350 करोड़ की अघोषित आय के मिले सुराग, रामकृपाल कंस्ट्रक्शन में आयकर सर्वे खत्म

सांकेतिक तस्वीर| AI Image
आयकर विभाग ने रामकृपाल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों पर चला चार दिवसीय सर्वे रविवार को समाप्त कर दिया. इस दौरान 350 करोड़ रुपये की अघोषित आय के प्रारंभिक साक्ष्य मिले हैं, जिसमें हवाला लेन-देन और फर्जी कंपनियों के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं. विभाग अब जब्त दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण करेगा.
रांची : राजधानी रांची सहित बेगूसराय और गुरुग्राम में रामकृपाल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड तथा उससे संबद्ध कंपनियों के ठिकानों पर चार दिनों तक चला आयकर विभाग का सर्वे रविवार दोपहर समाप्त हो गया. सर्वे पूरा होने के बाद जांच टीम विभिन्न परिसरों से जब्त दस्तावेज, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल साक्ष्य अपने साथ ले गई. अब आयकर विभाग इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विस्तृत वित्तीय एवं फॉरेंसिक विश्लेषण करेगा. इसके बाद संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा जाएगा.
बेहिसाबी लेन-देन के दस्तावेज मिले
सूत्रों के अनुसार सर्वे के दौरान लगभग 350 करोड़ रुपये की अघोषित आय से जुड़े प्रारंभिक साक्ष्य मिले हैं. जांच में हवाला के माध्यम से नकदी के लेन-देन, अस्तित्वहीन कंपनियों के नाम पर खरीद दिखाने तथा बेहिसाबी वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी सामने आए हैं. हालांकि, आयकर विभाग ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
31 जुलाई को शुरू हुई थी कार्रवाई
आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा ने 31 जुलाई को रामकृपाल कंस्ट्रक्शन और उससे जुड़ी कंपनियों के रांची, बेगूसराय और गुरुग्राम स्थित कार्यालयों में एक साथ सर्वे शुरू किया था. चार दिनों तक चली इस कार्रवाई में करीब 150 अधिकारियों की टीम ने वित्तीय रिकॉर्ड, परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेज, बैंकिंग लेन-देन, नकद भुगतान और डिजिटल अकाउंटिंग सिस्टम की गहन जांच की.
200 करोड़ रुपये के नकद खर्च का नहीं मिला संतोषजनक ब्योरा
सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान कंपनी की ओर से दर्शाए गए करीब 200 करोड़ रुपये के नकद खर्च का संतोषजनक विवरण उपलब्ध नहीं कराया जा सका. वहीं, लगभग 50 करोड़ रुपये हवाला नेटवर्क के माध्यम से नकदी जुटाने के संकेत भी डिजिटल साक्ष्यों से मिले हैं. मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से हवाला लेन-देन से जुड़ी चैट भी जांच एजेंसियों के हाथ लगी है.
फर्जी कंपनियों के जरिए खरीद दिखाने के मिले संकेत
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जिन कंपनियों से सामग्री खरीद दर्शाई गई है, उनमें से कुछ का वास्तविक अस्तित्व नहीं मिला. आयकर विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि कहीं कर देनदारी कम दिखाने और वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया.
बैंक रिकॉर्ड और आयकर रिटर्न से होगा मिलान
आयकर विभाग अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा का बैंक रिकॉर्ड, आयकर रिटर्न तथा अन्य वित्तीय सूचनाओं से मिलान करेगा. जांच पूरी होने के बाद संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना जाएगा. उपलब्ध दस्तावेजों और जवाबों के आधार पर विभाग तय करेगा कि मामला केवल कर निर्धारण तक सीमित रहेगा या आयकर अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.
प्रारंभिक जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु
- लगभग 350 करोड़ रुपये की अघोषित आय के प्रारंभिक साक्ष्य.
- करीब 200 करोड़ रुपये के नकद खर्च का स्पष्ट विवरण नहीं मिला.
- हवाला के माध्यम से लगभग 50 करोड़ रुपये नकदी जुटाने के संकेत.
- मोबाइल और डिजिटल डिवाइस से हवाला लेन-देन से जुड़ी चैट बरामद.
- अस्तित्वहीन कंपनियों के नाम पर खरीद दिखाने के दस्तावेज मिले.
- बैंक रिकॉर्ड, परियोजना फाइलों और डिजिटल अकाउंटिंग सिस्टम की जांच पूरी.
- अब दस्तावेजों के फॉरेंसिक और वित्तीय विश्लेषण के बाद कंपनियों को नोटिस जारी किए जाएंगे.
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By Vivek Chandra
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