रांची : सीआइपी में कार्यशाला व पेंटिंग प्रतियोगिता

Updated at : 11 Oct 2019 6:02 AM (IST)
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रांची : सीआइपी में कार्यशाला व पेंटिंग प्रतियोगिता

रांची : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर शुक्रवार से केंद्रीय मन: चिकित्सा संस्थान (सीआइपी) में भी कई कार्यक्रम शुरू हुए. इस वर्ष का थीम आत्महत्या की रोकथाम रखा गया है. संस्थान के अोपीडी परिसर में मरीज और उनके अभिभावकों के लिए कार्यशाला आयोजित की गयी. मौके पर प्रो सीआरजे खेस ने इस विषय की प्रासंगिकता […]

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रांची : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर शुक्रवार से केंद्रीय मन: चिकित्सा संस्थान (सीआइपी) में भी कई कार्यक्रम शुरू हुए. इस वर्ष का थीम आत्महत्या की रोकथाम रखा गया है. संस्थान के अोपीडी परिसर में मरीज और उनके अभिभावकों के लिए कार्यशाला आयोजित की गयी. मौके पर प्रो सीआरजे खेस ने इस विषय की प्रासंगिकता व मानसिक रोग की जागरूकता के बारे में बताया.
कार्यक्रम में डॉ सुजीत प्रसाद, डॉ प्रीति गुप्ता व डॉ दीपांजन भट्टाचार्या ने आत्महत्या के कारण, पहचान और रोकथाम के तरीकों की जानकारी दी. उन्होंने आत्महत्या से संबंधित भ्रांतियों पर भी चर्चा की. चिकित्सकों ने बताया कि अात्महत्या करनेवाला व्यक्ति अक्सर कुछ संकेत देता है, जिसकी पहचान समय से कर लेने पर आत्महत्या रोकी जा सकती है. निदेशक डॉ डी राम ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की प्रासंगिकता और इस वर्ष के विषय के उद्देश्य पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में डॉ संजय मुंडा, डॉ सुनील व डॉ आलोक आदि उपस्थित थे.
14 अक्तूबर तक चलनेवाले कार्यक्रम में पहले दिन सुबह में डॉ निशांत, डॉ मधुमिता, डॉ मीतू व उनकी टीम की देखरेख में संस्थान के किशोर मरीजों के बीच पेंटिंग्स प्रतियोगिता आयोजित की गयी. इसके बाद आत्महत्या की रोकथाम पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसके अलावा लघु नाट्य का मंचन व पैनल डिस्कशन आदि का आयोजन किया गया. इसके संयोजक सुमिता मसीह, डॉ सरस, डॉ वी प्रशांत व उनकी टीम के सदस्य थे. मौके पर डॉ मधुमिता भट्टाचार्या, डॉ सुदीप सिन्हा व डॉ निशांत गोयल आदि उपस्थित थे.
अवसाद में कभी अकेला नहीं छोड़ें : डॉ केशव
रांची : विश्व मेंटल हेल्थ डे पर डॉ केशव द्वारा फ्री माइंड चेकअप कैंप का आयोजन मेडिकल चौक स्थित माइंड एंड ब्रेन क्लीनिक में किया गया. मौके पर 30 से 35 लोगों की जांच की गयी और जरूरी सलाह के साथ दवा भी बांटी गयी. इस दौरान डॉ केशव ने बताया कि आत्महत्या की सोच गहरे अवसाद की चरम स्थिति है. अवसाद के पीछे कोई बड़ी असफलता या अनिवार्य सी दिखती कोई समस्या होती है, जो किसी को आत्महत्या की सीमा तक निराश कर देती है.
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