिवेश में अपराधियाें को पकड़ने के साथ अन्य पुलिसिंग प्रणाली और बेहतर करना है. अब पुलिसकर्मियों के आंकड़ों के लिए कहीं भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

क्या है आइसीजेएम

इंट्रोप्रेवल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आइसीजेएस) केंद्र की योजना है. यह विभिन्न स्तंभ व न्याय व्यवस्था की कड़ियों को जोड़ता है़ कोर्ट, पुलिस, जेल व फोरेंसिक साइंडस लेबोरेटरी इन सभी को एकीकृत कर एक मंच पर प्रस्तुत करता है, जिसमें अपराधी की पहचान, उसका अापराधिक इतिहास, उसकी गतिविधि, अपराधियाें के जेल जाने और निकलने के अाधिकारिक आंकड़े उपलब्ध रहेंगे़ सारे आंकड़े एकीकृत रूप से फीड किये जाते है़ं

क्या है सीपीएमएस

कोर्ट प्रोसेस मैनेजिंग सिस्टम (सीपीएमएस) वर्ष 2016 से झारखंड राज्य में ऑपरेट हो रहा है. इस सॉफ्टवेयर को झारखंड के एक पुलिस अधिकारी ने तैयार किया है़ इसमें सम्मन, वारंट, कुर्की से संबंधित सारे आंकड़े होंगे. इससे अब किसी भी पुलिसवालों को कोर्ट का चक्कर नहीं लगना पड़ेगा़ वह बैठे-बैठे कंप्यूटर या मोबाइल पर संबंधित सिस्टम में अपना कोड डाल कर खोलेंगे और सारी जानकारी प्राप्त कर लेंगे़

Posted By : Sameer Oraon

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