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झारखंड में Coronavirus Epicenter बन सकता है रांची का हिंदपीढ़ी

Updated at : 06 Apr 2020 3:10 PM (IST)
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झारखंड में Coronavirus Epicenter बन सकता है रांची का हिंदपीढ़ी

hindpidhi may become coronavirus epicenter of jharkhand रांची : झारखंड में कोरोना वायरस के अब तक 4 मामले सामने आये हैं, जिसमें 2 राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी इलाके से हैं. इसलिए कहा जा रहा है कि हिंदपीढ़ी झारखंड में कोरोना वायरस के संक्रमण का एपिसेंटर (केंद्र) बन सकता है. इसकी आशंका इसलिए जतायी जा रही है, क्योंकि बड़े पैमाने पर तबलीगी जमात से जुड़े लोग इस क्षेत्र की एक मस्जिद में ठहरे थे. इनमें से ही एक युवती कोरोना वायरस की वाहक थी और उसके संपर्क में आने वाली एक और महिला में यह जानलेवा विषाणु पाया गया है.

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रांची : झारखंड में कोरोना वायरस के अब तक 4 मामले सामने आये हैं, जिसमें 2 राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी इलाके से हैं. इसलिए कहा जा रहा है कि हिंदपीढ़ी झारखंड में कोरोना वायरस के संक्रमण का एपिसेंटर (केंद्र) बन सकता है. इसकी आशंका इसलिए जतायी जा रही है, क्योंकि बड़े पैमाने पर तबलीगी जमात से जुड़े लोग इस क्षेत्र की एक मस्जिद में ठहरे थे. इनमें से ही एक युवती कोरोना वायरस की वाहक थी और उसके संपर्क में आने वाली एक और महिला में यह जानलेवा विषाणु पाया गया है.

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मार्च के अंत में जब कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया, तो प्रशासन ने पूरे इलाके में लोगों की स्क्रीनिंग कराने का फैसला किया. मेडिकल की टीम जब वहां पहुंची, तो लोगों ने इसका विरोध कर दिया. स्थानीय लोगों ने हाथ में पत्थर उठा लिये, तो सर्वेक्षण और लोगों की स्क्रीनिंग करने के लिए सदर अस्पताल से पहुंची मेडिकल टीम को वहां से अपना काम किये बगैर लौटना पड़ा.

हालांकि, उपायुक्त और अन्य अधिकारियों ने क्षेत्र के स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत की और लोगों को जांच के लिए तैयार किया. इसके बाद लगातार तीन दिन तक पूरे क्षेत्र में सघन स्क्रीनिंग की गयी. मेडिकल स्टाफ ने देर रात तक लोगों की जांच की. तीन दिन में 35 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हुई. जो भी कोरोना वायरस के संदिग्ध लगे, उन्हें खेलगांव के क्वारेंटाइन सेंटर में भेज दिया गया.

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सोमवार को जब एक महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी, तो उसके साथ 6 और लोगों को राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में भर्ती कराया गया. ऐसा देखा गया है कि राज्य की राजधानियों में अंतिम समय में इस विषाणु से संक्रमित लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल हो या राजस्थान की राजधानी जयपुर.

यहां तक कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी एकाएक कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी. इन सबके पीछे जमातियों का हाथ था. दिल्ली के तबलीगी जमात से निकलने वाले लोग देश के कोने-कोने में पहुंच गये. उन्होंने अपनी जांच नहीं करायी. मेडिकल की टीम जब जांच करने के लिए पहुंची, तो कई राज्यों में उन पर हमले हुए. रांची के हिंदपीढ़ी में भी मेडिकल टीम पर पथराव होते-होते रह गया.

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यहां बताना प्रासंगिक होगा कि दिल्ली के तबलीगी जमात से निकलकर 37 जमाती झारखंड के सभी 24 जिलों में पहुंच गये. अब तक इस बात की आधिकारिक जानकारी नहीं है कि इनमें से किसी को पुलिस और प्रशासन ने पकड़ा है या नहीं. हां, मलयेशिया की एक युवती को संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. इस युवती के संपर्क में रही एक और महिला के संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है.

ज्ञात हो कि झारखंड में कोरोना वायरस से संक्रमण के अब तक मात्र 4 केस सामने आये हैं. इनमें दो रांची के हिंदपीढ़ी से हैं. बोकारो की रहने वाली महिला बांग्लादेश से लौटी थी और हजारीबाग का व्यक्ति पश्चिम बंगाल के आसनसोल से यहां आया था. इसलिए प्रशासन पूरी एहतियात बरत रहा है. जैसे ही कोरोना वायरस के दूसरे मामले की पुष्टि हुई, पीड़ित महिला के साथ 6 और लोगों को रिम्स में भर्ती करा दिया गया.

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झारखंड सरकार का दावा है कि उसने कोविड19 से लड़ने की पूरी तैयारी कर रखी है. राज्य सरकार कोरोना से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है. कोरोना से संबंधित मरीजों की देखभाल के लिए राज्य में 48 हॉस्पिटल हैं, जिनमें 2,562 मरीजों को रखा जा सकता है. राज्य के अस्पतालों में 2,090 आइसोलेशन वार्ड, 1,117 बेड और 163 वेंटिलेटर हैं.

राज्य के विभिन्न जिलों में 3,676 क्वारेंटाइन सेंटर खोले गये हैं, जिसमें अब तक 14,228 लोगों को पृथक वास में रखा गया है. वहीं, 1,43,227 लोगों को होम क्वारेंटाइन किया गया है. 1,34,257 लोगों को स्टांप लगाया गया है और 11,980 लोगों ने अपनी क्वारेंटाइन की अवधि पूरी कर ली है.

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सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, रांची एनएचएम द्वारा कोविड-19 के टेस्ट हेतु राज्य के विभिन्न जिलों से 5 अप्रैल, 2020 तक 911 लोगों के ब्लड सैंपल लिये गये, जिनमें से 3 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव थी. 727 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव थी और 181 लोगों की रिपोर्ट नहीं आयी थी. इनमें से एक महिला की रिपोर्ट 6 अप्रैल को पॉजिटिव पायी गयी, जबकि 4 अप्रैल को रिम्स में जिस व्यक्ति की मौत हो गयी थी, उसकी रिपोर्ट निगेटिव है.

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राज्य में कुल 2,29,349 ट्रिपल लेयर मास्क, 65,814 n95 मास्क, 5535 पीपीई किट एवं 3,384 वीटीएम किट वितरित किये जा चुके हैं. सरकार के पास अभी स्टॉक में ये सभी सामग्री उपलब्ध हैं. जहां भी जरूरत होगी, ये चीजें वहां उपलब्ध करा दी जायेंगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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