रांची : हरमू नदी के ओपेन स्पेस पर बन रहा अपार्टमेंट

Updated at : 30 Nov 2019 7:56 AM (IST)
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रांची : हरमू नदी के ओपेन स्पेस पर बन रहा अपार्टमेंट

ग्रीन एरिया में नदी के गार्डवाल पर खड़ी कर दी गयीं इमारत की दीवारें रांची : बिल्डर के रसूख के आगे सरकारी दावे, नियम और अधिनियम दम तोड़ देते हैं. इसका ताजा उदाहरण आवास बोर्ड और हरमू नदी के ओपेन स्पेस में बन रही बहुमंजिली इमारत है. इमारत का निर्माण कंस्ट्रक्शन कंपनी ड्रीम मार्केटिंग की […]

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ग्रीन एरिया में नदी के गार्डवाल पर खड़ी कर दी गयीं इमारत की दीवारें
रांची : बिल्डर के रसूख के आगे सरकारी दावे, नियम और अधिनियम दम तोड़ देते हैं. इसका ताजा उदाहरण आवास बोर्ड और हरमू नदी के ओपेन स्पेस में बन रही बहुमंजिली इमारत है. इमारत का निर्माण कंस्ट्रक्शन कंपनी ड्रीम मार्केटिंग की ओर से कराया जा रहा है. भवन का निर्माण हरमू नदी के कैचमेंट एरिया में नदी के बहाव से महज 10 मीटर की दूरी पर किया जा रहा है.
लोगों ने इसकी शिकायत जब निगम व अरगोड़ा थाने में की, तो कुछ दिनों के लिए काम पर रोक लग गया. अब फिर से इसका निर्माण शुरू हो गया है. जबकि, झारखंड हाइकोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी नदी, नाले, झरने, पहाड़ से सटा 50 मीटर का क्षेत्र ओपेन स्पेस माना जायेगा और इस पर किसी तरह के निर्माण की इजाजत जमीन मालिक को भी नहीं होगी.
खरीदारों के साथ खिलवाड़ : बिल्डर द्वारा स्वीकृत ले-आउट के विपरीत निर्माण किया जा रहा है. बिल्डर ने 12 डिसमिल जमीन पर 2016 में एग्रीमेंट के बाद जी प्लस फोर का नक्शा पास कराया. इसके बाद एक अतिरिक्त पार्किंग का निर्माण करा लिया. भवन में चार फ्लोर के साथ ही दो-दो पार्किंग बनायी गयी है. वास्तविक जमीन मालिक को भी इसकी जानकारी नहीं है. मिट्टी के बहाव को रोकने के लिए जो गार्डवाल बनाये गए थे, उस पर भी बिल्डर ने अवैध निर्माण कर लिया है.
गार्डवाल के ऊपर ही अपार्टमेंट की दीवारें खड़ी कर दी गयी हैं. वहीं, नियमों को ताक पर रखकर प्रवेश के लिए मुख्य रास्ता भी हरमू हाउसिंग कॉलोनी की ओर खोला गया है. इसके लिए हाउसिंग बोर्ड से सटे कई साल पुराने दरख्तों को भी काट डाला गया.
आवास बोर्ड की जमीन पर बिल्डर द्वारा खोल दिया गया रास्ता, संकरी होती जा रही है हरमू नदी
हरमू नदी पर संकट
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नदियों की राह में लगातार किये जा रहे निर्माण पर सरकार और प्रशासन खामोश है. निर्माण पूरी तरह अवैध होने के बावजूद उनको हटाने या रोकने की कोई कोशिश नहीं की जाती है. नदी किनारे अवैध निर्माण से नदी का क्षेत्र सिकुड़ रहा है. जिस नदी का फैलाव कभी 50 मीटर तक था, आज वह घटकर पांच मीटर भी नहीं रह गया है. नदी और इसके ग्रीन बेल्ट को मिला कर करीब छह हजार वर्गफीट क्षेत्रफल को समतल किया जा चुका है. इस हिस्से में नदी काफी संकरी हो गयी है.
बिल्डर ने धोखे में रख कर निर्माण कराया. नक्शा को लेकर हमारे बीच मतभेद है. बिल्डर ने एग्रीमेंट के मुताबिक एक भी वादा पूरा नहीं किया. हम बुरी तरह से फंस चुके हैं. बिल्डर ने हाल ही में जो 15 लाख रुपये का चेक दिया, वह भी बाउंस कर गया.
धनेश प्रसाद, वास्तविक जमीन मालिक
हमने बिल्डिंग बायलॉज के सहारे ही अपार्टमेंट का निर्माण कराया है़ इसमें सभी नियमों का ध्यान रखा गया है. नदी से जितनी दूरी पर भवन होना चाहिए, उससे कहीं ज्यादा स्पेस छोड़ कर ही निर्माण की बुनियाद रखी गयी है.
धीरज गुप्ता, बिल्डर
ग्रीन बेल्ट या ओपेन स्पेस का प्रावधान है या नहीं, यह जानने के लिए कॉलोनी के ले-आउट प्लान को जांचा जायेगा. हमें मामले की मौखिक जानकारी दी गयी है. बोर्ड की ओर से भौतिक सत्यापन कर कमेटी बनाकर जांच करने के निर्देश दिये जायेंगे.
निरंजन कुमार, सचिव, झारखंड राज्य आवास बोर्ड
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