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समय पर नहीं मिला खून, मां की गोद में बेटे ने तोड़ा दम

Updated at : 25 Jun 2020 2:50 AM (IST)
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समय पर नहीं मिला खून, मां की गोद में बेटे ने तोड़ा दम

स्वास्थ्य व्यवस्था की खामी ने एक किशोर की जान ले ली. मामला गुमला के सदर अस्पताल का है. सिमडेगा के कोलेबिरा गांव निवासी 15 वर्षीय दीपू सिंह ने मंगलवार को समय पर खून नहीं मिलने के कारण अपनी मां की गोद में दम तोड़ दिया

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दुर्जय पासवान/जौली, गुमला : स्वास्थ्य व्यवस्था की खामी ने एक किशोर की जान ले ली. मामला गुमला के सदर अस्पताल का है. सिमडेगा के कोलेबिरा गांव निवासी 15 वर्षीय दीपू सिंह ने मंगलवार को समय पर खून नहीं मिलने के कारण अपनी मां की गोद में दम तोड़ दिया. बेटे को गोद में मरता देख मां की चीत्कार से वहां मौजूद हर लोगों की आंखें नम हो गयी. ओ-पॉजिटिव दीपू के शरीर में मात्र 3.3 ग्राम हीमोग्लोबिन था. उसे तीन यूनिट खून की जरूरत थी. अपने बेटे की जान बचाने के लिए माता-पिता ने अस्पताल प्रबंधन से खून की व्यवस्था कराने की गुहार लगायी. लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी.

अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज अभय ठाकुर के प्रयास से उनके दोस्तों ने किसी प्रकार एक यूनिट ब्लड की व्यवस्था की. अस्पताल में भर्ती होने के 22 घंटे बाद दीपू को उक्त ब्लड चढ़ाया जाने लगा. इसी क्रम में तीन घंटे बाद दीपू सिंह की मौत हो गयी. पिता चेतन सिंह ने कहा कि अगर समय पर मेरे बेटे को खून चढ़ाया जाता तो उसकी जान बच जाती. वहीं दूसरी ओर जवान बेटे की मौत के बाद भी माता-पिता की परेशानी कम नहीं हुई. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से जब शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की तो वह भी नहीं मिली. अंतत: पांच हजार रुपये में भाड़े पर वाहन ठीक कर शव को परिजन गांव ले गये.

15 वर्षीय दीपू के शरीर में मात्र 3.3 ग्राम हीमोग्लोबिन था, तीन यूनिट ओ-पॉजिटिव खून की जरूरत थी

22 घंटे बाद बड़ी मुश्किल से एक यूनिट मिला खून, खून चढ़ाने के क्रम में किशोर की हो गयी मौत

ब्लड बैंक गुमला में नहीं उपलब्ध है ओ-पॉजिटिव ब्लड, डॉक्टर ने कहा : एनीमिक था मृतक

मृत किशोर दीपू के पिता ने कहा : अगर समय पर खून मिल जाता, तो मेरे बेटे की बच जाती जान

पांच हजार में वाहन ठीक कर शव ले गये गांव

दीपू एनीमिक पेसेंट था. उसे तीन यूनिट खून की जरूरत थी. खून की व्यवस्था कर उसे चढ़ाया जा रहा था. इसी दौरान उसकी मौत हो गयी.

डॉ सुनील किस्कू, चिकित्सक, गुमला

मरीज दीपू सिंह का समय पर क्यों खून नहीं मिला. ब्लड बैंक में ओ-पॉजिटिव खून है या नहीं. इसकी जांच कराने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे.

डॉ एके उरांव, डीएस, गुमला

जिस समय मृतक के परिजन खून चढ़ाने का परचा लेकर आये थे. उस समय गुमला ब्लड बैंक में ओ-पॉजिटिव खून नहीं था. अभी भी खून की कमी है.मुक्तेश, लैब टेक्नीशियन, ब्लड बैंक

22 जून को तबीयत हुई थी खराब सदर अस्पताल में किया गया भर्ती : सिमडेगा जिला के कोलेबिरा गांव निवासी चेतन सिंह के पुत्र दीपू सिंह की 22 जून को तबीयत खराब हो गयी. उसी दिन दोपहर में दीपू को गुमला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टर ने जांच के बाद कहा कि शरीर में खून की कमी है. तीन यूनिट ब्लड चढ़ाना होगा. ब्लड नहीं मिलने पर हताश मां अपने बीमार बेटे को देख कर रोने लगी. तभी बगल के बेड पर भर्ती अभय ठाकुर ने उनसे पूछा कि बच्चे के कौन सा ब्लड ग्रुप है. मां ने कहा, ओ पॉजिटिव. इसके बाद अभय ने अपने व्हाटसअप ग्रुप में मैसेज डाला. इसके बाद 23 जून को दिन के 11 बजे उनका एक मित्र अस्पताल रक्तदान करने पहुंचा था.

रक्तदान करें दूसरों का जीवन बचायें : 15 साल के दीपू की मौत हमारी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर गयी है. केवल तीन यूनिट खून ही तो चाहिए था दीपू को, लेकिन नहीं मिला, क्यों? क्योंकि, हमारा समाज आज भी रक्तदान के महत्व को नहीं समझ पाया है. वरना गुमला के ब्लड बैंक में खून की कमी नहीं होती. प्रभात खबर पाठकों से अपील करता है कि आप स्वेच्छा से रक्तदान करें, ताकि किसी और दीपू की असमय मौत न हो.

posted by : Pritish Sahay

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