रांची : लोकायुक्त ने सुनवाई के बाद कहा जरूरी हो, तो अध्यक्ष पर करें केस
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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प्रणव जांच में हुई पुष्टि, गढ़वा नगर परिषद में हुई थी वित्तीय अनियमितता रांची : विकास योजनाओं में गढ़वा नगर परिषद की ओर से वित्तीय अनियमितता की गयी. जांच में इसकी पुष्टि हो गयी है. लोकायुक्त जस्टिस डीएन उपाध्याय ने मामले में सुनवाई के बाद कार्रवाई का आदेश दिया है. उन्होंने कहा है कि एलइडी […]
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प्रणव
जांच में हुई पुष्टि, गढ़वा नगर परिषद में हुई थी वित्तीय अनियमितता
रांची : विकास योजनाओं में गढ़वा नगर परिषद की ओर से वित्तीय अनियमितता की गयी. जांच में इसकी पुष्टि हो गयी है. लोकायुक्त जस्टिस डीएन उपाध्याय ने मामले में सुनवाई के बाद कार्रवाई का आदेश दिया है.
उन्होंने कहा है कि एलइडी लाइट के वास्तविक मूल्य के विरुद्ध अधिक भुगतान करने, डस्टबीन की जगह ड्रम स्थापित कर 800 की जगह 2000 रुपये भुगतान करने, विभिन्न कार्यों को प्राक्कलन के अनुरूप न कराये जाने और सोनपुरवा बस स्टैंड गढ़वा के जीर्णोद्धार कार्य की निविदा प्रक्रिया एवं योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता की गयी है.
इसमें संबंधित पदाधिकारियों व कर्मचारियों के साथ ही गढ़वा नगर परिषद अध्यक्ष पिंकी केसरी भी समान रूप से उत्तरदायी हैं. इसलिए आवश्यक हो, तो नगर विकास विभाग के सचिव गढ़वा नगर परिषद में किये गये उपरोक्त वित्तीय अनियमितता के लिए संलिप्त पदाधिकारियों और गढ़वा नगर परिषद अध्यक्ष के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं.
मामले में लोकायुक्त ने नगर विकास सचिव से एक माह में कार्रवाई प्रतिवेदन देने को कहा है. यह भी कहा गया है कि नगर परिषद अध्यक्ष पिंकी केसरी के पति संतोष केसरी द्वारा नगर परिषद के कार्यों में हस्तक्षेप किये जाने की बात भी प्रमाणित हुई है. बता दें कि पूर्व में कई पदाधिकारियों व कर्मियों पर विभाग की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है.
गढ़वा नगर परिषद के इन पदाधिकारियों और कर्मियों पर की गयी कार्रवाई
कृष्ण कुमार, टैक्स दारोगा की वार्षिक वेतन वृद्धि पर लगायी गयी है रोक.तत्कालीन कार्यपालक अभियंता छठु तिग्गा व तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अंजना दास के विरुद्ध प्रपत्र क गठित कर विभागीय कार्रवाई के लिए कार्मिक विभाग को लिखा गया है.
गढ़वा नगर परिषद के तत्कालीन पदाधिकारी हरिशंकर बारिक से स्पष्टीकरण. संविदा पर कार्यरत सहायक व कनीय अभियंता की संविदा आधारित सेवा समाप्त करने का निर्देश.
एलइडी लाइट के वास्तविक मूल्य के विरुद्ध अधिक भुगतान किया गया. डस्टबीन की जगह ड्रम स्थापित कर 800 की जगह 2000 रुपये का भुगतान किया गया. सोनपुरवा बस स्टैंड गढ़वा के जीर्णोद्धार में भी गड़बड़ी की गयी. प्राक्कलन के अनुरूप विकास कार्यों को नहीं कराया गया.
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