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कैरियर पुरातत्व विज्ञान में : इतिहास के साथ निकलती भविष्य की राह

Updated at : 23 Aug 2018 7:47 AM (IST)
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कैरियर पुरातत्व विज्ञान में : इतिहास के साथ निकलती भविष्य की राह

रांची :पुरातत्व विज्ञान मानव के इतिहास का अध्ययन करने वाला विज्ञान है. यह मानव जीवन के इतिहास को ऐतिहासिक जगहों के सर्वेक्षण, खुदाई से निकले अवशेष, स्थापत्य कला आदि से जानने की दिशा में काम करता है. यह खुदाई से निकली कलाकृतियों और स्मारकों का विश्लेषण भी करता है, जो मानव इतिहास की जानकारी देने […]

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रांची :पुरातत्व विज्ञान मानव के इतिहास का अध्ययन करने वाला विज्ञान है. यह मानव जीवन के इतिहास को ऐतिहासिक जगहों के सर्वेक्षण, खुदाई से निकले अवशेष, स्थापत्य कला आदि से जानने की दिशा में काम करता है. यह खुदाई से निकली कलाकृतियों और स्मारकों का विश्लेषण भी करता है, जो मानव इतिहास की जानकारी देने में काफी मदद करते हैं. पुरातत्ववेत्ता पारंपरिक तरीके से सामग्री एकत्रित करने के अलावा नयी तकनीक का भी इस्तेमाल करता है. इसके लिए वे जीन-अध्ययन, कार्बन डेटिंग, थर्मोग्राफी, सैटेलाइट इमेजिंग, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग आदि की मदद लेते हैं.
शैक्षणिक योग्यता
ज्यादातर भारतीय विश्वविद्यालयों में जहां पुरातत्व विज्ञान विभाग है, वहां मुख्यत: स्नातकोत्तर स्तर पर ही इस विषय की पढ़ाई करायी जाती है. यानी पुरातत्ववेत्ता बनने के लिए स्नातक डिग्री जरूरी है. यह स्नातक की डिग्री किसी भी विषय में हो सकती है. मगर इतिहास, समाज-शास्त्र या मानव-विज्ञान में स्नातक की डिग्री पुरातत्व विज्ञान को समझने में सहायक होती हैं. साथ ही जिस विश्वविद्यालय से आप पुरातत्व विज्ञान पढ़ना चाहते हैं, वहां किन-किन स्नातक विषयों को मान्यता दी जाती है, इसकी भी जानकारी होना आवश्यक है.
व्यक्तिगत गुण
पुरात्तव विज्ञान में करियर बनाने के लिए जितना शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता होती है, लगभग उतनी ही जरूरत व्यक्तिगत गुण की भी है. वैसे लोग जिनका इतिहास में लगाव हो, लगतार पढ़ने और चिंतन करने की क्षमता हो, पुरातत्व का पेशा उन्हीं के लिए बना है. यह पेशा काफी जुनून मांगता है क्योंकि इसमें पुरातत्वविदों को कई घंटों से लेकर दिनों तक उत्खनन क्षेत्रों में कैंप में रहना होता है, प्रयोगशाला में समय बिताना पड़ता है. इसलिए एक पुरातत्वविद का धैर्यवान होना बहुत जरूरी है. इतिहास की विस्तृत जानकारी, ज्यादा से ज्यादा पढ़ने की आदत, अच्छी लेखन क्षमता, विश्लेषणात्मक और केंद्रित दिमाग एक सफल पुरातत्वविद बनने के आवश्यक गुण हैं. इस पेशे में पैसे से ज्यादा नाम-पहचान अहमियत रखती है.
रोजगार के अवसर
राज्य और केंद्र दोनों ही स्तर पर पुरातत्वविदों के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नौकरी देता है. इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा विभिन्न पदों के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षा के लिए आवेदन करना होता है. साथ ही पुरातत्व में स्नातकोत्तर विद्यार्थी विभिन्न विश्वविद्यालयों में व्याख्याता पद के लिए भी आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा या जूनियर रिसर्च फैलो की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है. जूनियर रिसर्च फैलो की परीक्षा पास किए विद्यार्थी को फैलोशिप मिलने के साथ-साथ डॉक्टरेट की डिग्री के लिए पढ़ने का अवसर भी मिलता है. पुरातत्वविदों के लिए सरकारी या निजी संग्रहालयों में कलाकृतियों के रख-रखाव व प्रबंधन के स्तर पर भी नौकरी के अवसर होते हैं.
पुरातत्व विज्ञान की शाखाएं
-वनस्पति पुरातत्व
-आर्कियोमेट्री
-जीव पुरातत्व
-युद्ध पुरातत्व
-पर्यावरणीय पुरातत्व
-मानव जाति विज्ञान पुरातत्व
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