पंजीयन नहीं होने से रोड पर पकड़ी जा रही डेंटल वैन, चलाना हुआ मुश्किल
Updated at : 14 Aug 2019 8:18 AM (IST)
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रांची : रिम्स के मोबाइल डेंटल वैन की खरीदारी हुए दो साल से ज्यादा समय हो गया, लेकिन वाहन का पंजीयन जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) में नहीं कराया जा सका है. इस कारण जब भी वाहन को मरीजाें के लिए आयोजित कैंप में निकाला जाता है, तो ट्रैफिक पुलिस पकड़ लेती है. वाहन चालक द्वारा […]
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रांची : रिम्स के मोबाइल डेंटल वैन की खरीदारी हुए दो साल से ज्यादा समय हो गया, लेकिन वाहन का पंजीयन जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) में नहीं कराया जा सका है. इस कारण जब भी वाहन को मरीजाें के लिए आयोजित कैंप में निकाला जाता है, तो ट्रैफिक पुलिस पकड़ लेती है.
वाहन चालक द्वारा रिम्स का वाहन बताने के बाद उसे छोड़ा जाता है. इससे वाहन को जिस कार्य के लिए खरीदा गया था, वह पूरा नहीं हो पा रहा है. चोरी-छिपे वाहन को कैंप के लिए बाहर भेजा जाता है. वाहन उपलब्ध करानेवाली एजेंसी जब डीटीओ ऑफिस में वाहन का पंजीयन कराने गयी, तो उसका खर्च 79,458 रुपये बताया गया.
वहीं रिम्स प्रबंधन का कहना है कि ज्यादा समय होने के कारण रजिस्ट्रेशन का खर्च बढ़ गया है. वाहन मुहैया करानेवाली एजेंसी पर रिम्स का आरोप है कि उसने गाड़ी खरीद कर दे दी, लेकिन उसका पंजीयन नहीं कराया. वहीं एजेंसी का कहना है कि रिम्स प्रबंधन को पंजीयन कराने की जिम्मेदारी है.
गौरतलब है कि रिम्स के डेंटल वैन की खरीदारी मेें बड़ा घोटाला हुआ है, जिसकी जांच महालेखाकार की टीम कर रही है. जानकार बताते है कि वैन का चेचिस 8.94 लाख में खरीदा गया. उसके बाद डेेेंटल चेयर स्थापित किया गया, जिसका अधिकतम खर्च नौ से 10 लाख का आया होगा. मोबाइल डेेेंटल वैन को तैयार होने मेेें मुश्किल से 35 से 40 लाख पड़ा होगा, लेकिन इसको 1.40 करोड़ से ज्यादा में खरीदा गया.
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