दामाद संग अवैध रिश्ते का न हो खुलासा इसलिए छह साल की भांजी को मार डाला
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 Feb 2020 2:58 AM (IST)
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डोरंडा में 2013 में हुई हत्या का खुलासा ब्रैन मैपिंग टेस्ट, तकनीकी साक्ष्यों से खुला राज रांची : डोरंडा थाना के बहुचर्चित छह साल की नन्हीं परी (काल्पनिक नाम) हत्याकांड में सात साल बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. इनमें शाहिद अख्तर (पिता : अब्दुल […]
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- डोरंडा में 2013 में हुई हत्या का खुलासा
- ब्रैन मैपिंग टेस्ट, तकनीकी साक्ष्यों से खुला राज
रांची : डोरंडा थाना के बहुचर्चित छह साल की नन्हीं परी (काल्पनिक नाम) हत्याकांड में सात साल बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. इनमें शाहिद अख्तर (पिता : अब्दुल हमीद)और शहजादी खातून (पति : स्व मुस्तफा अंसारी) शामिल हैं.
शहजादी मृत बच्ची की मामी थी. वहीं शाहिद रिश्ते में शहजादी का दामाद लगता था. दोनों दर्जी मुहल्ले के निवासी हैं. पुलिस के अनुसार, गुजरात में हुए ब्रेन मैंपिंग टेस्ट और तकनीकी साक्ष्यों में दोनों की संलिप्तता सामने अायी है. पुलिस के अनुसार, 45 साल की शहजादी का शाहिद से अवैध संबंध था.
घटना के दिन भी दोनों एक अर्धनिर्मित घर में आपत्तिजनक स्थिति में थे. इस दौरान छह साल की परी खेलते हुए वहां पहुंच गयी. उसने दोनों को देख लिया. पोल खुलने के भय से दोनों ने बच्ची की गला दबाकर हत्या कर दी. इसके बाद वजनी चीज से वार किया. इसके बाद दोनों वहां से चले गये थे.
पुलिस के अनुसार अभी तक की जांच में बच्ची के साथ दुष्कर्म की बात सामने नहीं आयी है. बताते चलें कि पूर्व में मामले को लेकर काफी हंगामा होने के बाद पुलिस ने आनन-फानन में एक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. बाद में युवक के निर्दोष साबित होने पर पुलिस की खूब किरकिरी हुई थी.
हाइकोर्ट ने की थी तल्ख टिप्पणी
इस मामले में दिसंबर 2019 में झारखंड हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. रविरंजन व जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने पुलिस जांच में लेटलतीफी पर तल्ख टिप्पणी की थी. अदालत ने कहा था कि छह साल बाद भी घटना की जांच जारी रहने की बात कहना दुखद है.
अभी तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं होना भी शर्मनाक है. पुलिस ने इस केस का भट्ठा बैठा दिया है. इस मामले में काफी समय गंवाया जा चुका है. अब मात्र पांच फीसदी ही संभावना है कि दोषियों को सजा मिलेगी.
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