सिगरेट से ज्यादा खतरनाक है मच्छर भगानेवाला क्वॉयल
Author Prabhat khabar digital desk
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पुणे स्थित चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के शोध में साबित हो चुका है यह तथ्य मच्छर भगानेवाले एक क्वायल का धुआं 100 सिगरेट के बराबर नुकसानदेह घरों में जलाया जानेवाला धूप और अगरबत्ती भी इनसानों के लिए खतरनाक धूम्रपान फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है. इससे फेफड़ों का कैंसर होने की आशंका रहती है. लेकिन, क्या आपको […]
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पुणे स्थित चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के शोध में साबित हो चुका है यह तथ्य
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मच्छर भगानेवाले एक क्वायल का धुआं 100 सिगरेट के बराबर नुकसानदेह
घरों में जलाया जानेवाला धूप और अगरबत्ती भी इनसानों के लिए खतरनाक
धूम्रपान फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है. इससे फेफड़ों का कैंसर होने की आशंका रहती है. लेकिन, क्या आपको पता है कि मच्छर भगानेवाला क्वॉयल इंसानों के लिए सिगरेट-बीड़ी से भी ज्यादा खतरनाक है. इसके अलावा घरों में प्रतिदिन उपयोग में लायी जानेवाली केमिकल युक्त अगरबत्ती और धूप से भी इसी तरह का खतरा है.
रांची : पुणे स्थित चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के शोध में यह पाया गया है कि मच्छर भगानेवाला एक क्वायल से निकलनेवाला धुआं इनसानी फेफड़ों को 100 सिगरेट के बराबर नुकसान पहुंचाता है. यानी अगर अाप धूम्रपान नहीं कर रहे हैं, तो भी एक क्वालय जलाकर अपने फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. यह धुआं इतना खतरनाक है कि व्यक्ति इससे क्रॉनिक अॉब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से गिरफ्त में आ सकता है.
फाउंडेशन के निदेशक डॉ संदीप साल्वी ने बताया कि उनके द्वारा किये गये शोध में यह पाया गया है कि मच्छर भगानेवाला क्वायल और धूप बत्ती काे जलाने से हवा का पीएम लेवल तेजी से बढ़ जाता है. हवा में पीएम का मानक 2.5 है, लेकिन एक क्वॉयल जलाने से यह
मानक 40 गुना बढ़कर 2400 के करीब पहुंच जाता है. रिम्स के फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ ब्रजेश मिश्रा ने बताया कि मच्छर भगानेवाला क्वॉयल व धूप बत्ती सिगरेट से भी खतरनाक है. इसकी परिधि में आनेवाले को सीओपीडी होने की आशंका रहती है.
एक धूप बत्ती स्टिक 500 सिगरेट के बराबर
डॉ साल्वी ने बताया कि धूप बत्ती में खतरनाक रसायन का प्रयोग किया जाता है. यह केमिकल इतना खराब होता है कि एक धूप बत्ती को जलाया जाये और व्यक्ति उसको सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचता है, तो वह 500 सिगरेट के बराबर होता है. यह इतना हानिकारक होता है कि मरीज सीओपीडी से पीड़ित हो जाता है और उसको पता तक नहीं चलता है.
गर्भवती व नवजात शिशु के लिए है खतरनाक
मच्छर से अपने को बचाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला क्वायल गर्भवती महिला व शिशु के लिए काफी खतरनाक होता है. इसके दुष्प्रभाव से गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे पर दुष्प्रभाव पड़ता है. बच्चे की मौत तक हो सकती है. नवजात बच्चे के आसपास क्वायल जला दिया जाये, ताे सांस की समस्या से पीड़ित होने के अलावा घुटन से मौत तक हो जाती है.
10 करोड़ प्रतिमाह का कारोबार होता है झारखंड में अगरबत्ती और धूप का
झारखंड में प्रतिमाह अगरबत्ती और धूप का कारोबार करीब 10 करोड़ रुपये का है. राज्य में अगरबत्ती व धूप बैंगलोर से मंगायी जाती है. यह ब्रांडेड अगरबत्ती होती है. वहीं, कुछ अगरबत्ती का निर्माण स्थानीय स्तर पर किया जाता है, जिसकी क्वालिटी की जांच नहीं होती है. जानकार बताते हैं कि स्थानीय स्तर से बनायी जानेवाली अगरबत्ती व धूप में क्वालिटी से समझौता किया जाता है. वहीं, मच्छर अगरबत्ती का राज्य में प्रतिमाह 1,000 पेटी की खपत होती है, यानी 70 लाख का कारोबार राज्य में होता है.
असली धूप बत्ती देवदार के छाल से होता है तैयार
अगरबत्ती व धूप के कारोबार करनेवाले बताते हैं कि असली धूप बत्ती देवदार के छाल से तैयार की जाती है. यह शुद्ध होती है. वहीं, दोयम दर्जे का धूप सड़े-गले गुड़ व खराब हो चुके गन्ने से तैयार की जाती है. इसमें केमिकल का उपयोग कर धूप बत्ती व अगरबत्ती तैयार की जाती है. यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.
सिटोनेला घास से तैयार होती है असली मच्छर भगानेवाली अगरबत्ती
विशेषज्ञ बताते हैं कि मच्छर अगरबत्ती सिटोनेला घास से तैयार होती है. यह घास असम में होती है, लेकिन इसकी खेती अब अन्य राज्यों में की जाती है. इसका दुष्प्रभाव कम होता है, लेकिन केमिकलयुक्त मच्छर अगरबत्ती शरीर पर दुष्प्रभाव डालती है. एेसे में इसके उत्पाद पर रोक लगनी चाहिए.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
मच्छर भगानेवाला क्वायल बहुत ही खतरनाक है. यह सिगरेट से ज्यादा फेफड़ा को खराब करता है. लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. लोगों को जागरूक करने की जरूरत है कि दूषित धुआं से बचें, नहीं तो फेफड़ा की गंभीर बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं.
डॉ निशीत कुमार, फेफड़ा रोग विशेषज्ञ
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