जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव सहित चार अधिकारियों पर लगा जुर्माना

Author Praveen
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जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव सहित चार अधिकारियों पर लगा जुर्माना

झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने आदेशपाल से तृतीय वर्ग के पद पर कराये गये कार्य से संबंधित वेतन भुगतान को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ी नाराजगी जतायी.

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रांची. झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने आदेशपाल से तृतीय वर्ग के पद पर कराये गये कार्य से संबंधित वेतन भुगतान को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ी नाराजगी जतायी. मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट है कि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने आदेश की जानबूझकर अवमानना की है. सुप्रीम कोर्ट के 19 मार्च 2025 के आदेश का चार सप्ताह के अंदर पालन नहीं किया गया और मामले में लगातार टालमटोल किया जाता रहा. अदालत में प्रधान सचिव द्वारा अंडरटेकिंग देने के बाद भी प्रार्थी लखन प्रसाद यादव को तृतीय वर्ग में किये गये काम का वेतन भुगतान नहीं किया गया. अदालत ने इसे गंभीर मामला मानते हुए जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव प्रशांत कुमार, मुख्य अभियंता जमील अख्तर, अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार और कार्यपालक अभियंता रंजीत कुजूर को 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया. जुर्माने की राशि एक सप्ताह में भुगतान करने पर अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थित रहने से छूट दी जायेगी. यदि भुगतान नहीं किया जाता है, तो सभी अधिकारी 12 सितंबर को सुबह 10:30 बजे सशरीर उपस्थित रहेंगे. अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि अधिकारी कैजुअल ड्रेस में अदालत में उपस्थित हुए थे, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. अगले दिन अधिकारी कैजुअल ड्रेस में नहीं, बल्कि उचित ड्रेस कोड का पालन करते हुए कोर्ट में उपस्थित होंगे. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने पैरवी की.

क्या है मामला

लखन प्रसाद यादव जल संसाधन विभाग में आदेशपाल के पद पर कार्यरत थे. विभाग ने उनसे तृतीय वर्ग का कार्य लिया, लेकिन वेतन भुगतान नहीं किया. उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. एकल पीठ ने तृतीय वर्ग के पद का वेतन देने का आदेश दिया था. इस आदेश को राज्य सरकार ने अपील दायर कर चुनौती दी, जो खारिज हो गयी. इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, वह भी खारिज हो गयी. सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह में भुगतान का आदेश दिया था. भुगतान नहीं होने पर प्रार्थी ने अवमानना याचिका दायर की थी. बार-बार भुगतान करने की बात कहने के बाद भी विभाग ने भुगतान नहीं किया. बाद में 11,87,230 रुपये का भुगतान किया गया.

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