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चिंताजनक : झारखंड की बेरोजगारी दर बढ़ी, केवल इन दो राज्यों से है स्थिति बेहतर

Updated at : 09 Jan 2022 9:10 AM (IST)
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चिंताजनक : झारखंड की बेरोजगारी दर बढ़ी, केवल इन दो राज्यों से है स्थिति बेहतर

झारखंड की बेरोजगारी दर बेहद डराने वाली है, सीएमआइइ के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल के दिसंबर माह की बेरोजगारी दर में सबसे अधिक है. सबसे अधिक बेरोजगारी दर हरियाणा में है. उसके बाद राजस्थान का नंबर है.

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रांची : झारखंड की बेरोजगारी दर 2021 के दिसंबर माह में 17.3 फीसदी हो गयी है. यह पिछले पांच साल के दिसंबर माह की बेरोजगारी दर में सबसे अधिक है. 2016 के दिसंबर में राज्य की बेरोजगारी दर सबसे न्यूनतम 1.9 फीसदी थी. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी प्राइवेट लिमिटेड (सीएमआइइ) से जारी आकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर के मामले में झारखंड देश में तीसरे पायदान पर है.

देश में सबसे अधिक बेरोजगारी दर हरियाणा में है. यहां करीब 34.1 फीसदी बेरोजगारी दर है. राजस्थान का 27.1 फीसदी है. इसके बाद झारखंड का ही नंबर आता है. पड़ोसी राज्य बिहार की बेरोजगारी दर 16 फीसदी है. पूरे देश की औसत बेरोजगारी दर दिसंबर माह में 7.84 फीसदी रही.

मई 2020 में 59% हो गयी थी बेरोजगारी दर :

झारखंड की बेरोजगारी दर कोरोना काल के दौरान बहुत अधिक बढ़ गयी थी. देश-विदेश में काम करनेवाले कई लोग काम छोड़कर लौट गये थे. इस कारण बेरोजगारी दौर तेजी से बढ़ी थी. कोरोना के कमजोर होने के बाद स्थिति सुधरने लगी थी.

सरकारी स्तर पर रोजगार सृजन के लिए कई प्रयास हुए थे. इस कारण बेरोजगारी दर 7.6 फीसदी के आसपास तक पहुंच गयी थी. जुलाई 2020 से सितंबर 2021 तक बेरोजगारी दर आठ से 13 फीसदी के बीच आ गयी थी.

चार माह तक सर्वे के बाद सामने आये आंकड़े :

संस्था करीब 11100 घरों का हर सप्ताह सर्वे कराती है. चार माह तक लगातार सर्वे कराने के बाद नतीजा तय करती है. चार माह के सर्वे का जो अंतिम माह होता है, उससे माह की बेरोजगारी दर का निर्धारण होता है. रोजगार में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को शामिल किया जाता है. रोजगार की चाह रखनेवाले ऐसे लोगों को कम से कम 100 दिनों तक रोजगार नहीं मिलता है, तो उन्हें इस सूची में शामिल किया जाता है.

सीएमआइइ की िरपोर्ट

2016 1.9

2017 8.3

2018 11.6

2019

2020

2021 17.0

बोले एक्सपर्ट : नियमित रोजगार सृजन ही उपाय

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और जाने-माने अर्थशास्त्री डॉ रमेश शरण कहते हैं कि जब तक झारखंड अपने यहां के उत्पादों के लिए प्लांट नहीं लगायेगा, नियमित रोजगार का सृजन नहीं होगा. झारखंड खान-खनिज का उत्पादक राज्य है, लेकिन इसकी प्रोसेसिंग दूसरे राज्यों में होती है. इससे यहां रोजगार पैदा नहीं हो रहे. मनरेगा रोजगार सृजन का अच्छा जरिया हो सकता है.

कम बेरोजगारी दर

कर्नाटक 1.4

गुजरात व ओड़िशा 1.6

छत्तीसगढ़ 2.1

तेलंगाना 2.2

मध्य प्रदेश 3.4

सर्वाधिक बेरोजगारी दर

हरियाणा 34.1

राजस्थान 27.1

झारखंड 17.3

बिहार 16.0

जम्मू-कश्मीर 15.0

Posted by : Sameer Oraon

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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