आदेश को हल्के में न लें, ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगायें : हाइकोर्ट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Aug 2019 2:15 AM (IST)
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रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने शुक्रवार को ध्वनि प्रदूषण को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए अधिसूचना जारी नहीं होने पर नाराजगी जतायी. कहा कि पिछले सात माह से मामले की मॉनिटरिंग की जा रही है़ इसके बावजूद […]
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रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने शुक्रवार को ध्वनि प्रदूषण को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए अधिसूचना जारी नहीं होने पर नाराजगी जतायी. कहा कि पिछले सात माह से मामले की मॉनिटरिंग की जा रही है़ इसके बावजूद निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है. अदालत ने यह भी कहा कि कोर्ट के आदेश को हल्के में न लें. आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त आदेश पारित किया जायेगा.
अदालत ने ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए शीघ्र अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई अब 13 सितंबर को होगी़ सुनवाई के दाैरान एसएसपी, एसडीओ व झारखंड स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव उपस्थित थे. इससे पूर्व सरकार की अोर से बताया गया कि आदेश के आलोक में ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कार्रवाई की गयी है.
हाइकोर्ट गंभीर, कहा : आदेशों के अनुपालन के लिए सरकार त्वरित कार्रवाई करे
रांची : हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने शुक्रवार को अवमानना मामलों की सुनवाई करते हुए अधिकारियों द्वारा आदेशों का अनुपालन नहीं करने पर नाराजगी जतायी. अदालत ने मुख्य सचिव को कोर्ट के आदेशों का त्वरित अनुपालन कराने का निर्देश दिया. अदालत ने माैखिक रूप से कहा कि अदालत के आदेशों का समय पर अनुपालन नहीं होना गंभीर स्थिति है.
अदालत ने हाइकोर्ट में नोडल अफसरों की नियुक्ति के लिए एक नोट तैयार करने को कहा. कहा कि वैसे नोडल अफसर नियुक्त हो, जिन्हें कानून की जानकारी हो. सुनवाई के दाैरान अदालत में उपस्थित मुख्य सचिव डीके तिवारी व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने आश्वस्त किया कि कोर्ट के आदेशों का समय पर अनुपालन के लिए व्यवस्था कायम की जायेगी.
उसे लागू किया जायेगा.मुख्य सचिव ने कहा कि वह सभी विभागों के सचिवों के साथ बैठक कर आदेशों के निष्पादन को रिकॉर्ड करने के लिए जवाबदेही तय करेंगे. सुनवाई के दाैरान स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव, प्राथमिक शिक्षा निदेशक भी माैजूद थे. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी नवीन कुमार कर्ण व अन्य की अोर से अलग-अलग अवमानना याचिका दायर की गयी है.
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