Jharkhand : सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद गढ़वा में आयी बाढ़, मवेशी चराने गया एक व्यक्ति बहा, फसलें बर्बाद

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची : मॉनसून की वापसी से ठीक पहले और केंद्र द्वारा सूखाग्रस्त जिला घोषित किये जाने के तीसरे दिन हुई बारिश से झारखंड के गढ़वा जिला में बाढ़ आ गयी. दो दिन से झारखंड में लगातार बारिश और गंगा के बढ़ते जलस्तर की वजह से साहिबगंज जिला के निचले इलाकों में भी पानी घुस गया है, जिससे लोग परेशान हैं. मौसम विभाग का अनुमान है कि बारिश रविवार को भी जारी रहेगी. कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा होगी, तो कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. इससे दुर्गा पूजा के आयोजक और मेला में दुकानें लगाने वाले परेशान हैं.

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मौसम विभाग ने अागामी दो सप्ताह का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि 29 सितंबर को प्रदेश के अधिकांश जगहों पर बारिश होगी. इसके बाद 3 अक्टूबर तक कहीं-कहीं बारिश होगी. विभाग ने कहा है कि एक सप्ताह के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है. वहीं, इसके बाद के सप्ताह यानी 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर के बीच सामान्य से कम बारिश होने के संकेत हैं.

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बहरहाल, सूखाग्रस्त घोषित गढ़वा जिला में 27 अक्टूबर को इस साल मॉनसून के दौरान सबसे ज्यादा बारिश हुई. इससे कई नदियों में उफान आ गया और कई गांवों में लोगों के घरों में पानी भर गया. जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुई है. प्रखंड के हुलहुला खुर्द पंचायत के नरखोरिया खुर्द ग्राम के कई घरों में वर्षा का पानी घुस गया है.

सड़क और पुलिया को हुआ नुकसान

बाढ़ के पानी से पतिला-कांडी मुख्य सड़क कई जगहों पर ध्वस्त हो गयी. कर्मा गांव के पास बेलमा नाला की पुलिया बाढ़ के पानी से ध्वस्त हो गयी. रतनगढ़-कांडी जाने वाली सड़क कई जगहों पर टूट जाने की वजह से आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया.

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केतार में पंडा नदी में अचानक बाढ़ आने की वजह से अजनिया गांव निवासी कमलेश सिंह (20) गाय चराने के क्रम में बाढ़ में बह गया. वह अब तक लापता है. ग्रामीण उसकी खोजबीन में जुट गये हैं. प्रशासन की भी मदद ली जा रही है.

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केतार में पंडा नदी का जलस्तर बढ़ने से खेतों में पानी भर गया, जिससे खड़ी फसल बर्बाद हो गयी. इतना ही नहीं, बारिश की वजह से कई लोगों के घर के गिरने की भी सूचना है. वहीं, पंडा नदी का पानी चनवापर स्थित प्राथमिक विद्यालय में घुस गया है, जिससे पठन-पाठन ठप है.

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मां भगवती के मंदिर में 8 फुट तक पानी भरा

कांडी प्रखंड के अलग-अलग हिस्सों में मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. शनिवार को कांडी प्रखंड के पहाड़ी पंडी नदी में आयी बाढ़ से सतबहिनी झरना स्थित मां भगवती के मंदिर में 8 फुट तक पानी भर गया है. मंदिर तक आने-जाने के लिए बनाया गया पुल भी डूब गया है. फलस्वरूप शनिवार को भगवती मंदिर सहित सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं हुई.

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मंदिर के पुजारी सुनील दुबे व कपिलदेव नारायण पांडेय ने बताया कि रात डेढ़ बजे के आस-पास नदी में बाढ़ आ गयी. लगातार बारिश की वजह से प्रखंड के कई गांवों में पानी भर गया. कई कच्चे घर ध्वस्त हो गये. अधौरा गांव निवासी सरजुन अंसारी, नीरज कुमार सिन्हा का भी घर ध्वस्त हो गया.

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मकान गिरा, मलबे में दबे चार लोग

सरजुन अंसारी के घर में सोये हुए चार लोग घर के मलबे में दब गये. हालांकि, ये सभी लोग बाल-बाल बच गये. अधौरा गांव के कामेश्वर ठाकुर, मुनेश्वर ठाकुर, अखिलेश राम, महेंद्र चौधरी के घरों में दो फुट पानी भर गया. इससे घर में रखे सभी सामान नष्ट हो गये.

