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Ranchi News : ट्रॉमा सेंटर में 65 फीसदी ब्रेन हेमरेज व ब्रेन स्ट्रोक के मरीज, 40 वेंटिलेटर पर

Updated at : 07 Jan 2025 12:15 AM (IST)
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Ranchi News : ट्रॉमा सेंटर में 65 फीसदी ब्रेन हेमरेज व ब्रेन स्ट्रोक के मरीज, 40 वेंटिलेटर पर

ठंड के मौसम में नहीं बरतें लापरवाही, बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज भी रहें सावधान

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रांची. ठंड के मौसम में ब्रेन हेमरेज और ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ गयी है. रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में 60 से 65 फीसदी मरीज ब्रेन की इसी समस्या को लेकर भर्ती हैं. चिंता इस बात की है कि ट्रॉमा सेंटर के सभी 40 वेंटिलेटर बेड पर इन मरीजों को भर्ती किया गया है. सेंट्रल इमरजेंसी में प्रतिदिन औसतन चार मरीज ब्रेन हेमरेज और ब्रेन स्ट्रोक की समस्या लेकर आ रहे हैं. बीमारी की गंभीरता को लेकर उनको आइसीयू में रखा जा रहा है. कई बार स्थिति यह हो रही है कि इन मरीजों को बेड उपलब्ध होने में दिक्कत हो रही है, क्योंकि सभी 50 बेड फुल हैं. राज्य के विभिन्न जिलाें से भी बेहतर इलाज के लिए मरीज रिम्स आये हैं.

मेडिसिन आइसीयू में भी ब्रेन की समस्या वाले मरीज ज्यादा

मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ बिंदे कुमार ने बताया कि मेडिसिन आइसीयू में भी ब्रेन की समस्या वाले मरीज ज्यादा हैं. ओपीडी में भी अनियंत्रित बीपी वाले मरीज ज्यादा आ रहे हैं. कई ऐसे मरीज हैं जिनकी जांच की गयी, तो उनको पहली बार बीपी होने का पता चला. ऐसे मरीजों को दवा शुरू करने की सलाह दी जा रही है. ठंड में नियमित बीपी जांच कराने की सलाह सभी मरीजों को दी जा रही है.

तीन प्रकार के ब्रेन हेमरेज का खतरा

क्रिटिकल केयर के विशेषज्ञ डॉ पी भट्टाचार्या ने बताया कि ठंड के मौसम में तीन प्रकार के ब्रेन हेमरेज का खतरा रहता है. इसमें सब ओरबनाइड हेमरेज, इट्रासेरिब्रल हेमरेज और ब्रेन स्टेम हेमरेज शामिल हैं. रिम्स में भर्ती 65 फीसदी मरीजों में इन तीनों प्रकार के हेमरेज वाले मरीज हैं. हमारे यहां बीपी जांच कराने के लिए लोगों में जागरूकता नहीं है. वहीं, जांच कराने के बाद दवा नहीं लेने वालों की संख्या भी अधिक है.

बीपी की नियमित जांच करायें

ट्रामा सेंटर के विभागाध्यक्ष सह इंचार्ज डॉ प्रदीप भट्टाचार्या ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर की क्षमता 50 बेड की है, जिसमें मरीज भर्ती हैं. सभी 40 वेंटिलेटर बेड पर ब्रेन हेमरेज के मरीजों को रखा गया है. ठंड के मौसम में बीपी अनियंत्रित हो जाती है, इसलिए नियमित जांच करानी चाहिए. बीपी की दवा का डोज अचानक बढ़ाना या घटाना नहीं चाहिए. डाॅक्टर भी इसका ख्याल रखें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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