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दो माह में 74 फीसदी राशि खर्च कर दिया गव्य निदेशालय ने !

कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अधीन गव्य निदेशालय ने कुल आवंटन की 84 फीसदी राशि पिछले वित्तीय वर्ष में खर्च कर लिया है. 31 मार्च तक की तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि विभाग ने विभिन्न योजनाओं पर कुल 281.01 करोड़ रुपये खर्च कर लिया है.

रांची. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अधीन गव्य निदेशालय ने कुल आवंटन की 84 फीसदी राशि पिछले वित्तीय वर्ष में खर्च कर लिया है. 31 मार्च तक की तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि विभाग ने विभिन्न योजनाओं पर कुल 281.01 करोड़ रुपये खर्च कर लिया है. विभाग का कुल आवंटन 312 करोड़ रुपये का था. इसके अनुसार विभाग ने करीब 84 फीसदी राशि वित्त वर्ष 2023-24 में खर्च कर लिया है. 31 जनवरी तक गव्य निदेशालय ने कुल स्थापना व्यय का मात्र 10 फीसदी राशि ही खर्च किया था. इसके अनुसार विभाग ने मात्र दो माह (फरवरी और मार्च) में आवंटन का 70 फीसदी राशि खर्च कर लिया है. कुछ इसी तरह की स्थिति अन्य निदेशालयों की है. उद्यान ने 91 तथा भूमि संरक्षण निदेशालय 94 फीसदी राशि खर्च कर दिया है. वहीं, सभी निदेशालयों का 31 जनवरी 2024 तक कुल उपबंध का मात्र 19 फीसदी ही खर्च था.

बजट से 83 करोड़ का कम आवंटन मिला निदेशालय को

गव्य विकास निदेशालय को कृषि विभाग ने तय बजट से करीब 83 करोड़ रुपये का कम आवंटन दिया था. विभाग का बजट 395 करोड़ रुपये का था. इसकी तुलना में 312 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया. इसमें विभाग ने 281 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया है.

केंद्र प्रायोजित योजना का एक भी पैसा खर्च नहीं

गव्य निदेशालय ने केंद्र प्रायोजित योजना का एक भी पैसा खर्च नहीं किया. निदेशालय में गव्य विकास के लिए भारत सरकार की दो परियोजना थी. इसमें नेशनल लाइव स्टॉक मिशन, नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट था. इसके लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान था. पिछले वित्तीय वर्ष में इस पर एक रुपये खर्च नहीं हो पाया.

उद्यान निदेशालय का 134 करोड़ खर्च का दावा

उद्यान निदेशालय ने पिछले वित्तीय वर्ष में प्राप्त आवंटन का करीब 92 फीसदी राशि निकाल लिया है. विभाग को 147 करोड़ रुपये का आवंटन मिला था. इसकी तुलना में विभाग ने 134.13 करोड़ रुपये खर्च कर दिया है. विभाग ने प्राप्त आवंटन में करीब नौ करोड़ रुपये वित्त वर्ष के अंत में सरेंडर कर दिया है. इससे पूर्व भी विभाग ने करीब 13 करोड़ रुपये सरेंडर किया था.

भूमि संरक्षण निदेशालय ने भी खर्च किया 94 फीसदी राशि

भूमि संरक्षण निदेशालय ने भी करीब 94 फीसदी राशि खर्च करने का दावा किया है. ज्यादातर पैसा पीएल में डाल दिया गया है. फरवरी 2024 में कृषि यंत्रों व मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना का राज्यादेश निकला था. इसको भी खर्च में दिखा दिया गया है. इस स्कीम का अभी तक टेंडर भी फाइनल नहीं हुआ है. इसके लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान है. मिनी ट्रैक्टर वितरण योजना की 34 करोड़ राशि भी खर्च होने का दावा किया गया है. इसे अतिरिक्त बंजर भूमि राइस फेलो विकास योजना के तहत तालाब जीर्णोद्धार और परकोलेशन टैंक निर्माण के स्कीम के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान था. इसमें 463 करोड़ रुपये की निकासी कर ली गयी है. हेहल स्थित जेएमटीटीसी में एक छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है. इसके लिए राज्यादेश मार्च माह में ही निकला था. इसके लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. इसको भी विभागीय खर्च में शामिल कर दिया गया है.

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