गैर अनुसूचित जिलों में हाइस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति 8 हफ्ते में करें, झारखंड हाईकोर्ट का आदेश

Updated at : 12 Apr 2022 7:08 AM (IST)
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गैर अनुसूचित जिलों में हाइस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति 8 हफ्ते में करें, झारखंड हाईकोर्ट का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने आदेश दिया है गैर अनुसूचित जिलों में हाइस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति 8 हफ्तों में करें. इससे पहले 10 फरवरी 2022 को भी मामले की सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने सरकार की दलील को नहीं माना कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है.

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Jharkhand News, Ranchi News रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने गैर अनुसूचित 11 जिलों में हाइस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी करने का आदेश दिया है. जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने सोमवार को अपने आदेश में कहा है कि जिन जिलों और विषयों में अनुशंसा हो चुकी है, वहां अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जाये. जिन विषयों का रिजल्ट नहीं निकला है, वहां अभ्यर्थियों का रिजल्ट निकाल कर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करें. अदालत ने सभी प्रक्रियाओं को आठ सप्ताह में पूरा करने का आदेश दिया.

हाइकोर्ट ने सरकार की दलील को नहीं माना :

10 फरवरी 2022 को मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अदालत ने सरकार की उस दलील को नहीं माना, जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है. अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भिन्न मामला है और उसे अनदेखा कर राज्य सरकार अभ्यर्थियों की नियुक्ति करे.

अदालत के आदेश के बाद अब संस्कृत, संगीत सहित अन्य विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति आगे बढ़ेगी. साथ ही पीआरटी की 25 प्रतिशत रिजर्व खाली सीटों पर भी छह विषयों में सीधी भर्ती के अभ्यर्थियों की नियुक्ति होगी. इससे पूर्व सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता श्रेष्ठ गौतम ने पैरवी की थी.

2019 में गोड्डा व देवघर में संस्कृत व संगीत के शिक्षकों की हुई थी नियुक्ति

अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने बताया कि जेएसएससी की अनुशंसा के बाद वर्ष 2019 में गोड्डा व देवघर में संस्कृत व संगीत विषय में शिक्षकों की नियुक्ति कर ली गयी थी. शेष नौ जिलों में किस आधार पर नियुक्ति नहीं की गयी, जबकि सोनी कुमारी के मामले में भी गैर अनुसूचित जिलों में नियुक्तियों पर कोई रोक नहीं थी.

लार्जर बेंच ने नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि गैर अनुसूचित जिलों से संबंधित कोई मामला लंबित नहीं है. वहीं राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन व जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल व अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा. बताया गया कि सोनी कुमारी के मामले में एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. प्रार्थी राजीव मिश्र, सुभाशीष महतो, उपासना कुमारी, तरुण कुमार व अन्य की अोर से अलग-अलग याचिका दायर की गयी थी.

वर्ष 2016 से चल रही है नियुक्ति प्रक्रिया

जेएसएससी ने राज्य के हाइस्कूलों में विभिन्न विषयों में 17,572 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वर्ष 2016 में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी. नियुक्ति प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पायी है. पीआरटी की 25 प्रतिशत खाली सीटों पर नियुक्ति सहित कई विषयों में अभी शिक्षकों की नियुक्ति होनी है. सोनी कुमारी के मामले में झारखंड हाइकोर्ट की लार्जर बेंच ने फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की नियोजन नीति को असंवैधानिक बताया था तथा 13 अनुसूचित जिलों के हाइस्कूलों में की गयी शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया था.

साथ ही गैर अनुसूचित 11 जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा था. इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी. सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जिलों में नियुक्त शिक्षकों को कार्य करते रहने का अंतरिम आदेश दिया था. यह मामला अभी भी लंबित है.

Posted By: Sameer Oraon

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