जड़ें मजबूत करने की तैयारी में भाकपा माओवादी, संगठन में किये दो बड़े फेरबदल, जानें
Updated at : 05 Feb 2020 6:32 AM (IST)
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संगठन की मजबूती को ले सलाहकार नियुक्त किया रांची : भाकपा माओवादी संगठन के नक्सलियों ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए नयी रणनीति तैयार की है. इसके तहत संगठन के लिए एक राजनीतिक सलाहकार का पद तैयार कर एक बड़े नक्सली की पोस्टिंग भी की गयी है. पुलिस या खुफिया विभाग को अभी तक […]
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संगठन की मजबूती को ले सलाहकार नियुक्त किया
रांची : भाकपा माओवादी संगठन के नक्सलियों ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए नयी रणनीति तैयार की है. इसके तहत संगठन के लिए एक राजनीतिक सलाहकार का पद तैयार कर एक बड़े नक्सली की पोस्टिंग भी की गयी है. पुलिस या खुफिया विभाग को अभी तक सलाहकार के नाम का पता नहीं चल सका है.
राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किये गये जाने की जानकारी पलामू पुलिस को हाल में नक्सलियों के पास से बरामद गोपनीय दस्तावेज से मिले हैं. पुलिस को दस्तावेज से यह भी जानकारी मिली है कि नक्सलियों ने बिहार, झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी (बीजेसैक) का विस्तार कर इसका नाम बीजेयूसैक कर लिया था. बीजेयूसैक का मतलब बिहार, झारखंड, उतर प्रदेश स्पेशल एरिया कमेटी से है. अर्थात बिहार- झारखंड की कमेटी का क्षेत्र विस्तार उतर प्रदेश तक किया गया है.
स्पेशल ब्रांच कर चुका है अलर्ट : उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ माह में नक्सली संगठन को मजबूत बनाने के लिए कई नये प्रयोग कर चुके हैं.
संगठन को मजबूत बनाने के लिए झारखंड में बाहर के कुछ नये नक्सलियों को बुलाकर उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण पद प्रदान किये गये. इसके अलावा संगठन में झारखंड कैडर के कुछ नक्सलियों को प्रोन्नति भी दी गयी. हाल में नक्सलियों की गतिविधियों को लेकर कई बार स्पेशल ब्रांच की ओर से अलर्ट किया जा चुका है. विधानसभा चुनाव के दौरान झारखंड में विभिन्न जिलों में नक्सलियों की काफी सक्रियता भी रही थी. स्पेशल ब्रांच ने 19 जिलों में नक्सलियों की सक्रियता को लेकर एक रिपोर्ट भी तैयार की थी.
प्रशांत बोस की जगह रंजीत बोस को कमान देने की चर्चा
रांची : भाकपा माओवादी अब नये सिरे से झारखंड, बिहार, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल में अपनी जड़ें मजबूत करने में जुट गया है. इस कड़ी में संगठन ने चाराें राज्यों के इस्टर्न रीजनल ब्यूरो के सचिव प्रशांत बोस को अब रिटायर्ड कर दिया है. चर्चा है कि ढलती उम्र व बीमारी को देखते हुए ऐसा किया गया है़ यह भी कहा यह भी जा रहा है कि प्रशांत बोस की कुर्सी अब सीसीएम मेंबर रंजीत बोस उर्फ कंचन दा को दे दी गयी है.
इसे चारों राज्यों में माओवादियों के संगठन को मजबूत करने की जवाबदेही दी गयी है. हालांकि झारखंड पुलिस अभी इस पर कुछ नहीं बोल रही है. न ही माओवादी संगठन की ओर से कोई अाधिकारिक बयान जारी किया गया है. रंजीत पश्चिम बंगाल के 24 परगना का निवासी है. उस पर पश्चिम बंगाल में 25 लाख का इनाम है. लेकिन झारखंड में इस पर कोई इनाम नहीं है. संगठन में रंजीत बोस कई उपनामाें से जाना जाता है. मसलन कंचन दा, प्रसाद, कंचना व सुमन.
लालगढ़ पर कब्जा जमाने के बाद चर्चा में आया था रंजीत : गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के लालगढ पर कब्जा जमाने के बाद रंजीत बोस चर्चा में आया था. माओवादियों की ओर से लालगढ़ की जवाबदेही उसे ही दी गयी थी. संगठन के वरीय लाेगों का मानना है कि रंजीत बोस की संगठन पर अच्छी पकड़ है. फिलवक्त वही संगठन का बही-खाता संभाल रहा था. झारखंड विधानसभा चुनाव के पूर्व सीमावर्ती क्षेत्र में उसने माओवादियों के साथ गुप्त मीटिंग की थी. जब तक पुलिस को इसकी जानकारी हुई वह बंगाल लौट चुका था.
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