मोबाइल से अपने तालाब के पानी पर नजर रखेंगे मछली पालक
Updated at : 13 Aug 2019 7:58 AM (IST)
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राणा प्रताप, रांची : राज्य में तालाबों की 24 घंटे अॉनलाइन मॉनिटरिंग की जायेगी. इसके लिए इंटरनेट अॉफ थिंग्स (आइअोटी) नामक डिजिटल सेंसर टेक्नोलॉजी की मदद ली जा रही है. इससे तालाबों के पानी की गुणवक्ता पर नजर रखी जायेगी. चालू वित्तीय वर्ष में इस नयी योजना को मत्स्य तालाबों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप […]
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राणा प्रताप, रांची : राज्य में तालाबों की 24 घंटे अॉनलाइन मॉनिटरिंग की जायेगी. इसके लिए इंटरनेट अॉफ थिंग्स (आइअोटी) नामक डिजिटल सेंसर टेक्नोलॉजी की मदद ली जा रही है. इससे तालाबों के पानी की गुणवक्ता पर नजर रखी जायेगी. चालू वित्तीय वर्ष में इस नयी योजना को मत्स्य तालाबों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है.
योजना के शुरुआती चरण में राज्य के 52 तालाबों में 52 यूनिट लगायी जायेंगी. रांची के डोरंडा स्थित एक तालाब में इस सेंसर का एक यूनिट लगाया जा चुका है. जानकारी के अनुसार प्रत्येक यूनिट पर 65 हजार रुपये खर्च होंगे.
इस लिहाज से पूरी योजना के लिए 50 लाख रुपये की स्वीकृति दी गयी है. नयी टेक्नोलॉजी से किसान देश के किसी भी हिस्से अपने स्मार्ट फोन के जरिये अपने तालाबों की निगरानी और प्रबंधन कर सकेंगे. सफलता मिलने पर राज्य के सभी तालाबों के लिए यह व्यवस्था लागू की जायेगी.
यह है योजना
जिला मत्स्य पदाधिकारी अरूप चाैधरी ने बताया कि इस योजना के तहत तालाबों में डिजिटल सेंसर लगाया जाता है. सेंसर के उपकरणों का संचालन साैर ऊर्जा से होता है. इसके लिए उपकरण के ऊपरी हिस्से में (जो पानी से बाहर रहता है) सोलर प्लेट लगाया जाता है.
सभी उपकरण मोबाइल एेप बेस्ड और मोबाइल कनेक्टिविटी पर आधारित होंगे. मत्स्यपालकों के स्मार्ट फोन पर तालाब के पानी में घुलनशील अॉक्सीजन, पीएच, तापमान, क्षारीयता आदि का अलर्ट प्रत्येक 15-15 मिट पर मिलता रहेगा. इसके आधार पर मत्स्यपालक तालाब का बेहतर प्रबंधन कर अधिक मछलीपालन सुनिश्चित करेंगे.
पायलट प्रोजेक्ट के तहत अभी 52 तालाबों में लगाये जा रहे उपकरण, सफल रहा, तो पूरे राज्य के तालाबों में लगेगा
आंध्र प्रदेश के मत्स्य किसान कर रहे इस नयी टेक्नोलॉजी का उपयोग, जिससे हो रहा है अधिक मछली का उत्पादन
इसलिए पड़ी इस नयी तकनीक की जरूरत
मछलीपालन के लिए तालाबों के पानी का बेहतर प्रबंधन जरूरी होता है. इसके लिए लेबोरेटरी में तालाब के पानी की नियमित जांच करायी जाती है, जिससे उसकी गुणवत्ता का पता चलता है.
लेकिन यह काफी लंबी प्रक्रिया है. नयी डिजिटल सेंसर (इंटरनेट अॉफ थिंग्स) टेक्नोलॉजी से पानी गुणवत्ता का पता लगाना बहुत आसान हो जायेगा. इस नयी टेक्नोलॉजी का उपयोग आंध्र प्रदेश के मत्स्य किसान भी कर रहे हैं, जिससे अधिक मछली उत्पादन हो रहा है.
तकनीक के उपयोग से किसान तालाब के पानी का प्रबंधन कर सकेंगे. इससे मछलीपालन को बढ़ावा मिलेगा. साथ में नतीजे अच्छे आयेंगे. प्रयोग सफल होने पर सभी मत्स्य तालाबों में योजना लागू करायी जायेगी.
एचएन द्विवेदी, निदेशक मत्स्य, झारखंड
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