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रांची : बिना पाठ्यक्रम पूरा हुए परीक्षा दे रहे विद्यार्थी

Updated at : 26 Jul 2019 7:53 AM (IST)
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रांची : बिना पाठ्यक्रम पूरा हुए परीक्षा दे रहे विद्यार्थी

रांची : झारखंड में उच्च शिक्षा का खस्ताहाल है. बिना पूरी तैयारी के विश्वविद्यालय में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू कर दिया गया. पहले एक वर्ष में स्नातक व पीजी मिलाकर पांच परीक्षा होती थी. अब उसकी संख्या बढ़ कर 10 हो गयी है. इसके अलावा काॅलेज स्तर पर मिड समेस्टर की परीक्षा अलग […]

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रांची : झारखंड में उच्च शिक्षा का खस्ताहाल है. बिना पूरी तैयारी के विश्वविद्यालय में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू कर दिया गया. पहले एक वर्ष में स्नातक व पीजी मिलाकर पांच परीक्षा होती थी.
अब उसकी संख्या बढ़ कर 10 हो गयी है. इसके अलावा काॅलेज स्तर पर मिड समेस्टर की परीक्षा अलग से होती है. इन सभी परीक्षाओं का वीक्षण से लेकर मूल्यांकन का कार्य शिक्षकों को करना होता है. इससे शिक्षकों को मापदंड के अनुरूप कक्षा लेने का समय नहीं मिल पाता है. परीक्षा व मूल्यांकन के बीच छह माह में 90 कक्षा पूरी नहीं हो पाती है. इस कारण बिना पाठ्यक्रम पूरा हुए विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होना पड़ता है.
पहले के पाठ्यक्रम में आज की तुलना में पठन-पाठन बेहतर होता था. विवि को भी परीक्षा लेने व रिजल्ट जारी करने में सुविधा होती थी. सीबीसीएस व्यवस्था ने उच्च शिक्षा को काफी नुकसान पहुंचाया है. सीबीसीएस ने डिग्री के कोर्स को जहां कठिन बना दिया है, वहीं मास्टर डिग्री को पहले की तुलना में अधिक आसान बना दिया है.
इस पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है. राज्य के विवि में परीक्षा विभाग को भी दुरुस्त करने की आवश्यकता है. विषय के जानकार शिक्षक व वरीय शिक्षक को ही प्रश्न पत्र सेट करने की जिम्मेदारी मिलनी चाहिए. कई बार देखा जाता है कि पांच अंक के लघु उत्तरीय प्रश्न को 14 मार्क्स का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न बना कर पूछ दिया जाता है. यह विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. विवि में मोडरेसन बोर्ड को फिर से सक्रिय किया जाये. विवि में मूल्यांकन की कॉपी का कोडिंग किया जाये.
इससे परीक्षा व मूल्यांकन में होने वाली गड़बड़ी पर एक हद तक रोक लग सकेगी. परीक्षा में गृह केंद्र किसी हाल में नहीं बनाना चाहिए. इससे अंंतत: नुकसान विद्यार्थियों को ही होता है. विवि में वित्तरहित शिक्षा नीति व अनुबंध पर नियुक्ति को समाप्त किया जाये. विश्वविद्यालय में शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति हो. शिक्षकों की कमी से भी पठन-पाठन पर प्रतिकूल असर पर रहा है. विवि में शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नियुक्ति की जाये.
विद्यार्थियों के लिए 75% उपस्थिति अनिवार्य होने की बात केवल कागजी निर्देश बन कर रह गया है. अधिकतर कॉलेजों में इसका पालन नहीं हो रहा है. आज कॉलेजों में बिना संसाधन व शिक्षक के मास्टर डिग्री की पढ़ाई शुरू की जा रही है. इससे बच्चों का भला नहीं होने वाला है.
डॉ आरपी गोप, सीनेट सदस्य, रांची विवि
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