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रांची : न बेंच का पता न डेस्क का, कमरे के बाहर से विद्यार्थी करते हैं क्लास

Updated at : 07 Feb 2019 7:09 AM (IST)
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रांची : न बेंच का पता न डेस्क का, कमरे के बाहर से विद्यार्थी करते हैं क्लास

डिजिटल युग में आरएलएसवाइ कॉलेज में ऐसे हो रही पढ़ाई जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई के लिए नहीं है कोई सुविधा जहां चार आदमी ठीक से खड़े नहीं हो सकते, वहां विद्यार्थी करते हैं क्लास सुनील कुमार झा रांची : राजधानी का रामलखन सिंह यादव (आरएलएसवाइ) कॉलेज रांची विवि का अंगीभूत कॉलेज है. यहां […]

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  • डिजिटल युग में आरएलएसवाइ कॉलेज में ऐसे हो रही पढ़ाई
  • जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा
  • की पढ़ाई के लिए नहीं है कोई सुविधा
  • जहां चार आदमी ठीक से खड़े नहीं हो सकते, वहां विद्यार्थी करते हैं क्लास
सुनील कुमार झा
रांची : राजधानी का रामलखन सिंह यादव (आरएलएसवाइ) कॉलेज रांची विवि का अंगीभूत कॉलेज है. यहां के क्लास रूम की स्थिति प्राथमिक विद्यालय से भी बदतर है.
आलम यह है कि जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभाग का संचालन दस बाइ आठ के कमरे में होता है. विद्यार्थियों के बैठने के लिए बेंच-डेस्क तक नहीं है. ऐसे में कुछ विद्यार्थी खड़ा होकर क्लास करते हैं, तो कुछ शिक्षक के टेबल पर ही कॉपी रखकर लिखने को मजबूर हैं. और तो अौर सभी विद्यार्थी शिक्षक की तरफ मुंह करके भी नहीं बैठ सकते हैं. कुछ ऐसा ही नजारा बुधवार को देखने को मिला. कॉलेज के शिक्षक डॉ खालिक अहमद कक्षा ले रहे थे. 13 विद्यार्थी मौजूद थे, लेकिन कॉपी रखने के लिए डेस्क नहीं था.
सात विद्यार्थी शिक्षक की तरफ मुंह करके बैठे थे. वहीं, शिक्षक की कुर्सी उत्तर की ओर थी. तीन विद्यार्थी पश्चिम की तरफ तो तीन पूरब की ओर मुंह करके बैठे थे. एक विद्यार्थी शिक्षक की टेबल के सामने लगी कुर्सी पर ही बैठा था. जबकि चार विद्यार्थी कमरे के गेट के सामने खड़े थे. वह न तो शिक्षक को देख पा रहे थे न ही शिक्षक विद्यार्थी को. विद्यार्थी केवल उनकी बात सुन पा रहे थे. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई किस तरह होती है.
चार जानजातीय भाषा की होती है पढ़ाई
रामलखन सिंह यादव कॉलेज कोकर में स्नातक स्तर पर चार जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई होती है. कॉलेज में कुड़ुख , मुंडारी, नागपुरी व कुरमाली भाषा की पढ़ाई होती है. स्नातक सभी सत्र मिला कर विभाग में लगभग 300 से अधिक विद्यार्थी नामांकित हैं. कॉलेज में शिक्षकों की भी कमी है.
संसाधन की कमी से जूझ रहा है कॉलेज
जानकारी के मुताबिक कॉलेज संसाधनों की कमी से जूझ रहा है. हालत यह है कि एक ही कमरे में पढ़ाई से लेकर प्रैक्टिकल तक होता है. साइकिल स्टैंड को क्लास रूम बना दिया गया है. इसी व्यवस्था के साथ पिछले कई सालों से यहां शिक्षण कार्य चल रहा है. कॉलेज की जमीन का विवाद वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. इस कारण यहां निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है.
क्या कहते हैं विद्यार्थी
कॉलेज में संसाधनों का अभाव है. क्लास रूम तक नहीं है. कॉलेज में पढ़ने वाले अधिकतर विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं. संसाधन के अभाव में ठीक से कक्षा संचालित नहीं होती है.
सुलेखा कुमारी
विद्यार्थी किसी तरह कक्षा करते हैं. बरसात में सबसे अधिक परेशानी होती है. जगह के अभाव में सभी विद्यार्थी क्लास में नहीं बैठ पाते. कुछ विद्यार्थी कमरे के बाहर खड़ा रहकर क्लास करते हैं.
सरिता कुमारी
विश्वविद्यालय व सरकार को चाहिए की जल्द से जल्द कॉलेज भवन का निर्माण कराये, जिससे विद्यार्थी बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें. कमरे के अभाव में कक्षा करने में काफी परेशानी होती है.
पप्पू महतो
जगह की कमी के कारण सभी विद्यार्थी क्लास नहीं कर पाते हैं. इस कारण कई विद्यार्थी क्लास करने भी नहीं आते हैं. कॉलेज भवन का निर्माण जल्द से जल्द हो.
ग्रेस टोप्पो
आरएलएसवाइ रांची विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई है. कॉलेज में संसाधनों की कमी है. जमीन विवाद के कारण भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है. कॉलेज के मामले की पूरी जानकारी विश्वविद्यालय को है.
डॉ मनोज कुमार, प्राचार्य रामलखन सिंह यादव कॉलेज
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