रांची : सिर्फ महिला हेल्पलाइन नंबर से क्राइम कंट्रोल नहीं होगा : कोर्ट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Dec 2019 8:34 AM (IST)
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मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में हुई सुनवाई रांची : हाइकोर्ट ने डोरंडा में मासूम के साथ हुए दुष्कर्म व हत्या मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सरकार के जवाब पर असंतोष प्रकट किया व नाराजगी जतायी. कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, कल्याण सचिव […]
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मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में हुई सुनवाई
रांची : हाइकोर्ट ने डोरंडा में मासूम के साथ हुए दुष्कर्म व हत्या मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सरकार के जवाब पर असंतोष प्रकट किया व नाराजगी जतायी. कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, कल्याण सचिव व सीआइडी आइजी को अगली सुनवाई के दौरान सशरीर उपस्थित रहने का निर्देश दिया.
अगली सुनवाई 17 जनवरी 2020 को होगी. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए माैखिक रूप से टिप्पणी की. खंडपीठ ने कहा कि निर्भया फंड की राशि राज्य को मिली, लेकिन उसे खर्च नहीं किया गया. योजना के पैसे कहां व कैसे खर्च करेंगे, विजन के साथ इस पर काम होना चाहिए. सिर्फ अलबर्ट एक्का चौक पर महिला हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित कर देने से क्राइम कंट्रोल नहीं होगा.
कोर्ट ने कहा कि महिला व चाइल्ड हेल्पलाइन का व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं हुआ. हेल्पलाइन नंबर को फंक्शनल बनाया जाये. हेल्पलाइन नंबर को लेकर गांव व पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये, ताकि उसे सभी जान सकें. खंडपीठ ने कहा कि शहर में क्राइम कर अपराधी बाहर भाग जाते हैं. दुष्कर्म की घटना होती है. अगले दिन गोली चलती है. शहर में सीसीटीवी कैमरे लगा देंगे, लेकिन अगर हाइवे पर क्राइम हो, तो उसे कैसे रोकेंगे. एनएच व स्टेट हाइवे पर क्राइम रोकने की क्या व्यवस्था है. सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाये गये हैं.
शहर में लगे कैमरे दो मेगा पिक्सल के हैं. उससे कैसे क्राइम कंट्रोल करेंगे. टाइगर मूवमेंट का पता लगाने के लिए वन विभाग ने जंगलों में शक्तिशाली कैमरा लगाया है. आप वैसा ही शक्तिशाली सीसीटीवी कैमरा पूरे राज्य में क्यों नहीं लगाते हैं. नेशनल हाइवे (एनएच) व स्टेट हाइवे पर सीसीटीवी कैमरे लगा कर वाहनों की स्पीड व क्राइम की मॉनिटरिंग की जाये. खंडपीठ ने हाइवे पेट्रोलिंग बढ़ाने व उसे मजबूत बनाने का भी निर्देश दिया. खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद वह अॉनलाइन होती है या नहीं. जैसे ही प्राथमिकी दर्ज हो, वह अॉनलाइन हो जाना चाहिए. टेक्नोलॉजी का उपयोग नहीं करेंगे, तो आप हमेशा पीछे रहेंगे.
खंडपीठ ने मुंशी प्रेमचंद लिखित नमक का दारोगा कहानी का उदाहरण भी दिया. पुलिस की कार्यशैली पर कहा कि जिन मामलों में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं होती है, उसमें गिरफ्तारी हो जाती है, लेकिन जिन मामलों में गिरफ्तारी आवश्यक रहती है, उसमें पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाती है. यह स्थिति ठीक नहीं है. खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान उपस्थित सीआइडी के आइजी से पूछा कि आपका महिला हेल्पलाइन नंबर काम नहीं करता है. टेलीफोन नंबर काफी लंबा है, वह किसी को याद नहीं रहेगा. कितने एनएच व स्टेट हाइवे हैं.
सीसीटीवी कैमरे जो लगाये गये हैं, वह शक्तिशाली नहीं हैं. इस पर आइजी ने खंडपीठ को बताया कि पूरे राज्य में 162 पीसीआर काम कर रहे हैं. रात-दिन पेट्रोलिंग की जाती है. पीसीआर वाहन में नाइट विजन डिवाइस नहीं लगा हुआ है. रांची में सीसीटीवी कैमरे लगाये गये. सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे काम करते हैं. छह जिलों में चाइल्ड हेल्पलाइन काम करती है. महाधिवक्ता अजीत कुमार ने सरकार का पक्ष रखा. वहीं प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने पक्ष रखा.
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