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रांची के पशुपतिनाथ मंदिर में होगा भारतीय नव वर्ष स्वागत समारोह, गायिका श्रुति देशमुख करेंगी भजन प्रस्तुति

भारतीय नव वर्ष स्वागत समारोह पशुपतिनाथ टेंपल मैनेजमेंट सोसायटी एवं राष्ट्र सेविका समिति द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है. इस अवसर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया जाएगा.

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्राचीन पशुपतिनाथ मंदिर में आगामी 22 मार्च को भारतीय नववर्ष, विक्रम संवत 2080 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के स्वागत के लिए सुबह 5.00 से 7.00 बजे तक समारोह का आयोजन किया गया है. इसमें आने वाले श्रद्धालु दीप प्रज्ज्वलित एवं अर्पित कर भगवान सूर्य का अभिषेक और नववर्ष का स्वागत करेंगे. रांची की उभरती गायिका श्रुति देशमुख एवं परिवार द्वारा दो घंटा के भजन की प्रस्तुति है. कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ होगा.

कार्यक्रम का आयोजन पशुपतिनाथ टेंपल मैनेजमेंट सोसायटी एवं राष्ट्र सेविका समिति द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है. इस अवसर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया जाएगा. टेंपल मैनेजमेंट सोसायटी के अध्यक्ष योग गुरु रामदेव प्रसाद गुप्ता ने बताया कि महाराष्ट्र में यह दिन गुड़ी पड़वा तथा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में उगादि पर्व के रूप में मनाया जाता है.

उन्होंने नव वर्ष के स्वागत में 21 और 22 मार्च को अपने छत, टेरेस, बालकनी में दिया जलाने, अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फहराने, घरों के द्वार, आम के पत्तों की वंदनवार से सजाने, घरों में विशेष पकवान बनाने तथा परिवार सहित मंदिर जाने की अपील की.

विक्रम संवत् का आरंभ 57 ई. पू. में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नाम पर हुआ था. विक्रमादित्य के शासन से पहले उत्तर और मध्य भारत में शकों का शासन हुआ करता था. ये लोग अत्यंत क्रूर प्रवृत्ति के थे और अपनी प्रजा को सदैव कष्ट दिया करते थे. विक्रमादित्य को न्यायप्रिय और अपनी प्रजा के हित को ध्यान में रखने वाले शासक के रूप में जाना जाता था.

राजा विक्रमादित्य ने प्रजा को शकों के अत्याचारों वाले शासन से मुक्ति दिलाई और अपनी जनता को भयमुक्त कर दिया. जिसके बाद विक्रमादित्य के विजयी होने की स्मृति में विक्रम संवत पंचांग का निर्माण किया गया. प्रत्येक वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से बसंत नवरात्र आरंभ हो जाते हैं. चैत्र नवरात्रि से ही भारतीय नववर्ष की शुरूआत मानी जाती है.

चैत्र माह नववर्ष का पहला महीना माना जाता है. इस दिन से ही पूरे वर्ष भर के अनुष्ठानों, पर्वों आदि के शुभ मुहूर्त तय किए जाते हैं. भारतीय कालगणना में विक्रम संवत पंचांग को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है. विक्रम संवत पांचांग के अनुसार ही विवाह, नामकरण, गृहप्रवेश, भूमि पूजन इत्यादि शुभकार्यों के शुभ मुहूर्त तय किए जाते हैं.

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के सूर्योदय से ही ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की. प्रभु श्री राम और धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ था. शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है. नानक के बाद दूसरे सिख गुरु अंगद देव जी का जन्म इसी दिन हुआ था. महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं कृणवंतो विश्वमआर्यम (विश्व को आर्य (श्रेष्ठ) बनाते चलो) का संदेश दिया. सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार भगवान झूलेलाल इसी दिन प्रकट हुए. संघ संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार और महर्षि गौतम का भी जन्म इसी दिन हुआ.

Prabhat Khabar News Desk
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