Hindi Diwas 2022: रांची विवि में बढ़े हिंदी के शोधार्थी, एक साल में 40 से अधिक निबंधन
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 14 Sep 2022 8:08 AM
14 सितंबर 1953 में पहली बार आधिकारिक तौर पर हिंदी दिवस मनाया गया. उसके बाद से ही लगातार यह आयोजन हो रहा है. हिंदी विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. पूरी दुनिया में 175 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा पढ़ाई जा रही है.
Hindi Diwas 2022: महात्मा गांधी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की बात कही थी. इसके बाद साहित्यकारों के प्रयास से हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया. 14 सितंबर 1953 में पहली बार आधिकारिक तौर पर हिंदी दिवस मनाया गया. उसके बाद से ही लगातार यह आयोजन हो रहा है. हिंदी विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. पूरी दुनिया में 175 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा पढ़ाई जा रही है. इस बार हिंदी दिवस का थीम ‘भारतीय उपमहाद्वीप के सभी लोग हिंदी समझें और विदेशों में भी इसका प्रचार-प्रसार करें’ रखा गया है.
हिंदी के प्रति रांची विवि के विद्यार्थियों का लगाव लगातार बढ़ रहा है. स्नातक में हिंदी चुननेवाले विद्यार्थियों की संख्या साल-दर-साल बढ़ रही है. वहीं, हिंदी से एमए करने के बाद इसमें शोध करनेवाले विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ी है. वर्ष 2020 में रांची विवि के पीजी हिंदी विभाग में 191 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था. वर्ष 2021 में ऐसे विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 277 हो गयी. हालांकि, सभी कॉलेजों में पीजी हिंदी विभाग खुलने से विवि के पीजी विभाग में आवेदनों की संख्या कम हो गयी है. जबकि, वर्ष 2018 में पीजी हिंदी में एक सत्र के लिए 500 से अधिक आवेदन आते थे. वहीं, हिंदी में शोध करने वालों की संख्या भी बढ़ गयी है.
अब रांची विवि के कॉलेजों में भी हिंदी में एमए करने का मौका मिल रहा है. वर्ष 2020 में विवि के सभी 14 कॉलेजों में पीजी हिंदी में नामांकन के लिये कुल 1208 आवेदन आये थे. वहीं, वर्ष 2021 में आवेदनों की संख्या 1500 हो गयी है.
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कोरोना काल के बाद रांची विवि से हिंदी में शोध करनेवालों की संख्या अचानक बढ़ी है. वर्ष 2020 में सात विद्यार्थियों ने शोध के लिए निबंधन कराया था. वर्ष 2021 में यह संख्या 46 हो गयी. वर्ष 2022 में अब तक 39 रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं.
रांची विवि के पीजी हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रिका ठाकुर ने कहा कि हिंदी पढ़नेवालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है. साथ ही हिंदी में शोध करनेवाले भी बढ़ रहे हैं. हिंदी वैश्विक भाषा हो गयी है. यह केवल अपने देश में नहीं, बल्कि विदेशों में भी बोली और पढ़ी जा रही है.
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