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टीएसी पर कानूनी सलाह ले ही रही थी, कि टाइम खत्म हो गया.. नये राज्यपाल को लेकर द्रौपदी मुर्मू ने कही ये बात

Updated at : 11 Jul 2021 9:55 AM (IST)
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टीएसी पर कानूनी सलाह ले ही रही थी, कि टाइम खत्म हो गया.. नये राज्यपाल को लेकर द्रौपदी मुर्मू ने कही ये बात

राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि संविधान में जो व्यवस्था की गयी है, उसे सबको मानना चाहिए. सबको उसी के अनुरूप कार्य करना चाहिए. आर्टिकल 44 में आदिवासी हित की रक्षा के लिए गवर्नर के पास पूरी शक्ति है. राज्य सरकार ने अपने स्तर से ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल का गठन कर दिया है. फाइल मुझे देर से मिली. इस पर अभी लीगल एडवाइस ले ही रही थी कि मेरा टाइम खत्म हो गया.

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राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि संविधान में जो व्यवस्था की गयी है, उसे सबको मानना चाहिए. सबको उसी के अनुरूप कार्य करना चाहिए. आर्टिकल 44 में आदिवासी हित की रक्षा के लिए गवर्नर के पास पूरी शक्ति है. राज्य सरकार ने अपने स्तर से ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल का गठन कर दिया है. फाइल मुझे देर से मिली. इस पर अभी लीगल एडवाइस ले ही रही थी कि मेरा टाइम खत्म हो गया. हालांकि मैंने टीएसी गठन की सारी जानकारी नये गवर्नर को दे दी हूं. वह अब अपने स्तर से देखेंगे. श्रीमती मुर्मू सोमवार को अोड़िशा जाने से पूर्व शनिवार को राजभवन में पत्रकारों से बात कर रही थीं.

संविधान में आवश्यकतानुसार बदलाव हो : मौके पर राज्यपाल ने कहा कि जिस प्रकार एक व्यक्ति दूसरे से अलग होता है, उसी अनुरूप सरकार भी अलग-अलग होती है. सबके कार्य करने के अपने अलग-अलग तरीके होते हैं, लेकिन सबका लक्ष्य विकास कार्य ही रहता है. संविधान एक है, लेकिन व्यक्ति के देखने और समझने का दृष्टिकोण अलग-अलग हो जाता है. संविधान में परिस्थिति व जरूरत के आधार पर बदलाव तो होना ही चाहिए. मैं इसके पक्ष में हूं.

राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा

  • संविधान में परिस्थिति व जरूरत के आधार पर बदलाव तो होना ही चाहिए. मैं इसके पक्ष में हूं.

  • सीएनटी एक्ट में भी बदलाव हो. अब थाना का दायरा बढ़ा है. लोग क्या चाहते हैं, यह सर्वोपरि है

  • मैंने जो भी कार्य किया, उससे संतुष्ट हूं.

  • आदिवासियों के लिए शिक्षा जरूरी, अपने अधिकारों के बारे में जानें, विकास के लिए कार्य किया

सीएनटी एक्ट में भी बदलाव होना चाहिए : राज्यपाल ने कहा कि सीएनटी एक्ट में भी बदलाव होना चाहिए. अब थाना का दायरा बढ़ा है. लोग क्या चाहते हैं, यह सर्वोपरि है. भारत के संविधान में कई बार संशोधन हुए भी हैं. मैंने झारखंड के विकास के लिए बहुत कुछ करने का प्रयास किया. सब कुछ पूरा नहीं होता है. कुछ काम अधूरे भी रह जाते हैं. हर कोई सौ प्रतिशत सफल नहीं होता है. भगवान श्रीराम चंद्र भी सौ प्रतिशत सफल नहीं रहे. हां, मैं इतना कह सकती हूं कि मैंने जो भी कार्य किया, उससे संतुष्ट हूं. छह वर्ष के कार्यकाल में अगर किन्हीं को मेरा व्यवहार अच्छा नहीं लगा, तो उसे सपना समझ कर भूल जायेंगे.

आदिवासी अपने अधिकार को नहीं समझ पाये: श्रीमती मुर्मू ने कहा कि आदिवासी बहुत ही सीधे और सरल होते हैं, लेकिन अभी भी अपने अधिकार को नहीं समझ पाये हैं. इसलिए शिक्षा बहुत ही जरूरी है. आदिवासी अपनी जमीन तक को छोड़ देते हैं. एकता बहुत जरूरी है. विकास के लिए परंपरागत कृषि की जगह हमें मॉडर्न कृषि को भी अपनाने की जरूरत है. हर बच्चे को गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने की आवश्यकता है.

श्रीमती मुर्मू ने कहा कि राजभवन में वह हर समुदाय के लोगों से मिलती रहीं. सौ से अधिक पुस्तकें उन्हें गिफ्ट में मिलीं. वह अोड़िशा में अपने गांव में एक छोटे से घर में रहती हैं. शहर में घर नहीं बनाया है. यहां से जाने के बाद वह अपने उसी घर में ही रहेंगी. झारखंड से उनका आरंभ से नाता रहा है. उनकी दादी चाईबासा की ही हैं. राज्यपाल ने कहा कि यहां के सभी लोग बहुत अच्छे हैं.

Posted by: Pritish Sahay

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