झारखंड में सार्वजनिक नहीं की जाती है सोशल ऑडिट की रिपोर्ट
Updated at : 11 Mar 2019 9:28 AM (IST)
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संजय अपने कार्यक्रमों व उपलब्धियों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देती है सरकार, लेकिन… रांची : सरकार आम लोगों व समाज के हित में कई कल्याणकारी योजनाएं चलाती है. समय-समय पर इन योजनाओं का सोशल ऑडिट भी होता है. सोशल ऑडिट या सामाजिक अंकेक्षण का यह काम पूर्व के प्रावधान के तहत या […]
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संजय
अपने कार्यक्रमों व उपलब्धियों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देती है सरकार, लेकिन…
रांची : सरकार आम लोगों व समाज के हित में कई कल्याणकारी योजनाएं चलाती है. समय-समय पर इन योजनाओं का सोशल ऑडिट भी होता है. सोशल ऑडिट या सामाजिक अंकेक्षण का यह काम पूर्व के प्रावधान के तहत या फिर तत्कालीन निर्णय के आधार पर होता है. झारखंड में भी ग्रामीण विकास विभाग के तहत एक सोशल ऑडिट सेल कार्यरत है.
गुरजीत इसके राज्य समन्वयक हैं. दूसरे कई विभाग भी इसी सेल के माध्यम से सामाजिक अंकेक्षण का काम कराते हैं, पर इसकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की जाती है. सरकार अपने कार्यक्रमों व उपलब्धियों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देती है. पर सामाजिक अंकेक्षण के लिए कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं होता. कई सामाजिक कार्यकर्ता व संगठन इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हैं.
क्या है सोशल ऑडिट
सोशल ऑडिट या सामाजिक अंकेक्षण किसी स्वतंत्र एजेंसी या संगठन द्वारा कराया जानेवाला सर्वे या अंकेक्षण है. इसके जरिये किसी योजना या कार्यक्रम की सफलता तथा इनमें हो रही परेशानियों का आकलन लाभुकों सहित अन्य स्टेक होल्डर से बातचीत के आधार पर किया जाता है. सोशल अॉडिट की सहायता से संबंधित कार्यक्रम या योजना की समझ बढ़ायी जाती है तथा इसका प्रदर्शन अौर बेहतर करने के तरीके तलाशे जाते हैं. लोकतांत्रिक देशों में सोशल अॉडिट का शब्द 1950 के आसपास चलन में आया, जो 1990 तक लोकप्रिय हो चला था.
किन-किन योजनाओं का हुआ सोशल ऑडिट
मनरेगा व मनरेगा के तहत आम की बागवानी तथा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण
पंचायती राज प्रभाग में पंचायतों में विकास कार्य
स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के तहत स्कूलों में चलने वाली मध्याह्न भोजन योजना
पेयजल व स्वच्छता विभाग की शौचालय निर्माण योजना
खाद्य आपूर्ति विभाग के तहत नगड़ी प्रखंड में चली (अब बंद) डीबीटी योजना
समाज कल्याण विभाग के तहत आंगनबाड़ी में चलने वाला समेकित बाल विकास कार्यक्रम
समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित रेडी-टू-इट पूरक पोषाहार कार्यक्रम
कल्याण विभाग से संबद्ध जेटीडीएस के जरिये संचालित आजीविका विकास कार्यक्रमों का थर्ड पार्टी ऑडिट
(नोट : अब खाद्य आपूर्ति विभाग जन वितरण प्रणाली का सोशल ऑडिट कराने वाला है. उधर, स्वास्थ्य विभाग भी 108 एंबुलेंस सेवा का थर्ड पार्टी अॉडिट करायेगा)
सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक न होना दुर्भाग्यपूर्ण है. अंकेक्षण सरकार के अपने सेल के बजाय किसी स्वतंत्र एजेंसी से होना चाहिए. पारदर्शिता व विश्वसनीयता के लिए यह जरूरी है. झारखंड में सोशल अॉडिट के लिए स्वतंत्र एजेंसी बनाने की जो प्रक्रिया चल रही है, वह जल्द पूरी हो.
बलराम, सामाजिक कार्यकर्ता
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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