महिला आरक्षण बिल के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा, सरकार की नीयत में बताया खोट

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :22 Apr 2026 7:44 PM (IST)
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Ranchi News

प्रेसवार्ता में संबोधित करतीं कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रितु चौधरी. फोटो: प्रभात खबर

Ranchi News: महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर नीयत में खोट का आरोप लगाया. रांची में प्रवक्ता रितु चौधरी ने कहा कि सरकार ने बिल को लागू करने में देरी कर महिलाओं को गुमराह किया. कांग्रेस ने तत्काल कानून लागू करने और संसद में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने की मांग की. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट

Ranchi News: महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है. बुधवार को रांची स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रितु चौधरी ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को गुमराह कर रही है और महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति कर रही है.

‘महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन की राजनीति’

रितु चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई. उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष ने इसी परिसीमन बिल का विरोध किया और उसे गिराया. कांग्रेस का मानना है कि सरकार का असली उद्देश्य महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ उठाना है.

2023 में समर्थन, फिर भी लागू नहीं हुआ बिल

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि वर्ष 2023 में विपक्ष ने भाजपा सरकार का साथ देते हुए महिला आरक्षण विधेयक को पास कराने में सहयोग किया था. इसके बावजूद केंद्र सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले इस कानून को लागू नहीं किया. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो महिलाओं को 2024 के चुनाव में ही आरक्षण का लाभ मिल जाता.

जनगणना और परिसीमन की शर्तों पर सवाल

चौधरी ने कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण बिल को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें जोड़ दीं, जिससे इसे टालने का रास्ता तैयार किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि ढाई साल बाद जल्दबाजी में बिल को अधिसूचित करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है.

प्रधानमंत्री पर भी साधा निशाना

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी. रितु चौधरी ने कहा कि देश के नाम संबोधन के जरिए महिलाओं और जनता को गुमराह किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश की गई, जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस लंबे समय से महिला आरक्षण की समर्थक रही है.

दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों पर असर का दावा

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान परिसीमन प्रस्ताव से देश के दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. उन्होंने दावा किया कि गोवा और पूर्वोत्तर के राज्यों की सीटें घट सकती हैं, जिससे इन क्षेत्रों को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश हो रही है. कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा अपने प्रभाव वाले राज्यों में सीटें बढ़ाने की रणनीति अपना रही है.

कांग्रेस का पुराना रुख और मांगें

रितु चौधरी ने बताया कि कांग्रेस पहले से ही महिला आरक्षण की पक्षधर रही है. उन्होंने कहा कि 2017 में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस बिल को लाने की मांग की थी. इसके बाद 2018 में राहुल गांधी ने 32 लाख हस्ताक्षरों के साथ महिला आरक्षण के समर्थन में पत्र सौंपा था.

तुरंत लागू करने की मांग, 2029 चुनाव पर नजर

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू किया जाए. पार्टी चाहती है कि संसद की 543 सीटों पर आरक्षण लागू कर महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए. कांग्रेस का दावा है कि अगर यह कानून लागू होता है, तो 2029 के चुनाव में संसद में महिलाओं की संख्या 181 तक पहुंच सकती है.

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बैठक में कई नेता रहे मौजूद

इस प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, सतीश पॉल मुंजनी, सोनाल शांति और कमल ठाकुर सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे. सभी नेताओं ने एक स्वर में सरकार से महिला आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्ट और त्वरित निर्णय लेने की मांग की.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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