विस्थापितों को नौकरी नहीं देने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट नाराज, बोला- पुनर्वास नीति बनी तो लाभ क्यों नहीं

याचिकाकर्ता के वकील प्रेम पुजारी राय ने अदालत को बताया कि एकल पीठ ने प्रार्थी को नौकरी सहित मुआवजा देने का निर्देश दिया था, परंतु इस मामले में राज्य सरकार ने विज्ञापन निकाल कर नौकरी देने की बात कही है.
jharkhand rehabilitation policy रांची : एकल पीठ के आदेश के बावजूद विस्थापितों को नौकरी नहीं देने के मामले में चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने नाराजगी जतायी है. अदालत ने इस मामले में मुख्य सचिव व जल संसाधन सचिव को अगली सुनवाई के दौरान वीसी के माध्यम से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी.
याचिकाकर्ता के वकील प्रेम पुजारी राय ने अदालत को बताया कि एकल पीठ ने प्रार्थी को नौकरी सहित मुआवजा देने का निर्देश दिया था, परंतु इस मामले में राज्य सरकार ने विज्ञापन निकाल कर नौकरी देने की बात कही है.
अदालत ने पूछा कि जब पुनर्वास नीति बनी है, तो याचिकाकर्ता को इसका लाभ क्यों नहीं मिला. वहीं, तीन लोगों की नियुक्ति कैसे की गयी है. याचिकाकर्ता एसनाउल्लाह खान की जमीन का कतरी जलाशय के लिए वर्ष 1989-90 अधिग्रहण किया गया था, लेकिन अब तक नौकरी नहीं मिली है.
रांची . सहायक अभियंता नियुक्ति के विज्ञापन को रद्द करने के मामले में सरकार की ओर से दायर अपील याचिका की सुनवाई मंगलवार को झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ में हुई. सुनवाई के दौरान जस्टिस अपरेश सिंह ने इस मामले से स्वयं को अलग करते हुए इसे सक्षम बेंच में भेजने का निर्देश दिया.
पिछली सुनवाई के दौरान संबंधित सभी प्रतिवादियों को अदालत ने नोटिस जारी किया गया था. लगभग सभी प्रतिवादी अपने-अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में हाजिर हो गये हैं.
रांची. संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति मामले में झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने सरकार से पूछा कि राज्य के 11 गैर अनुसूचित जिलों के हाइस्कूलों में संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति पर क्यों नहीं निर्णय लिया गया है. मामले पर अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी.
Posted By : Sameer Oraon
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