झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जंगलों के पास माइनिंग पर रोक, फिर लागू हुआ 500 मीटर का नियम
Published by : Sameer Oraon Updated At : 16 Apr 2026 10:35 PM
झारखंड हाईकोर्ट
Jharkhand High Court: झारखंड के जंगलों को बचाने के लिए हाईकोर्ट ने तल्ख तेवर अपनाए हैं. चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने माइनिंग और क्रशर के लिए पुरानी दूरी (500 और 400 मीटर) को फिर से अनिवार्य कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि केवल दूसरे राज्यों की नकल कर दूरी घटाना गलत है. प्रदूषण बोर्ड को 1 जून तक सर्वे रिपोर्ट सौंपने का जिम्मा मिला है. पढ़ें, कैसे इस एक आदेश से बदल जाएगा झारखंड के खनन क्षेत्रों का नक्शा.
Jharkhand High Court, रांची (राणा प्रताप की रिपोर्ट) : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के जंगलों और वन भूमि के आसपास होने वाली पत्थर माइनिंग (Stone Mining) और स्टोन क्रशर (Stone Crusher) के संचालन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार द्वारा पहले घटा दी गई न्यूनतम दूरी को निरस्त कर दिया है. अब नए आदेश के तहत, वन भूमि की सीमा से स्टोन माइनिंग के लिए 500 मीटर और स्टोन क्रशर के लिए 400 मीटर की न्यूनतम दूरी का पालन करना अनिवार्य होगा.
विशेषज्ञ समिति पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें दूरी को 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर करने का समर्थन किया गया था. कोर्ट ने पाया कि यह निर्णय बिना किसी ठोस वैज्ञानिक अध्ययन के लिया गया था. खंडपीठ ने टिप्पणी की कि सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति में वन और पर्यावरण क्षेत्र के जानकारों की कमी थी. कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि पर्यावरणीय नुकसान को कम करने के लिए ‘सतर्कता का सिद्धांत’ अपनाना जरूरी है.
राष्ट्रीय उद्यानों के लिए 1 किमी का सुरक्षा घेरा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks) और वन्यजीव अभ्यारण्यों (Wildlife Sanctuaries) के चारों ओर एक किलोमीटर का ‘इको सेंसिटिव जोन’ (ESZ) पूरी तरह प्रभावी रहेगा. यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्देशों के अनुरूप जारी रहेगी ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप या प्रदूषण न फैले.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिला ‘टास्क’
कोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को एक विस्तृत सर्वे करने का आदेश दिया है. बोर्ड को उन सभी माइनिंग और क्रशर यूनिट्स की सूची तैयार करनी होगी, जिन्हें पहले की रियायती दूरी के आधार पर अनुमति दी गई थी. यह सर्वे रिपोर्ट 1 जून 2026 तक अदालत में जमा करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है, तब तक हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










