रांची : आदिवासी हित के कानूनों को बदलने की साजिश कर रही है सरकार: अग्निवेश

Updated at : 17 Jul 2018 5:22 AM (IST)
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रांची : आदिवासी हित के कानूनों को बदलने की साजिश कर रही है सरकार: अग्निवेश

खूंटी डीसी को स्वामी अग्निवेश व आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने ज्ञापन सौंपा रांची : सरकार आदिवासी हित के कानूनों को बदलने की साजिश कर रही है. सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के सदस्य जॉनसन मसीह टूटी व अन्य ने खूंटी डीसी सूरज कुमार को उनके कार्यालय में ‘अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संवैधानिक […]

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खूंटी डीसी को स्वामी अग्निवेश व आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने ज्ञापन सौंपा
रांची : सरकार आदिवासी हित के कानूनों को बदलने की साजिश कर रही है. सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के सदस्य जॉनसन मसीह टूटी व अन्य ने खूंटी डीसी सूरज कुमार को उनके कार्यालय में ‘अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संवैधानिक प्रावधान व अन्य कानूनों की जरूरत बनाम शांति व स्वच्छ प्रशासन’ के विषय पर ज्ञापन सौंपा़ इसमें कहा गया है कि सरकार आदिवासी हित के कानूनों को बदलने की साजिश कर रही है.
संविधान के भाग 10 के अनुच्छेद 244(1) के तहत पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का अनुपालन किया जाना है़ यह अनुसूची, अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन व नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की अलग अलग भूूूमिकाओं व जिम्मेदारियों को परिभाषित करती है़
अनुसूचित क्षेत्रों की सारी समस्याएं राज्य की कार्यपालिका व विधायिका की अनुसूचित क्षेत्रों के विधायिका क्षेत्र में घुसपैठ करने से शुरू होती है़ सामान्य क्षेत्र के नियम व कानूनों को अनुसूचित क्षेत्रों पर थोपने की प्रक्रिया पर इसका अंत होता है़ यह दुखद है कि अनुसूचित क्षेत्र से संबंधित राज्यपाल के विशेष अधिकार क्षेत्र पर राज्य सरकार की कार्यपालिका का हस्तक्षेप स्पष्ट दिखता है़
जनाक्रोश का स्मारक है पत्थलगड़ी
विगत तीन साल में राज्य सरकार ने सीएनटी व एसपीटी कानून (जो आदिवासियों की आर्थिक रीढ़ के कानून हैं) से छेड़छाड़ शुरू किया है. यह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है़
गैर संवैधानिक तरीके से भूूमि- बैंक स्थापित किया गया है व लगभग 20.56 लाख एकड़ जमीन चिह्नित की गयी है, जो मोमेंटम झारखंड के तीन लाख, 55 हजार करोड़ रुपये के 210 एमओयू द्वारा विभिन्न कंपनियों को आवंटित किये जायेंगे़ इससे लोगों में तीव्र आक्रोश है और पत्थलगड़ी उनके इस आक्रोश का स्मारक है़
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