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रांची : रिकॉर्ड टैक्स की वसूली तो कर ली अब मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दीजिए

Updated at : 02 Apr 2019 9:14 AM (IST)
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रांची : रिकॉर्ड टैक्स की वसूली तो कर ली अब मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दीजिए

रांची नगर निगम के अधिकारियों से राजधानीवासियों की गुहार रांची : रांची नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में शहरवासियों से रिकॉर्ड तोड़ टैक्स वसूला है. इस वित्तीय वर्ष में रांची नगर निगम ने कुल 1.80 लाख घरों से टैक्स के रूप में 49.27 करोड़ रुपये की वसूली की है. शहरवासियों के इस सहयोग से […]

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रांची नगर निगम के अधिकारियों से राजधानीवासियों की गुहार
रांची : रांची नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में शहरवासियों से रिकॉर्ड तोड़ टैक्स वसूला है. इस वित्तीय वर्ष में रांची नगर निगम ने कुल 1.80 लाख घरों से टैक्स के रूप में 49.27 करोड़ रुपये की वसूली की है. शहरवासियों के इस सहयोग से नगर निगम के अधिकारी गद्गद हैं. लेकिन, शहरवासी भी नगर निगम से सवाल कर रहे हैं कि जब हम दिल खोलकर टैक्स का भुगतान कर रहे हैं, तो नगर निगम हमें उस स्तर की सुविधाएं क्यों नहीं दे रहा है?
पानी का संकट
शहर के विभिन्न इलाकों में हर साल गर्मी के मौसम में पानी का संकट उत्पन्न हो जाता है. इस बार अभी से ही राजधानीवासियों को पानी की किल्लत का भय सताने लगा है. इधर, पाइप लाइन से लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने की योजना अब भी अधूरी है. अब भी शहर के करीब डेढ़ लाख मकानों में सप्लाइ पाइप लाइन नहीं पहुंचा है.
जाहिर है कि गर्मी के दिनों में इन मकानों में रहनेवाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. शहर में पाइप लाइन से पेयजल आपूर्ति का जिम्मा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का है. लेकिन, चूंकि लोग पानी का बिल रांची नगर निगम को देते हैं, इसलिए सवाल भी उसी से किये जा रहे हैं कि गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत कैसे दूर होगी?
मच्छरों का प्रकोप
गर्मी शुरू होते ही राजधानी में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है. लोग दिन में भी मॉस्क्युटो क्वायल जला रहे हैं. नगर निगम का दावा है कि पूरे शहर में समय-समय पर फॉगिंग होती है. इस मद में सालाना 70 लाख खर्च होते हैं.
जमीनी हकीकत यह है कि नगर निगम के पास 12 फॉगिंग मशीनें हैं, जिनमें से सात खराब हैं और बकरी बाजार स्थित स्टोर में पड़ी हैं. आमलोगों का आरोप है कि नगर निगम वीआइपी और वीवीआइपी इलाकों में नियमित रूप से फॉगिंग कराता है. वहीं, शहर के अन्य हिस्सों में साल में एक-दो बार ही फॉगिंग होती है. इधर, नगर निगम के अधिकारी कहते हैं कि जल्द ही तीन कोल्ड फॉगिंग मशीनें आनेवाली हैं, जिससे फॉगिंग नियमित हो जायेगा.
सफाई कार्य ठप
रांची नगर निगम और एस्सेल इंफ्रा की लड़ाई ने शहर को कचरे के ढेर में तब्दील कर दिया है. एस्सेल इंफ्रा पर समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए नगर निगम ने उसे टर्मिनेट करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेज दिया है. सरकार की ओर से फैसला आना बाकी है, इसके बावजूद कंपनी ने कचरे का उठाव बंद कर दिया है.
कंपनी के एमटीएस और वाहनों को नगर निगम ने अपने अधिकार में ले लिया है. साथ ही दावा किया जा रहा है कि अब जल्द ही शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर आज जायेगी. लेकिन, यह दावा भी हकीकत से कोसों दूर है. मुख्य सड़कों को छोड़ दें, तो शहर की गलियां और नालियां कचरे से अटी पड़ी हैं. ये हाल तब है जब रांची नगर निगम का दावा है कि शहर की सफाई व्यवस्था पर करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं.
निगम टैक्स वसूल करने में तो आगे रहता है, लेकिन शहरवासियों को सुविधा देने में पूरी तरह से फिसड्डी है. आज पूरे शहर के लोग मच्छरों से त्राहिमाम कर रहे हैं. लेकिन नगर निगम का सारा ध्यान वीवीआइपी कॉलोनियों में ही फॉगिंग कराने तक सीमित है.
राजेंद्र कुमार, मोरहाबादी
शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है. कचरे का नियमित उठाव नहीं होने के कारण मच्छरों का प्रकोप दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है. नगर निगम अगर हमसे टैक्स ले रहा है, तो सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी भी उसी की है.
रंजीत कुमार, एदलहातू
नगर निगम टैक्स तो वसूल लेता है, लेकिन उसे शहरवासियों की फिक्र नहीं है. शहर में ओपेन स्पेस की कमी है. लोग सुबह-शाम पार्कों में घूमने जाते हैं. लेकिन, निगम के पार्कों में भी इंट्री के लिए 10 रुपये वसूला जाता है. इस तरह की मनमानी बंद होनी चाहिए.
करण कुमार, कचहरी
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