अब कंपनियों के सीएसआर खर्च पर नजर रखेगी राज्य सरकार

Published at :17 Sep 2014 4:08 AM (IST)
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अब कंपनियों के सीएसआर खर्च पर नजर रखेगी राज्य सरकार

।। सुनील चौधरी ।। रांची : राज्य सरकार द्वारा कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) हब बनाने का प्रस्ताव है. इसके तहत अब राज्य सरकार तय करेगी कि कंपनियों द्वारा सीएसआर के तहत क्या करना है और कहां खर्च करना है. उद्योग विभाग को नोडल विभाग बनाये जाने का प्रस्ताव है. सीएसआर के लिए बनी कमेटी में […]

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।। सुनील चौधरी ।।

रांची : राज्य सरकार द्वारा कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) हब बनाने का प्रस्ताव है. इसके तहत अब राज्य सरकार तय करेगी कि कंपनियों द्वारा सीएसआर के तहत क्या करना है और कहां खर्च करना है. उद्योग विभाग को नोडल विभाग बनाये जाने का प्रस्ताव है. सीएसआर के लिए बनी कमेटी में सरकार के अधिकारी समेत यूनिसेफ और सीआइआइ के प्रतिनिधि भी रहेंगे. कमेटी सलाहकार की भूमिका में रहेगी. बताया गया कि जल्द ही इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दे दिया जायेगा.
* सीएसआर के तहत क्या करना है
सीएसआर के तहत कंपनियों को भुखमरी नियंत्रण, गरीबी, कुपोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता व शुद्ध पेयजल के क्षेत्र में काम करना है. इसके अलावा शिक्षा को बढ़ावा देना है. वोकेशनल ट्रेनिंग देकर दक्षता विकास करना है. सीएसआर के तहत महिला सशक्तिकरण, महिलाओं व अनाथों के लिए घर व हॉस्टल का निर्माण, वृद्ध आश्रम का निर्माण करना है. साथ ही सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आगे लाने का काम करना है. कंपनियों को पर्यावरण सुरक्षा पर ध्यान देना है. कला, संस्कृति व नेशनल हेरिटेज को विकसित करना है.
* दो प्रतिशत राशि खर्च करनी है
कंपनीज एक्ट 2013 में प्रावधान किया गया है कि कंपनियों को शुद्ध मुनाफा का दो प्रतिशत सीएसआर पर खर्च करना है. कंपनीज एक्ट 2013 एक अप्रैल 2014 से प्रभावी है. इस एक्ट के तहत ही सरकार सीएसआर हब बनाने जा रही है. एक्ट के तहत कंपनी को स्थानीय क्षेत्र के विकास के लिए सीएसआर फंड बनाना है.
* राज्य में अब तक हुई पहल
एक्ट के तहत सार्वजनिक उपक्रम की कंपनियों को बड़ी परियोजना राज्य सरकार की सलाह पर लेने का निर्देश दिया गया है. खासकर सीसीएल, मेकन, एचसीएल, बीसीसीएल, बोकारो स्टील प्लांट, डीवीसी, यूसिल, एचइसी, सीएमपीडीआइ, सेल व सार्वजनिक उपक्रम के बैंकों के क्षेत्रीय कार्यालयों को यह निर्देश दिया गया है.
* 53 हजार ड्राइवरों का प्रशिक्षण होगा
पिछले दिनों मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में कहा गया था कि अगले पांच वर्षों में 53 हजार ड्राइवर की जरूरत होगी. इसके लिए सीसीएल, बीसीसीएल, सेल, टाटा मोटर को अपने कैंपस में प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया गया है. कहा गया है कि हेवी व्हीकल ड्राइवर की भारी कमी है. वहीं सभी कंपनियों को कम से कम एक आइटीआइ को अपग्रेड करने का निर्देश दिया गया है. सरकार द्वारा कहा गया है कि सीएसआर फंड की 15 फीसदी राशि स्कील डेवलपमेंट में खर्च करना है.
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