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Ranchi news :नवाचार को अपनाना व सहयोगी फ्रेमवर्क को बढ़ावा देना जरूरी

Updated at : 09 Jul 2025 12:15 AM (IST)
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Ranchi news :नवाचार को अपनाना व सहयोगी फ्रेमवर्क को बढ़ावा देना जरूरी

विनिर्माण उद्योग में नयी प्रौद्योगिकियों, विवाद समाधान और वेंडर विकास कार्यक्रम पर सेमिनार.

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रांची़ मेकॉन लिमिटेड व सीआइडीसी के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को चाणक्य बीएनआर में विनिर्माण उद्योग में नयी प्रौद्योगिकियों, विवाद समाधान और वेंडर विकास कार्यक्रम पर सम्मेलन का आयोजन किया गया. पीके दीक्षित (निदेशक-परियोजनाएं, मेकॉन लिमिटेड) ने कहा कि आज हर क्षेत्र में नवाचार को अपनाने और सहयोगी फ्रेमवर्क को बढ़ावा देने की आवश्यकता है. इससे कार्य सुगमता से होती है. उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती है. कार्य समय पर पूरा नहीं होने से विवाद बढ़ता है. इसमें पारदर्शिता लाने की जरूरत है. डॉ डीके सिंह (कुलपति, झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय) ने कहा कि देश के युवाओं को स्कील कोर्स के रूप में तैयार करना है. इनोवेशन नीचे लेवल से शुरू होता है. कंट्रेक्सन इंडस्ट्री किसी देश का बैकबोन होता है. हर क्षेत्र में तकनीक बदल रहा है, जिसे अपनाने की जरूरत है. आज पूरे विश्व में भारतीय कंस्ट्रक्शन कंपनियों की मांग है. भारत उभरता हुआ देश है. भारत सरकार इसी को ध्यान में रखते हुए स्कील शिक्षा पर ध्यान दे रही है. सीआइडीसी के विशेषज्ञ डॉ पीआर स्वरूप ने कहा कि हमे अपने यूथ को इंप्लाइवेबल (राेजगार योग्य) बनाना है. इसपर कार्य किया जा रहा है. कार्यक्रम के दौरान सीआइडीसी और झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया. वहीं भविष्य के प्रयासों के लिए सीआइडीसी और मेकॉन के बीच एमओआई पर हस्ताक्षर किया गया. इस अवसर पर यूके विश्वकर्मा, (कार्यपालक निदेशक, मेकॉन), नीलेश सोके (मुख्य महाप्रबंधक, मेकॉन), आरएस रमन (मुख्य महाप्रबंधक), दीपक मजूमदार (वरिष्ठ अपर निदेशक, सीआइडीसी) और आशुतोष भारद्वाज (वरिष्ठ निदेशक, सीआइडीसी) उपस्थित थे. कार्यक्रम में उद्योग और शिक्षण संस्थानों से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया. चार तकनीकी सत्र में दी गयी प्रस्तुति : सम्मेलन में चार तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया, जहां प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति दी. प्रथम सत्र में परियोजना डिलीवरी में नयी प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर चर्चा की गयी. वहीं मध्याह्न पैनल चर्चा में विवाद समाधान और संस्थागत तंत्र पर चर्चा की गयी. दूसरे सत्र में एमएसएमई की मदद करना कान्ट्रैक्टर रेटिंग प्रणाली पर चर्चा. तीसरे सत्र में खरीद रणनीतियों के विजन, चौथे सत्र में नवीनतम सामग्री और निर्माण नवाचारों पर चर्चा की गयी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPESH KUMAR

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