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क्या झारखंड में बंद हो जाएंगी केंद्रीय कोल उपक्रम ? विस्थापन पर उठा सवाल तो CM हेमंत ने दिया ऐसा जवाब

Updated at : 10 Sep 2021 6:42 AM (IST)
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क्या झारखंड में बंद हो जाएंगी केंद्रीय कोल उपक्रम ? विस्थापन पर उठा सवाल तो CM हेमंत ने दिया ऐसा जवाब

विधानसभा में विस्थापन पर सवाल उठाया गया तो कहा सीएम हेमंत ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि कोल इंडिया पर डेढ़ लाख करोड़ बकाया, मिला सिर्फ 300 करोड़. यह दुर्भाग्य है कि रैयतों का हक मारनेवाले भारत सरकार के उपक्रम हैं पक्ष-विपक्ष सहमत हो, तो सरकार केंद्रीय कोल उपक्रमों का काम बंद कराने को तैयार

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Jharkhand News, Ranchi News रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि कोल कंपनियां सबसे ज्यादा राज्य सरकार व रैयतों को परेशान करती है. इसकी वजह से सरकार व रैयत परेशान रहते हैं. इसके बावजूद यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अगर पक्ष-विपक्ष सहमत हो, तो सरकार केंद्रीय कोल उपक्रमों का काम बंद कराने को तैयार है. मुख्यमंत्री ने यह बातें गुरुवार को सदन में विधायक ढुल्लू महतो की ओर से विस्थापन पर लाये गये गैर सरकारी संकल्प पर कही.

उन्होंने कहा कि कोल इंडिया पर सरकार का लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये बकाया है. परंतु अभी तक सरकार को बकाया मद में केंद्र सरकार से केवल 300 करोड़ ही मिले हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि रैयतों का हक मारनेवाले भारत सरकार के उपक्रम हैं. जमीन अधिग्रहण की राशि के लिए रैयत परेशान हैं. राज्य सरकार चाहती है कि पहले विस्थापितों को मुआवजा मिले, फिर उन्हें विस्थापित किया जाये.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार के उपक्रम स्थापित नहीं होते हैं, तब तक ये हाथ-पैर जोड़ते रहते हैं. जब उपक्रम स्थापित हो जाता है, तो इनका रंग बदल जाता है. अगर इसके खिलाफ लोग खड़े होने लगे तो राज्य व देश की स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. विधायक ढुल्लू महतो ने कहा था कि धनबाद जिला में खनन के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद कई विस्थापित परिवारों को अभी तक नियोजित नहीं किया गया है.

इसके कारण रैयतों में असंतोष है. उन्होंने कहा कि तेतुलमुडी, भूरीडीह और 27 अन्य मौजा के सैकड़ों परिवारों को आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है. जबकि राज्य सरकार को केंद्र सरकार द्वारा सभी विस्थापित के साथ न्याय करने के लिए प्रत्येक जिला में उपायुक्त के माध्यम से समस्या का शीघ्र निराकरण करने का आदेश है.

Posted By : Sameer Oraon

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यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

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