धान घोटाले से संबंधित केस का अनुसंधान अब सीआइडी करेगी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 May 2019 5:01 AM (IST)
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रांची : राज्य के विभिन्न जिलों में धान खरीद में हुए घोटाले को लेकर केस का अनुसंधान अब सीआइडी करेगी. इसके लिए डीजीपी डीके पांडेय ने सहमति दे दी है. डीजीपी से सहमति मिलने के बाद आइजी (प्रोविजन) अरुण कुमार सिंह ने इससे संबंधित निर्देश जारी कर दिया है. उन्होंने आदेश में लिखा है कि […]
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रांची : राज्य के विभिन्न जिलों में धान खरीद में हुए घोटाले को लेकर केस का अनुसंधान अब सीआइडी करेगी. इसके लिए डीजीपी डीके पांडेय ने सहमति दे दी है. डीजीपी से सहमति मिलने के बाद आइजी (प्रोविजन) अरुण कुमार सिंह ने इससे संबंधित निर्देश जारी कर दिया है. उन्होंने आदेश में लिखा है कि हाइकोर्ट के ऑर्डर के आलोक में राज्य में धान खरीद में हुई अनियमितता के संबंध में दर्ज सभी केस का अनुसंधान सीआइडी से कराने का निर्णय लिया गया है, जिस पर डीजीपी का भी अनुमोदन प्राप्त है.
उल्लेखनीय है कि 10 मई को हाइकोर्ट में बहुल मंडल के रेगुलर जमानत को लेकर सुनवाई हुई थी. संबंधित केस धान खरीद से जुड़ा है. इसे लेकर लिट्टीपाड़ा थाना में कांड संख्या 35/2017 के तहत केस दर्ज है. इसमें हाइकोर्ट ने धान खरीद में हुए घोटाले की पुलिस जांच को असंतोषजनक बताया था.
मामले में हाइकोर्ट ने ऑर्डर की कॉपी गृह सचिव को भेजते हुए केस में शपथपत्र दायर करने का निर्देश दिया है. हाइकोर्ट ने गृह सचिव से पूछा कि क्या सरकार धान खरीद घोटाले मामले में पुलिस की जांच से संतुष्ट है?
क्या इस तरह की मामले की जांच के लिए राज्य सरकार की एजेंसी के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है? क्या राज्य सरकार इस तरह की मामले की जांच सीबीआइ से कराने को तैयार है? क्योंकि मामले में करोड़ों की वित्तीय अनियमितता की बात सामने आयी है. इस गड़बड़ी में सरकारी अधिकारियों के अलावा निजी लोग भी शामिल हैं.
पुलिस मुख्यालय के निर्णय के बाद आइजी प्रोविजन ने जारी किया आदेश
पुलिस की अनुसंधान को हाइकोर्ट ने बताया था असंतोषजनक
डीजीपी के पास भेजी गयी थी ऑर्डर की कॉपी
हाइकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी पुलिस मुख्यालय डीजीपी के पास भेज दी गयी थी, ताकि मामले में आगे निर्णय लिया जा सके. कोर्ट ने ऑर्डर में यह भी कहा था कि राज्य में सरकारी धन से पैक्स के जरिये धान की खरीदारी हुई है, लेकिन केस धारा 406 और 420 के तहत दर्ज हुआ है.
केस की जांच अनुसंधानक द्वारा उचित तरीके से नहीं की गयी है. अनुसंधान के दौरान आरंभिक साक्ष्य भी एकत्रित नहीं किये गये हैं. जबकि मामले से संबंधित कुछ केस हजारीबाग, गोड्डा, देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़ सहित अन्य जिलों में दर्ज किये जा चुके हैं. इसमें बिना उचित जांच के आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दिया गया है.
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