रांची : आठ जिलों में मलेरिया के इलाज की दवा ही नहीं
Author Prabhat khabar digital desk
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संजय जिलों की समीक्षा बैठक में हुआ खुलासा, राजधानी रांची की सबसे खराब स्थिति रांची : रांची सहित पलामू, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, देवघर, कोडरमा व धनबाद जिले में मलेरिया रोधी (एंटी मलेरिया) दवा नहीं है. यही नहीं इन जिलों में मलेरिया की रोकथाम संबंधी प्रचार-प्रसार के लिए न तो पोस्टर-बैनर तैयार है अौर […]
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संजय
जिलों की समीक्षा बैठक में हुआ खुलासा, राजधानी रांची की सबसे खराब स्थिति
रांची : रांची सहित पलामू, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, देवघर, कोडरमा व धनबाद जिले में मलेरिया रोधी (एंटी मलेरिया) दवा नहीं है.
यही नहीं इन जिलों में मलेरिया की रोकथाम संबंधी प्रचार-प्रसार के लिए न तो पोस्टर-बैनर तैयार है अौर न ही यहां मच्छरों की रोकथाम के लिए एंटी लारवा ड्रग्स तथा मलेरिया के संभावित रोगों की जांच के लिए ब्लड स्लाइड ही खरीदा गया है. इन जिलों के मलेरिया पदाधिकारी बार-बार मौखिक व लिखित रूप से आग्रह कर रहे हैं, पर संबंधित सिविल सर्जनों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है.
अभी 17, 18 व 19 जुलाई को जिला मलेरिया पदाधिकारियों की बैठक में बताया गया कि उपरोक्त आठ जिलों में इस बीमारी की रोकथाम की कोई तैयारी नहीं है. सबसे खराब स्थिति राजधानी रांची की ही है. यहां पीएचसी व सीएचसी स्तर पर मलेरिया से बचाव के लिए कुछ भी नहीं है. कुल मिला कर इस स्थिति से राज्य में मलेरिया की रोकथाम के लिए क्या उपाय है, इसकी हालत का पता चलता है.
रांची में पीएचसी व सीएचसी स्तर पर मलेरिया से बचाव के लिए कुछ भी नहीं है
बारिश के मौसम में मलेरिया होने का खतरा अधिक
गौरतलब है कि बरसात का मौसम मलेरिया के फैलने व बढ़ने का अनुकूल मौसम है. इसलिए स्वास्थ्य विभाग बरसात से पहले ही मलेरिया की रोकथाम के लिए उपाय कर लेने को कहता है. इस संबंध में तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव के विद्यासागर ने 15 सितंबर 2015 को अभियान निदेशक (एनएचएम) तथा निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य के साथ एक विशेष बैठक कर दिशा निर्देश तैयार किया था.
डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए उन्होंने सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया की दवा उपलब्ध कराने तथा यहां मलेरिया की नि:शुल्क जांच व उपचार संबंधी प्रचार-प्रसार करने को कहा था. यह स्पष्ट कर दिया गया था कि मलेरिया रोधी (एंटी मलेरिया) दवा की खरीद विकेंद्रीकृत है. यानी हर जिले के सिविल सर्जन की यह जिम्मेदारी है कि वे आवश्यकतानुसार यह खरीद करें तथा यह सुनिश्चित करें कि मलेरिया से किसी की मौत न हो.
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