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छठी जेपीएससी : 2016 में विज्ञापन निकलते ही शुरू हो गया था विरोध

Updated at : 21 Feb 2020 6:03 AM (IST)
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छठी जेपीएससी : 2016 में विज्ञापन निकलते ही शुरू हो गया था विरोध

संजीव छात्र फिर से विज्ञापन जारी कर आरक्षण नियमों का पालन कर परीक्षा लेने की कर रहे हैं मांग रांची : छात्रों का एक समूह जेपीएससी द्वारा छठी सिविल सेवा नियुक्ति परीक्षा का शुरू से विरोध कर रहा है. छात्र पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को ही गलत बता रहे हैं. उनका कहना है कि आरक्षण का […]

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संजीव
छात्र फिर से विज्ञापन जारी कर आरक्षण नियमों का पालन कर परीक्षा लेने की कर रहे हैं मांग
रांची : छात्रों का एक समूह जेपीएससी द्वारा छठी सिविल सेवा नियुक्ति परीक्षा का शुरू से विरोध कर रहा है. छात्र पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को ही गलत बता रहे हैं.
उनका कहना है कि आरक्षण का पालन नहीं किया गया है. वे फिर से विज्ञापन जारी कर पीटी, मुख्य परीक्षा व अंतिम मेधा सूची में आरक्षण नियमों का पालन करते परीक्षा अायोजित करने की मांग कर रहे हैं छात्रों का कहना है कि 23 फरवरी 2017 को पीटी में आरक्षण दिये बिना ही 5138 अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी कर दिया.
विरोध के बाद सरकार ने 19 अप्रैल 2017 को संकल्प निकाल कर आयोग को दूसरी बार रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया. इस बार आयोग 6103 अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण करता है, क्योंकि रिजल्ट में सामान्य, एससी व एसटी वर्ग का रिजल्ट 15 गुणा यथावत रह जाता है, जबकि बीसी वन अौर बीसी टू वर्ग के अभ्यर्थियों का रिजल्ट 15 गुणा से क्रमश: 39.62 व 261 गुणा बढ़ जाता है.
झारखंड विधानसभा में प्रश्न उठने के बाद कार्मिक विभाग यह कहने पर कि रिजल्ट प्रकाशन में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया है, 24 जनवरी 2018 को मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी जाती है.
पीटी में आरक्षण नहीं : आयोग ने अपनी एक अधिसूचना में गलत कोट किया है कि पीटी में आरक्षण देय नहीं है. जबकि बिहार लोक सेवा आयोग ने एक आरटीआइ के जवाब में यह माना है कि बीपीएससी के सभी चरणों में आरक्षण का प्रावधान है.
इसमें स्पष्ट किया है कि अगर कोई आरक्षित श्रेणी का अभ्यर्थी जिसने उम्र सीमा व अवसर सीमा का लाभ नहीं दिया है अौर वे अनारक्षित श्रेणी के कट अॉफ मार्क्स के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे अारक्षित श्रेणी में सफल घोषित किया जायेगा. यह झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा 31 अक्तूबर 2011 के पत्र से स्पष्ट होता है. साथ ही यह विधानसभा द्वारा बनायी गयी अमर कुमार बाउरी समिति की रिपोर्ट से भी प्रमाणित होता है.
अनिवार्य शर्त का उल्लंघन : छात्रों का कहना है कि आयोग का विज्ञापन 23/2016 एवं कार्मिक संकल्प संख्या 3143 के अनिवार्य शर्त 15 गुणा का उल्लंघन हुआ है. 13 अप्रैल 2016 को जारी पत्र के अनुसार पीटी से मुख्य परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए अभ्यर्थियों की संख्या रिक्तियों का 15 गुणा होगा तय किया गया. इसके बाद 6103 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किये जाने को पुन: कोर्ट में चुनौती दी गयी. इसके बाद न्यूनतम क्वालिफाई अंक के तहत 34634 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए.
जिसमें फिर एक बार 15 गुणा का उल्लंधन किया गया. इस पर रिजल्ट 108 गुणा हो गया. इस रिजल्ट को फिर चुनौती दी गयी. छात्रों का कहना है कि हाइकोर्ट ने भी माना कि परीक्षा प्रक्रिया के बीच में रूल्स अॉफ गेम बदल दिया गया अौर इस तीसरी रिजल्ट को अमान्य घोषित कर दिया. इसके बाद पुन: रिजल्ट 6103 रह गया. जो सरकार द्वारा 13 अप्रैल 2016 को जारी संकल्प के अनुसार नहीं है अौर 15 गुणा न रह कर 18 गुणा हो गया है. इसके अनुसार सामान्य, एसटी, एससी 15 गुणा जबकि बीसी वन व बीसी टू का रिजल्ट क्रमश: 39 गुणा अौर 261 गुणा हो गया है. इसे सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गयी.
लेकिन कोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया अौर अपनी अोर से कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि झारखंड ने अपनी नियुक्ति नियमावली नहीं बनायी है, इसलिए जेपीएससी ने बिहार लोक सेवा आयोग की ही नियुक्ति नियमावली को कुछ संशोधनों के साथ लागू किया है. इसमे एसटी/एससी/अोबीसी से संबंधित अन्य उपबंध भी हैं.
छठी जेपीएससी : कब-कब क्या हुआ
326 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन का प्रकाशन : वर्ष 2016 में
पीटी परीक्षा का आयोजन : 18.12.2016
पीटी रिजल्ट का प्रकाशन : 23.2.2017
पीटी का संशोधित रिजल्ट प्रकाशन : 11.8.2017
पीटी के दूसरे संशोधित रिजल्ट का प्रकाशन : 6.8.2018
मुख्य परीक्षा का आयोजन : 28.01.2019 से
साक्षात्कार : 24 फरवरी 2020 से
पंचम सिविल सेवा से आरक्षण का प्रावधान समाप्त
जेपीएससी ने प्रथम से लेकर चतुर्थ सिविल सेवा पीटी में आरक्षण के प्रावधान को लागू रखा था, लेकिन पंचम सिविल सेवा से आरक्षण का प्रावधान को समाप्त कर दिया. बाउरी समिति की रिपोर्ट ने भी इसकी पुष्टि की.
झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा सिविल सेवा नियुक्ति में प्रारंभिक परीक्षा से मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों की संख्या रिक्तियों का 15 गुणा होगा. यह बात सरयू राय की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कही है. इस कमेटी ने सिविल सेवा परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम व परीक्षा पद्धति से संबंधित अपनी रिपोर्ट सरकार को दी थी. छात्रों ने कहा है कि आयोग ने मुख्य परीक्षा में भी विज्ञापन का पालन नहीं किया गया.
विभाग व आयोग द्वारा इसकी अनदेखी की गयी. अब आंदोलन कर रहे छात्र सरकार से मांग कर रहे हैं कि छठी सिविल सेवा परीक्षा की अधियाचना सरकार वापस ले अौर आरक्षण सहित जो भी विसंगतियां हैं, उसे दूर करते हुए छठी, सातवीं, आठवीं व नौवीं का एक साथ संयुक्त परीक्षा का आयोजन करवाया जाये. छात्र नेता राजकुमार मिंज ने कहा है कि छठी जेपीएससी सिविल सेवा मे घोर अनियमितताएं बरती गयी हैं. प्रारंभिक अौर मुख्य परीक्षा में पारदर्शिता व निष्पक्षता का अभाव देखने को मिला. पीटी में विज्ञापन का पालन नहीं किया गया.
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