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झारखंड विधानसभा नियुक्ति घोटाला : बिना पद के हुई नियुक्ति, गवर्नर के हस्तक्षेप के बाद इन तथ्यों पर हुई जांच

Updated at : 18 May 2018 7:21 AM (IST)
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झारखंड विधानसभा नियुक्ति घोटाला : बिना पद के हुई नियुक्ति, गवर्नर के हस्तक्षेप के बाद इन तथ्यों पर हुई जांच

रांची : विधानसभा में नियुक्ति-प्रोन्नति घोटाले की जांच अंतिम चरण में है़ जांच आयोग को ऐसे कई तथ्य मिले हैं, जिसमें विधानसभा में हुई नियुक्तियों में अनियमितता की बात सामने आ रही है़ जांच आयोग ने राज्यपाल की अनुशंसा और उठाये गये सवालों के आलोक में जांच की है़ पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी और […]

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रांची : विधानसभा में नियुक्ति-प्रोन्नति घोटाले की जांच अंतिम चरण में है़ जांच आयोग को ऐसे कई तथ्य मिले हैं, जिसमें विधानसभा में हुई नियुक्तियों में अनियमितता की बात सामने आ रही है़ जांच आयोग ने राज्यपाल की अनुशंसा और उठाये गये सवालों के आलोक में जांच की है़ पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी और आलमगीर आलम के कार्यकाल में लगभग छह सौ लोगों की नियुक्ति अलग-अलग पदों पर हुई़
सभी पदों पर नियुक्ति में पैरवी पुत्रों की चली़ विधानसभा में नियुक्ति के दौरान नियम-कानून की धज्जियां उड़ायी गयी़ं ऐसे पदों पर भी नियुक्ति हुई, जो पद थे ही नही़ं बिना स्वीकृत पदों पर लोग बहाल किये गये़ उर्दू सहायक, उर्दू प्रशाखा पदाधिकारी, शोध सहायक सह सूचीकर, उप मुख्य उद्यान पर्यवेक्षक जैसे कई नये-नये पदों पर नियुक्ति हुई़ यही नहीं उर्दू भाषा के लिए अनुसेवक उर्दू के पद पर भी बहाली की गयी़ कई पदों की संख्या का विज्ञापन में उल्लेख भी नहीं किया गया था़ इन सारे तथ्यों की भी जांच आयोग कर रहा है़ विधानसभा नियुक्ति घोटाले में भी यह भी बात सामने आयी कि साक्षात्कार में भी धांधली हुई थी़
अपने चहेते को बहाल किया गया़ साक्षात्कार कमेटी के अध्यक्ष सह सदस्य कौशल किशोर प्रसाद विधानसभा के कार्यों में व्यस्त थे, तो टाइपिंग शाखा के तारकेश्वर झा और सहायक महेश नारायण सिंह ने अभ्यर्थियों का इंटरव्यू लिया़ इंटरव्यू इन लोगों ने लिया और हस्ताक्षर साक्षात्कार कमेटी के सदस्यों ने किया़
गवर्नर के हस्तक्षेप के बाद इन तथ्यों पर हुई जांच
तैयार मेधा सूची में कई रोल नंबर पर ओवर राइटिंग की गयी थी
अनुसेवक के रूप में कथित रूप से चयनित व्यक्तियों को आदेशात्मक रूप से नियुक्त कर लिया गया
पलामू के 13 अभ्यर्थियों को स्थायी डाक -पता पर नियुक्ति की सूचना दी गयी. 12 घंटे के भीतर अभ्यार्थियोें को पत्र मिल गया और दो दिनों के अंदर योगदान भी कर लिया़ इसके साथ अनुसेवक के रूप में बहाल लगभग 150 अभ्यर्थियों में आधे से अधिक पलामू जिला के थे़ तत्कालीन स्पीकर इंदर सिंह नामधारी भी पलामू से ही संबंध रखते है़ं मिल गया.
नियुक्ति- प्रोन्नति में पिक एंड चूज पद्धति अपनायी गयी. विज्ञापन में पदों की संख्या का उल्लेख नहीं था.गठित नियुक्ति कोषांग में कौशल किशोर प्रसाद और सोनेत सोरेन को शामिल किया गया, जिनके खिलाफ एमपी सिंह ने प्रतिकूल टिप्पणी की थी.
चालकों की 17 नियुक्तियों में 14 को एमवीआइ ने जांच में असफल पाया था, बावजूद इसके नौकरी पर रख लिये गये.
ड्राइवरों की नियुक्ति के लिए निकाले गये 28 दिसंबर 2006 के विज्ञापन में तय अंतिम तिथि तक पार्थ सारथी चौधरी ने अपना आवेदन नहीं जमा कराया था. वे लेकिन तत्कालीन विधायक निरसा अपर्णा सेन गुप्ता के भाई थे. फिर भी इनको साक्षात्कार के लिए बुलाया गया़
इंदर सिंह नामधारी के अध्यक्ष काल में प्रतिवेदकों के 23 पदों के विरुद्ध 30 व्यक्तियों की नियुक्ति की गयी.
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