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रांची : 139 बंदी रिहा, कई घर का पता भूले तो कई अपनों को पहचान नहीं सके

Updated at : 24 Jan 2020 8:41 AM (IST)
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रांची : 139 बंदी रिहा, कई घर का पता भूले तो कई अपनों को पहचान नहीं सके

रांची : राज्य सजा पुनरीक्षण समिति की अनुशंसा से राज्य भर की जेलों में उम्रकैद की सजा काट रहे 139 बंदियों को गुरुवार को रिहा किया गया़ इसी के तहत होटवार जेल में बंद 62 बंदियों को भी छोड़ने की अनुशंसा की गयी थी़ इनमें से 58 बंदियों को रिहा किया गया़ एक बंदी को […]

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रांची : राज्य सजा पुनरीक्षण समिति की अनुशंसा से राज्य भर की जेलों में उम्रकैद की सजा काट रहे 139 बंदियों को गुरुवार को रिहा किया गया़ इसी के तहत होटवार जेल में बंद 62 बंदियों को भी छोड़ने की अनुशंसा की गयी थी़
इनमें से 58 बंदियों को रिहा किया गया़ एक बंदी को पहले ही रिहा किया जा चुका था, जबकि तीन को जुर्माना जमा नहीं करने के कारण नहीं छोड़ा जा सका़ सभी बंदी 20 साल की सजा काट चुके है़ं
जो रिहा हुए हैं उनमें रांची के 20, गुमला के 17, चाईबासा, सिमडेगा, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम व सीवान के दो-दो बंदी है़ं जेल अधीक्षक अशोक कुमार चौधरी व जेलर सीएस सुमन ने सभी बंदियों को शुभकामनाएं देते हुए समाज में अच्छा कार्य करने की हिदायत दी़ गौरतलब है इससे पहले वर्ष दो अक्तूबर 2018 को 121 बंदियों को रिहा किया गया था़
कई बंदी अपने घर का पता भूले : रिहा होनेवाले कई बंदी 60 से 70 साल के भी थे़ उनमें से कई को अपने घर का पता तक याद नहीं था़ बंदी रजिस्टर में लिखे पते के आधार पर जेल अधीक्षक व जेलर ने उनके घरवालों से संपर्क करने का प्रयास किया़ कुछ बंदियों के परिजनों का पता चला तो उन्हें बुला कर बंदियों को सौंप दिया गया़ वहीं जिनके परिजन नहीं आये थे, उनके संबंधित थाना क्षेत्र से उनके संबंध में जानकारी लेकर घरवालाें को बुलाया गया़
परिजनों से मिलकर हुए भावुक : रांची के 20 बंदियों के परिजन उन्हें लेने के लिए पहुंचे थे़ उनमें से कई की पत्नी, कुछ के बेटे व पोता, पुत्री व अन्य संबंधी आये थे़ परिजनों से मिलकर अधिकतर बंदी भावुक हो गये़ कई तो अपने बच्चों से मिल कर काफी देर तक रोते रहे़
जेल प्रशासन ने उपलब्ध कराया वाहन
रांची, खूंटी, गुमला, चाईबासा, गढ़वा, लातेहार, सिमडेगा, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम व सीवान के रहनेवाले बंदियों को स्टेशन व बस स्टैंड जाने के लिए जेल प्रशासन की ओर से वाहन उपलब्ध कराये गये़ कुछ को खादगढ़ा, तो कुछ को आइटीआइ बस स्टैंड छोड़ा गया़
कई कामों में निपुण हो गये हैं बंदी : जेल में बंदियों को विभिन्न तरह के प्रशिक्षण दिये गये है़ं जिसमेें इलेक्ट्रिशियन, हथकरघा, साबून, मोमबत्ती, कंबल, ऑफसेट प्रिंटिंग सहित कई कामों का प्रशिक्षण दिया गया है़ अधिकतर बंदियों ने कहा कि वह समाज की मुख्यधारा से जुड़ कर लोगों को अपराध से दूर रहने की सलाह देने के साथ सीखे हुए कामों का प्रशिक्षण देंगे ताकि ग्रामीण इलाकों में बेराेजगार युवा स्वरोजगार कर सके़ं
जेल प्रशासन ने बंदियों के खाते में भेजे पैसे : जेल में बंदियों से कुछ न कुछ काम कराया जाता था, जिसके बदले उन्हें मजदूरी दी जाती थी़ 20 साल में बंदियों द्वारा कमाये गये पैसे जेल प्रशासन द्वारा खोले गये अकाउंट में भेज दिये गये है़ं ताकि बंदी जब चाहें पैसों को निकाल कर स्वरोजगार कर सकें
ये हैं रांची के रहनेवाले : जेल से रिहा होनेवाले छोटू वर्मा, लखन महतो, दुती मंुडा, लेटे उरांव, मदन मोहन सिंह गंझू उर्फ गहन गंझू, लाल मुंडा, महेंद्र सिंह उर्फ सूकर सिंह, पुरेंद्र कुम्हार, सीताराम भोक्ता, लालू मुंडा, शिबेश्वर मुंडा, मोहन गोप, फागू पाहन, फुलेंद्र महतो उर्फ टीका महतो, लालू महतो, तेजू कमार, मुकेश नायक , राजू खोया, देबू महतो और जिऊता मुंडा रांची के रहनेवाले हैं़
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