3 साल से खोजी जा रही गड़बड़ी की फाइल

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Aug 2018 3:35 AM

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अपर सचिव ने फिर लिखा पत्र, मामले को उजागर करनेवाले रेंजर पर भी कार्रवाई की तैयारी रांची : रांची वन प्रमंडल में 2011-2012 के दौरान हुई गड़बड़ी की संचिका तीन साल से खोजी जा रही है. इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. जांच रिपोर्ट कहां गायब हो गयी है. इसका पता […]

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अपर सचिव ने फिर लिखा पत्र, मामले को उजागर करनेवाले रेंजर पर भी कार्रवाई की तैयारी

रांची : रांची वन प्रमंडल में 2011-2012 के दौरान हुई गड़बड़ी की संचिका तीन साल से खोजी जा रही है. इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. जांच रिपोर्ट कहां गायब हो गयी है. इसका पता लगाने में वन विभाग जुटा हुअा है. वहीं दूसरी ओर इस मामले को प्रकाश में लाने वाले रेंजर पर कार्रवाई की तैयारी भी हो रही है. रेंजर पर कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर काम करने का आरोप लगाया गया है. उनको कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है. इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने पर रेंजर आनंद कुमार ने 18.2.2015 को मुख्यमंत्री सचिवालय में शिकायत की.
मुख्यमंत्री सचिवालय ने पूरे मामले की जांच के लिए 24 फरवरी 2015 को आदेश दिया. पांच अक्तूबर 2015 को विभाग के उप सचिव सुनील कुमार ने मुख्य वन संरक्षक, सतर्कता को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी मांगी. 10 अप्रैल 2018 को फिर पत्र लिखकर विभाग के अपर सचिव दीपांकर पंडा ने इस मामले की जानकारी मांगी है. दूसरी ओर विभाग ने आनंद कुमार द्वारा की गयी शिकायत को सरकारी सेवक के आचार नियमावली के विपरीत माना है. उन पर कार्रवाई करने की अनुशंसा की गयी है.
क्या है मामला
रांची पूर्वी वन प्रमंडल (अब रांची वन प्रमंडल ) में गड़बड़ी की शिकायत वन विभाग को मिली थी. विभाग के वन संरक्षक, सतर्कता ने इस मामले की जांच की थी. जांच के बाद 2010-11 और 2011-12 में कराये गये कार्यों की निगरानी जांच की अनुशंसा की गयी. सतर्कता अधिकारी की अनुशंसा वाली संचिका ही विभाग खोज रहा है. प्रारंभिक जांच में उस वक्त महिलौंग वन प्रक्षेत्र में 4.25 करोड़ की गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया था. इस मामले में तत्कालीन वन क्षेत्र पदाधिकारी पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश भी दिया गया था.
इतनी बड़ी राशि की अनियमितता के लिए तत्कालीन वन रक्षी, तत्कालीन वन पाल, तत्कालीन वन संरक्षक, तत्कालीन वन क्षेत्र पदाधिकारी, तत्कालीन सहायक वन संरक्षक, वन प्रमंडल पदाधिकारी और वन संरक्षक के मिले होने की आशंका जतायी गयी थी. सभी पदाधिकारियों को निलंबित करने की अनुशंसा की गयी थी. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि रांची पूर्वी प्रमंडल में रामडेरा, सिल्ली विश्रामागार में मजदूरों ने पांच माह से मजदूरी भुगतान नहीं होने की शिकायत की थी. वन क्षेत्र पदाधिकारी ने इस संबंध में सतर्कता अधिकारी को कोई ठोस जवाब नहीं दिया था. इसके बाद सभी वन पालों की बैठक बुलायी गयी. इसमें वन पालों से बातचीत और क्षेत्र भ्रमण के दौरान पाया था
कि मार्च 2012 तक जो कार्य पूरे होने थे, वह अधूरे थे. इन कार्यों पर 4.25 करोड़ रुपये का प्रावधान था. वन क्षेत्र पदाधिकारी ने बिना अनुमति के 12.42 लाख रुपये की लागत से सिल्ली में अंबेडकर पार्क बना दिया था. दोनों मामले में तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी ने अपने नीचे वाले कर्मियों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की थी. वरीय अधिकारियों ने भी पूरी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की. वन संरक्षक प्रादेशिक अंचल और क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, रांची द्वारा स्मार पत्र दिये जाने के बाद भी वर्तमान वन प्रमंडल पदाधिकारी ने 4.25 करोड़ रुपये के अपूर्ण कार्य का कार्यवार भौतिक और वित्तीय प्रतिवेदन नहीं दिया. इस कारण सर्तकता अधिकारी ने पूरे प्रकरण की निगरानी से जांच अन्यथा विभाग स्तर पर उच्च स्तरीय समिति गठित कर जांच कराने की अनुशंसा की थी.
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