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गांव बहेरवा, कर्मा, भिलमा, शिवरी, पखनाहा, नाउ भिलमा, चंद्रपुरा समेत कई गांव के किसानों की सैकड़ों एकड़ में लगी खरीफ फसल बर्बाद हो गयी. बहेरवा गांव में भी कई घरों में पानी भर गया. शिवरी निवासी तौकीर अंसारी के मकान में बाढ़ के पानी घुसने से घर में रखे सभी खाद्य पदार्थ व उपयोग में आने वाली कई वस्तुएं बर्बाद हो गयीं.

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साहिबगंज में गंगा उफान पर

साहिबगंज जिला में गंगा उफान पर है. गंगा के पास के इलाकों व शहर के निचले इलाकों के साथ-साथ दियारा क्षेत्र में गंगा का पानी 4 से 5 फुट तक भर गया है. निरंतर गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है. जिला प्रशासन जिले के चार अंचल में 30 राहत शिविर बनाये हैं. शुक्रवार को राजमहल के विधायक अनंत ओझा, सदर एसडीओ पंकज साव सहित अन्य ने सदर प्रखंड क्षेत्र के हरप्रसाद दुर्गा स्थान टोला में बाढ़ प्रभावित लोगो के बीच राहत सामग्री (चूड़ा, चीनी, तिरपाल, मोमबत्ती, माचिस) का वितरण किया.

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वहीं, जिले के दो दर्जन से ज्यादा पंचायत व शहर के कई वार्ड के हजारों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. सबसे ज्यादा परेशानी मवेशियों को हो रही है. उन्हें राहत शिविर लाने में दिक्कत हो रही है. चारा का अभाव है. कई लोगों ने छतों पर शरण ले रखी है. जिला प्रशासन ने साहिबगंज अंचल में 12, तालझारी अंचल में 04, राजमहल अंचल में 14 राहत शिविर स्थापित किये हैं.

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बाढ़ से प्रभावित पंचायत

रामपुर दियारा, लालबथानी, उत्तरी मखमलपुर, दक्षिणी मखमलपुर, किशन प्रसाद, रामपुर, कारगिल दियारा, श्रीधर दियारा, पूर्वी और पश्चिमी नारायणपुर, शोभनपुर समेत कई पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं. इन पंचायतों के दो दर्जन से ज्यादा गांवों के हजारों लोग बाढ़ के पानी में घिरे हैं.

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केंद्र ने झारखंड के 10 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है

उल्लेखनीय है कि 25 सितंबर को केंद्र सरकार ने बोकारो समेत झारखंड के 10 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया था. एक अगस्त से 4 सितंबर के बीच जिलों में बारिश का आकलन करने के बाद केंद्र ने बोकारो, चतरा, देवघर, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, हजारीबाग, जामताड़ा, कोडरमा और पाकुड़ को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया. इसका लाभ 12 लाख किसानों को मिलेगा. इधर, सरकार की कोशिश है कि रांची, दुमका और लातेहार को भी केंद्र सरकार सूखाग्रस्त घोषित करे.

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क्या कहते हैं मौसम विभाग के आंकड़े

झारखंड में एक जून से 27 सितंबर के बीच सामान्य से 27 फीसदी कम बारिश हुई. इस दौरान कुल 1039.1 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि 755.5 मिमी ही वर्षा हुई. इस दौरान 6 जिलों को छोड़कर सभी जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई. वहीं, इस सप्ताह 21 से 23 सितंबर तक मॉनसून कमजोर रहा जबकि 24 से 27 सतिंबर तक पूरे झारखंड में सक्रिय रहा. इस दौरान कुछ जगहों पर भारी बारिश हुई, तो बाकी जगहों पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हुई. फलस्वरूप प्रदेश में बारिश की कमी 30 फीसदी से घटकर 27 फीसदी रह गयी.

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मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह 66.8 मिमी बारिश हुई, जो इस दौरान होने वाली 52.9 मिमी बारिश से 26 फीसदी अधिक है. इस सप्ताह झारखंड के 24 में से 5 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई. शेष 19 जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा हुई.

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