झारखंड में होड़ोपैथी को मिलेगा बढ़ावा, आदिवासी पारंपरिक चिकित्सा पर वैज्ञानिक शोध की तैयारी

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स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी से मुलाकात करते नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एथनो मेडिसिन का प्रतिनिधिमंडल

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झारखंड सरकार राज्य की पारंपरिक आदिवासी चिकित्सा पद्धति 'होड़ोपैथी' को वैज्ञानिक आधार देने के लिए सक्रिय है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एथनो मेडिसिन के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर इस दिशा में प्रस्ताव सौंपा है.

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रांची : झारखंड सरकार राज्य की पारंपरिक आदिवासी चिकित्सा पद्धति एथनो मेडिसिन (होड़ोपैथी) को वैज्ञानिक आधार देने और इसे व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में पहल कर रही है. इसी कड़ी में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एथनो मेडिसिन (NIEM) और आदिवासी तरंग ट्रस्ट के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से मुलाकात कर झारखंड की पारंपरिक आदिवासी चिकित्सा पद्धति के संरक्षण, शोध और संस्थागत विकास का प्रस्ताव सौंपा.

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बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एथनो मेडिसिन-होड़ोपैथी के ऐतिहासिक महत्व, वैज्ञानिक संभावनाओं और जनस्वास्थ्य में इसकी उपयोगिता पर विस्तृत प्रस्तुति दी. साथ ही इस चिकित्सा पद्धति के संरक्षण, वैज्ञानिक शोध, दस्तावेजीकरण और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया.

आदिवासी चिकित्सा ज्ञान झारखंड की अमूल्य विरासत : इरफान अंसारी

स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड सदियों पुरानी आदिवासी परंपराओं, जड़ी-बूटियों के ज्ञान और प्राकृतिक चिकित्सा की समृद्ध विरासत वाला राज्य है. आदिवासी समाज ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए औषधीय पौधों और उपचार पद्धतियों का बहुमूल्य ज्ञान सुरक्षित रखा है.

उन्होंने कहा कि इस पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना, उसका वैज्ञानिक परीक्षण कराना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है.

वैज्ञानिक प्रमाणन और दस्तावेजीकरण पर रहेगा जोर

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आज दुनिया भर में आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों पर भी गंभीर शोध हो रहे हैं. ऐसे में झारखंड की आदिवासी चिकित्सा पद्धति का भी वैज्ञानिक अध्ययन, प्रमाणन और दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए, ताकि इसकी वास्तविक उपयोगिता सामने आए और आम लोगों को इसका लाभ मिल सके.

उन्होंने संकेत दिया कि राज्य सरकार इस दिशा में विशेषज्ञ संस्थानों के साथ मिलकर आगे की कार्ययोजना तैयार करेगी.

संरक्षण से लेकर प्रचार-प्रसार तक की तैयारी

प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से एथनो मेडिसिन-होड़ोपैथी के संरक्षण, शोध, प्रशिक्षण, संस्थागत विकास और जनजागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आग्रह किया. बैठक में इस पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकसित कर मुख्यधारा से जोड़ने पर सहमति बनी.

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