झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: उपभोक्ता आयोग के पूर्व अध्यक्ष और सदस्य दोबारा पद पर हो सकते हैं नियुक्त
झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो.
झारखंड हाईकोर्ट ने जिला और राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों के कार्यकाल को लेकर अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने चार याचिकाकर्ताओं को तत्काल पुनर्नियुक्ति का आदेश दिया है.
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने जिला और राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों के कार्यकाल को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने चार रिट याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की 10 अक्टूबर 2025 की अधिसूचना में संशोधन का निर्देश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नियुक्त और कार्यरत रहे अध्यक्षों व सदस्यों को केवल इस आधार पर लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि उनका कार्यकाल 21 मई 2025 से पहले समाप्त हो गया था.
चार याचिकाकर्ताओं को तत्काल पुनर्नियुक्ति का आदेश
हाईकोर्ट ने चारों याचिकाकर्ताओं को संबंधित उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों में पुनर्नियुक्त करने का निर्देश दिया है. अदालत के आदेश के अनुसार, उमेश सिंह को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, लातेहार में सदस्य, सुरेश चंद्र जायसवाल को जामताड़ा आयोग में अध्यक्ष, बिमल कुमार लकड़ा को सिमडेगा आयोग में सदस्य और चंदन बनर्जी को दुमका आयोग में सदस्य के पद पर पुनर्नियुक्त किया जाना है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इनकी नियुक्ति को क्रमशः 8 फरवरी 2025, 30 दिसंबर 2024, 21 सितंबर 2024 और 2 नवंबर 2024 से निर्बाध रूप से जारी माना जाएगा. यह व्यवस्था नयी भर्ती होने या नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाने तक प्रभावी रहेगी.
10 अक्टूबर की अधिसूचना को हाईकोर्ट ने बदला
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने राज्य सरकार की 10 अक्टूबर 2025 की अधिसूचना का मुद्दा आया. इस अधिसूचना में केवल उन अध्यक्षों और सदस्यों के कार्यकाल को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गयी थी, जो 21 मई 2025 या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए थे. राज्य सरकार ने अपने पक्ष में कहा था कि 21 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के समय जो अध्यक्ष और सदस्य पद पर कार्यरत थे, उन्हें ही जारी रखा गया है. याचिकाकर्ताओं का कार्यकाल इससे पहले समाप्त हो चुका था, इसलिए उन्हें फिर से पद पर रखने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में 21 मई 2025 को पात्रता की कटऑफ तारीख के रूप में निर्धारित नहीं किया गया है. यह तारीख केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख थी.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के Limaye-II मामले में 21 मई 2025 को दिए गये निर्देशों का उल्लेख किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि Limaye-I से पहले नियुक्त और कार्यरत राज्य व जिला आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों को अपना पूरा कार्यकाल पूरा करने दिया जाएगा. यदि नये नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले उनका कार्यकाल समाप्त हो जाता है, तो नयी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें पद पर जारी रखा जा सकता है. हाईकोर्ट ने पाया कि चारों याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति अक्टूबर से नवंबर 2021 के बीच हुई थी और वे Limaye-I के 3 मार्च 2023 के फैसले से पहले नियुक्त होकर सेवा में थे. उनका कार्यकाल नये नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले समाप्त हुआ. इसलिए वे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के संरक्षण में आते हैं.
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सरकार की अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत
हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि 10 अक्टूबर 2025 की राज्य सरकार की अधिसूचना उस सीमा तक सुप्रीम कोर्ट के Limaye-II फैसले के विपरीत है, जहां केवल 21 मई 2025 या उसके बाद सेवानिवृत्त अध्यक्षों और सदस्यों को कार्यकाल जारी रखने का लाभ दिया गया था. अदालत ने इस हिस्से को संशोधित करते हुए सभी संबंधित अध्यक्षों और सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लाभ देने का आदेश दिया. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति Limaye-I से पहले हुई थी, उन्हें पूरा कार्यकाल पूरा करने का अवसर मिलेगा और नयी भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक उनकी नियुक्ति जारी रह सकती है. चारों रिट याचिकाओं को इसी आधार पर स्वीकार कर लिया गया. फैसला 12 अगस्त 2026 को सुनाया गया.
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