अब 30 से कम बच्चों वाले विद्यालयों का होगा विलय

Updated at : 26 Jul 2018 9:17 AM (IST)
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अब 30 से कम बच्चों वाले विद्यालयों का होगा विलय

रांची : झारखंड में अब 30 से कम बच्चों वाले विद्यालयों का विलय किया जायेगा. इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. रांची जिले में कुल 359 ऐसे विद्यालय हैं, जहां बच्चों की संख्या 30 से कम है. इन विद्यालयों को चिह्नित कर लिया गया है. रांची में शिक्षा की स्थिति व उसमें सुधार को […]

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रांची : झारखंड में अब 30 से कम बच्चों वाले विद्यालयों का विलय किया जायेगा. इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. रांची जिले में कुल 359 ऐसे विद्यालय हैं, जहां बच्चों की संख्या 30 से कम है. इन विद्यालयों को चिह्नित कर लिया गया है. रांची में शिक्षा की स्थिति व उसमें सुधार को लेकर स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह ने बुधवार को विश्वा सभागार में 10 घंटे से अधिक समय तक बैठक की. अलग-अलग चरणों में शिक्षा सचिव ने डीइओ, डीएसइ, बीआरपी-सीअारपी, परिवर्तन दल के सदस्य, निजी स्कूल, अल्पसंख्यक स्कूल, मदरसा, मुखिया, कस्तूरबा स्कूल व बीइइओ के साथ बैठक की.

पहले चरण में चिह्नित स्कूलों का विलय सुनिश्चित करायें : शिक्षा सचिव ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जो विद्यालय पहले चरण के लिए चिह्नित किये गये थे, उनका विलय सुनिश्चित करें. विलय के बाद बच्चों का नामांकन तय विद्यालय में सुनिश्चित करायें. विलय किये गये विद्यालयों के जमीन, भवन व अन्य संसाधन की विस्तृत रिपोर्ट दें.
बैठक में 30 व 60 से कम विद्यार्थी वाले स्कूलों के विलय पर विचार किया गया. रांची शहरी क्षेत्र में 217 विद्यालय ऐसे हैं, जिन्हें दूसरे चरण में विलय के लिए चिह्नित किया गया है. शहरी क्षेत्र में विलय किये जानेवाले विद्यालयों के बच्चों के लिए बसें चलायी जायेंगी. वहीं ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को परिवहन भत्ता दिया जायेगा. बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि विद्यार्थियों को कक्षा आठ के बदले छह में ही साइकिल दी जाये. बैठक में प्राथमिक शिक्षा निदेशक आकांक्षा रंजन, रांची के उपायुक्त राय महिमापत रे समेत अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.
मुखिया ने कहा : अंडे के लिए पैसे नहीं
बैठक में विभिन्न पंचायतों से आये मुखिया ने विद्यालयों में पठन-पाठन व संचालन को लेकर अपनी बातें रखी. कुछ मुखिया ने कहा कि शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं आते हैं. विद्यालय में पैसे समय पर नहीं मिलने के कारण बच्चों को अंडा देने की योजना प्रभावित हो रही है. गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए और प्रयास करने की आवश्यकता है.
स्कूलों में बायोमेट्रिक्स उपस्थिति अनिवार्य
स्कूली शिक्षा सचिव ने विद्यालयों में बच्चों की उपस्थित के लिए बायोमेट्रिक्स सिस्टम अनिवार्य करने की बात कही. शिक्षकों को अनिवार्य रूप से पोशाक पहनने व टीएनए भरने का निर्देश दिया गया. जिला फाइव स्टार ग्रेडिंग वाले विद्यालयों को एक लाख व फोर स्टार ग्रेडिंग वाले सरकारी विद्यालयों को 50 हजार का अनुदान दिया जायेगा. विद्यालय के विलय के बाद शिक्षकों के पदस्थापन की प्रक्रिया जुलाई के अंत तक पूरी कर ली जायेगी.
आरटीइ के निर्देश का पालन करें निजी स्कूल
शिक्षा सचिव ने निजी स्कूल, अल्पसंख्यक विद्यालय व मदरसा के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की. निजी स्कूल के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया गया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रावधान का पालन करें. नामांकित बच्चों के लिए राशि जल्द देने का आश्वासन दिया गया. ज्ञाननांजली योजना के तहत सरकारी व निजी स्कूलों के बीच शैक्षणिक गतिविधि बढ़ाने का भी निर्देश दिया. अल्पसंख्यक विद्यालय के प्रतिनिधियों को बताया गया कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द हो जायेगा. विद्यालयों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता देने की प्रक्रिया अब जिला स्तर पर ही पूरी की जायेगी.
साइंस, कॉमर्स की पढ़ाई कस्तूरबा विद्यालयों में नहीं
कस्तूरबा विद्यालयों में की समीक्षा के दौरान बताया गया कि यहां प्लस टू स्तर पर विज्ञान व वाणिज्य संकाय के विद्यार्थियों की संख्या काफी कम है. अधिकतर विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 10 से कम है. ऐसे में सभी विद्यालयों में विज्ञान व वाणिज्य संकाय की पढ़ाई बंद कर एक विद्यालय में सभी विषय के शिक्षकों की नियुक्ति कर पठन-पाठन शुरू करने का निर्णय लिया गया. मॉडल स्कूल में भी प्लस टू के लिए यही प्रक्रिया अपनायी जायेगी.
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