विधानसभा नियुक्ति घोटाला : जांच में हुआ है खुलासा, पैरवी पुत्रों की कॉपियों में मिली एक ही लिखावट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Jul 2018 8:09 AM (IST)
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आनंद मोहन रांची : विधानसभा नियुक्ति घोटाले की जांच के बाद नये तथ्य सामने आये हैं. विधानसभा में सहायक के लिए लिखित परीक्षा हुई थी. इस पद पर जिन राजनेताओं व रसूखदारों के करीबियों को बहाल करना था, उनके लिए पहले से ही तैयारी कर ली गयी थी. जांच में यह बात सामने आयी है […]
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आनंद मोहन
रांची : विधानसभा नियुक्ति घोटाले की जांच के बाद नये तथ्य सामने आये हैं. विधानसभा में सहायक के लिए लिखित परीक्षा हुई थी. इस पद पर जिन राजनेताओं व रसूखदारों के करीबियों को बहाल करना था, उनके लिए पहले से ही तैयारी कर ली गयी थी. जांच में यह बात सामने आयी है कि दर्जनों कॉपियों में एक ही लिखावट है. यानी नियुक्त किये गये लोगों की कॉपियां पूरे इत्मिनान से किसी एक ने ही अलग-अलग दिनों में लिखी थी. यही नहीं, 100 में 60 चयनित अभ्यर्थियों ने एक ही विषय पर निबंध लिखा था. जीवन में घटी किसी रोचक घटना पर प्रश्न आया, तो इन 60 चयनित अभ्यर्थियों को एक ही विषय सूझा. सबकी कॉपी में मिलती-जुलती घटना का जिक्र है़
आवेदन की तिथि खत्म होने के बाद भी मिली नौकरी
अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की तिथि विज्ञापन में निर्धारित थी. पैरवी पुत्रों जैसे-जैसे आते गये, उनकी नियुक्ति के लिए रास्ते तैयार किये जाते रहे. तत्कालीन निरसा विधायक के भाई को ड्राइवर के पद पर इसी तरह नियुक्त किया गया. विज्ञापन में आवेदन की अंतिम तिथि 28 दिसंबर 2006 थी. लेकिन विधायक के भाई ने आवेदन जमा नहीं किया. पर उन्हें साक्षात्कार के लिए बुला लिया गया. राज्यपाल ने इस बिंदु पर भी जांच का निर्देश दिया था. सूचना के मुताबिक दूसरे पदों के लिए भी यह खेल हुआ है़
विधानसभा के अफसरों ने ही जांची थी कॉपी
सहायक, अनुसेवक और दूसरे पदों के लिए हुई लिखित परीक्षा की कॉपियां जांच के लिए बाहर नहीं भेजी गयी थी. किसी विशेषज्ञ से भी नहीं दिखाया गया था. विधानसभा के अधिकारियों को ही कॉपियां जांचने की जिम्मेवारी दी गयी थी. सूचना के मुताबिक इनके पास जिन्हें नियुक्त करना था,उसकी सूची भी थी. इसलिए कॉपी जांचनेवालों ने मन मुताबिक अंक दिये.
कॉपियों को फॉरेंसिक लैब भी भेजा गया
एक ही तरह की कॉपी मिलने के बाद जांच के लिए उन्हें फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है. आयोग ने यह पता करने की कोशिश की थी कि कॉपियों को किसी एक आदमी ने लिखा है या अलग-अलग. सूचना के मुताबिक झारखंड में इसकी सुविधा नहीं होने के कारण कॉपियों को कोलकाता भेजा गया था. कॉपियों को देखने से यह पुष्ट हुआ कि किसी व्यक्ति ने ही लिखा है़
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