चालीसा का पुण्यकाल- 10 : रिश्ते को बना सकते हैं बेहतर
Updated at : 15 Mar 2019 7:42 AM (IST)
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फादर अशोक कुजूर सुबह का समय था. एक परिवार नाश्ता कर रहा था. बच्चों को स्कूल जाना था, तो पापा को ऑफिस जाने की जल्दी थी़ उस दिन एक जरूरी बिजनेस मीटिंग भी थी़ बेटी ने रोटी उठाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया, पर गलती से उसका हाथ कप से टकरा गया और कॉफी पापा […]
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फादर अशोक कुजूर
सुबह का समय था. एक परिवार नाश्ता कर रहा था. बच्चों को स्कूल जाना था, तो पापा को ऑफिस जाने की जल्दी थी़ उस दिन एक जरूरी बिजनेस मीटिंग भी थी़
बेटी ने रोटी उठाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया, पर गलती से उसका हाथ कप से टकरा गया और कॉफी पापा की कमीज पर गिर गयी. उन्होंने गुस्से में बेटी को जोर से डांटा़ बेटी रोने लगी़ पापा की मम्मी से भी बहस हो गयी. पापा नाश्ता छोड़ कर शर्ट बदलने चले गये. फिर किसी की ओर देखे बिना सीधे ऑफिस के लिए निकल पड़े़ ऑफिस पहुंचकर भी उनका मूड नहीं सुधरा़ उन्होंने चपरासी, असिस्टेंट सबको डांट पिलायी. मीटिंग के दौरान सहकर्मियों से भी उनकी बहस हो गयी.
शाम को जब वे घर आये, तो उन्होंने नोटिस किया कि बेटी एक कोने में डरी-सहमी बैठी है़ पत्नी भी चुप-चुप थी़ पापा ने अनमने ढंग से पास रखी एक पुस्तक को उठाया और पन्ने पलटने लगे़ अचानक उनकी नजर एक शीर्षक पर पड़ी ’90/10′ का सिद्धांत़ उसमें लिखा था- जीवन में आपके साथ क्या गुजरता है, इससे जीवन का सिर्फ 10 प्रतिशत बनता है़
जीवन का बाकी 90 प्रतिशत इस बात पर निर्भर है कि आप जीवन में घटने वाली घटनाओं के साथ क्या और कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करते है़ं चालीसा काल हमसे कहता है कि जीवन में जो कुछ भी घटित होता है, उसपर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है़ हम सिर्फ अपनी प्रतिक्रिया को नियंत्रित कर सकते हैं और अपने रिश्तों को बेहतर बना सकते है़ं लेखक डॉन बॉस्को यूथ एंड एजुकेशनल सर्विसेज बरियातू के निदेशक हैं
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