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झारखंड की जनजाजतियों की सांस्कृति और परंपरा से रू ब रू होंगे देश विदेश के लोग, कल से शुरू होगा आदि महोत्सव

Updated at : 15 Feb 2023 9:18 AM (IST)
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झारखंड की जनजाजतियों की सांस्कृति और परंपरा से रू ब रू होंगे देश विदेश के लोग, कल से शुरू होगा आदि महोत्सव

खरसावां की जैविक हल्दी लोगों के लिए खास होगी. यहां के रायजामा, गोमियाडीह, जेनालांग जैसे गांवों में जैविक हल्दी का उत्पादन हो रहा है. इस हल्दी को पिछले वर्ष अवार्ड फॉर इनोवेटिव प्रोडेक्टस का पुरस्कार मिला है

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रांची, आनंद मोहन: केंद्रीय जनजातीय कल्याण मंत्रालय की ओर से 16 फरवरी से 27 फरवरी तक दिल्ली में आदि महोत्सव का आयोजन किया जायेगा. इसमें देश-दुनिया के लोग झारखंड के आदिवासी व आदिम जनजातियों की संस्कृति, परंपरा व कलाकारी से रूबरू होंगे. महोत्सव में शामिल होने के लिए राज्य के विभिन्न जनजाति व आदिम जनजाति समुदाय से 39 कलाकार, किसान, हस्तशिल्पकार अपने उत्पाद के साथ दिल्ली पहुंच चुके हैं. ट्राइफेड के शैलेंद्र कुमार पूरी टीम के साथ दिल्ली में तैयारी में जुटे हैं. आदिवासियों द्वारा जंगल-झाड़ से मिलनेवाले पंरपरागत साधनों से तैयार उत्पादों को इस महोत्सव में रखा जायेगा.

खरसावां की जैविक हल्दी लोगों के लिए खास होगी. यहां के रायजामा, गोमियाडीह, जेनालांग जैसे गांवों में जैविक हल्दी का उत्पादन हो रहा है. इस हल्दी को पिछले वर्ष अवार्ड फॉर इनोवेटिव प्रोडेक्टस का पुरस्कार मिला है. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा को प्रयास से ट्राइफेड ने इसे बाजार में उतारा है. इस हल्दी में 7.01 प्रतिशत करक्यूमिन पाया जाता है, जो आम हल्दी में मात्र दो से तीन प्रतिशत होता है.

महोत्सव में खूंटी के सिलादोन में तैयार लाह के आभूषण भी रखे जायेंगे, जिसमें आदिवासी कलाकारों की बारीक कारीगरी दिखेगी. इसके अलावा झारखंड में उपज रहा मोती, जूट क्राफ्ट, पारंपरिक पोषक, सबई घास के उत्पाद, झाड़-पत्तों व बांस से बनाये गये आकर्षक उत्पाद और सोहराई पेंटिंग इस महोत्सव में झारखंड की समृद्ध परंपरा को जीवंत बनायेंगे.

हीरामन द्वारा 12 वर्षों में तैयार कोरवा शब्दकोष महोत्सव में पहुंचा

आदिम जनजाति के हीरामन कोरवा देश के पहले लेखक हैं, जिन्होंने 12 वर्षों के अथक प्रयास से आदिम जनजाति की भाषा में शब्द कोष तैयार किया है. यह शब्दकोष भी इस महोत्सव का हिस्सा बनेगा. झारखंड के गढ़वा जिला के रहनेवाले हीरामन ने बताया कि उनके मन में बचपन से इच्छा थी कि अपनी भाषा को ज्यादा से ज्यादा लोगों को बीच पहुंचायें. 2008 से इसे एक डायरी में लिखा और 2020 में जाकर शब्द कोष पूरा हुआ.

टीम में शामिल हैं लोग :

मरसा सोय मुरमू, पुष्पा तुरी, सुमन तुरी, इमलेन आइंद, रनी कुजूर, आशीष उरांव, निर्मल खलखो, उर्मिला सिंह, छोटा रमेश देहरी, चीता मरांडी, शशि सुमन, सुखमनी, मुन्नी देवी, महावीर उरांव, सरस्वती देवी, सुमित्रा सरदार, सरला सरदार, अमन कुमार पातर, रंजीत कच्छप, राहुल सोरेन, मलीन किस्कू, निशा कुमारी, विनोद उरांव, अजीत टेटे, निखली तिरू, बुद्धन सिंह पूर्ति, दिलेश्वर मिस्त्री, केशवती सामंत, विमला देवी, सरिता एक्का, शशि प्रभा होरो, अरुणा तिर्की, मीना लिंडा, प्रियंका कुमारी, जेवियर तिग्गा, अनिमा कच्छप, सबरी सरदार, राजेंद्र सरदार और हिरामन कोरवा.

झारखंड का मडुआ व व्यंजन देश को बतायेंगे जायका

वर्तमान में मिलेट्स वर्ष यानि मोटे अनाज का साल मनाया जा रहा है़ ऐसे में झारखंडी मडुआ की अपनी पहचान है. महोत्सव में यह देश को लोगों को एक अलग जायका से रू-ब-रू कराया आयेगा. इसके साथ ही परंपरागत व्यंजन का भी स्टॉल होगा.

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